बिहार में नई नियमावली शिक्षा प्रणाली से तीन लाख शिक्षकों की नियुक्ति होंगी–चरमराती शिक्षा व्यवस्था में जान फूंकने का काम करेगी।
नई नियमावली शिक्षा प्रणाली से तीन लाख शिक्षकों की नियुक्ति होंगी।
बिहार के चरमराती शिक्षा व्यवस्था में जान फूंकने का काम करेगी।
नीतीश–तेजस्वी सरकार की नई नियमावली शिक्षा प्रणाली बिहार के चरमराती
शिक्षा व्यवस्था में जान फूंकने का काम करेगी।
बिहार में तीन लाख शिक्षकों की नियुक्ति होंगी-नीतीश और तेजस्वी
सरकार की घोषणा। बिहार में बहुत दिनों से शिक्षकों कि नियुक्ति के लिए एक तरफ
अभ्यार्थी लोग शोर मचा रहे थे कि बहाली कब निकलेगी? और दूसरी ओर सरकारी स्कूली शिक्षा पर आश्रित लोग ये कह रहे थे कि
गुणावली शिक्षकों की नियुक्ति बिहार में कब होगी? इन दोनों समस्या का हल और ये दोनों सवालों का जवाब नीतीश—तेजस्वी की
सरकार के इस घोषणा में मिल जाता है।
शिक्षा विश्लेषकों का भी यहीं कहना है कि जिस नियमावली के साथ बिहार
सरकार के द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति की घोषणा कि गई है, वो बिहार को एक गुणात्मक शिक्षा प्रणाली के
मार्ग की ओर ले जाने को प्रतिबद्ध होगा। सरकार की यह नियमावली से बिहार के शिक्षा
व्यवस्था में अमूल्य-चूल परिर्वतन होगें। बिहार में इस शिक्षा प्रणाली की नितांत
ज़रूरत थी। यह नियमावली बिहार के चरमराती शिक्षा व्यवस्था में जान फूंकने को काम
करेगी, ये मील का पत्थर साबित होगा।
जिस प्रकार से शिक्षामित्रों का बहाल करने से बिहार के शिक्षा
व्यवस्था एक ठगी का प्रतिक बनता जा रहा था। लोग शिक्षकों के योग्यता पर सवाल खड़े
करते रहते थे कि बिहार के शिक्षकों को कुछ नहीं आता है और ये लोग मुफ्त का वेतन
उठाते हैं। बिहार के इन शिक्षकों के अन्दर वाकई में ऐसा गुण देखा जाता है। अधिकांश
शिक्षामित्रों शिक्षकों इतना योग्य नहीं दिखते कि वे बिहार के सराकरी शिक्षा
व्यवस्था को उच्च कोटी का बना दें।
बिहार में जिस प्रकार से बीएड काॅलेज खोले जा चुके हैं, उसे देखने से ये लगता है कि शिक्षा के साथ
खिलवाड़़ किया जा रहा है। ये काॅलेज वैसे शिक्षक देने में सक्षम नहीं है कि बिहार
के डूबते शिक्षा व्यवस्था को बचा सके। इसके लिए जरूरत ये भी है कि सरकार हीं उच्च
कोटी के शिक्षकों का बहाल करे, ताकि
शिक्षा में सुधार हो।
बिहार के शिक्षा व्यवस्था पर कई सालों से सवाल खड़े हो रहे थे और
शिक्षामित्रों की नियुक्ति के बाद इन सवालों में बहुत तेजी आ गई थी। शिक्षा
व्यवस्था डूबता दिखाई पड़ने लगा था। अब नये नियमावली के द्वारा बहाल शिक्षकों से बिहार
शिक्षा व्यवस्था पर विराम लगने की उम्मीद बढ़ जाती है। सरकार का इस फैसला से सरकारी
शिक्षा प्रणाली पर आश्रित बच्चों के जीवन बेहतर होना तय माना जा सकता है।
पटना वीमेंस काॅलेज के एक यूजी की छात्रा बताती है, “बिहार में उतम शिक्षकों की आवश्यक्ता है। यदि
क-ख-ग पढ़ाना है, तब तो जैसे चल रहा है, वो चलने दीजिए कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन, यदि बच्चों को डाॅक्टर, इंजीनियर अदि बनाने हैं, तो उतम शिक्षकों की तालाश करनी होगी।”
वह कहती हैं,
“बच्चों को स्कूल
में उसके गांव से, उसके घर से बेहतर माहौल देने की
आवश्यकता है। ऐसे शिक्षक चाहिए, जो
स्कूल में बच्चों को उसके घर से बेहतर सोसाईटी का निर्माण करके दे। बिहार सरकार को
ऐसे शिक्षकों की मंडली तैयार करने की जरूरत है जिसमें बच्चे पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जिन्दगी बनाने के लिए जाए।”
सच में यह काम एक बेहतर शिक्षक ही कर सकते हैं। इसके लिए सरकार के
द्वारा शिक्षको की नियुक्ति के लिए लागू किया गया नया नियमावली पहले से बेहतर
साबित हो सकती है इसमें कोई दो राय नहीं।

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