किसानों के तीन हजार प्रति क्विंटल गेंहू
का दाम माँगा, तो
विधान सभा से निलंबित किये गए।
मध्यप्रदेश कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी
ने भाजपा की चौहान सरकार को चैलेंज करते हुए- प्रेस वार्ता में कहा, “हमारे
किसानों को तीन हजार प्रति क्विंटल के दर से गेंहू का दाम दो, नहीं
तो अपनी गद्दी छोड़ो, हमलोग देने का काम करेंगे।”
विधायक जीतू पटवारी किसान के इस मुद्दा को
प्रदेश में लागातर उठा रहें हैं, लेकिन
भाजपा की सरकार के कान में जू तक नहीं रेंग रही है और बहरी होने का नाटक भी कर रही
है। विधायक जीतू यहीं बात विधान सभा में रखा, तो
इन्हे सभा से आज के लिए निलंबित कर दिया गया। उन्होंने यह जानकारी हाऊस से बाहर
निकलते हीं प्रेस के साथ सार्वजनिक किया।
विधायक ने प्रेस से कहा, “महंगाई का किसानों पर भी असर हुआ है और जब
मंहगाई की राहत की बात होती है, तो
किसानों कि बात क्यों नहीं होती है? खाद्य
के दाम बढ़ गए, डीजल
के दाम बढ़ गए, रासायनिक
के दाम बढ़ गए और मजदूरी के भाव भी बढ़ गए, लेकिन
किसानों के सरकारी राहत के दाम को अभी तक नहीं बढ़ाये गए हैं। किसानों के राहत के
लिए सरकारी दामों में बढ़ोत्तरी की माँग गलत है क्या?
पटवारी ने कहा,
“सरकार के ही आँकड़े बता
रहें है कि प्रदेश के किसान प्रतिदिन सताईस से अठाईस रुपये हीं कमाते हैं। सरकारी
आँकड़े बता रहें हैं कि राज्य के किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। इसलिए मैं कहता
हूँ कि किसानों के फसलों के दाम सरकार को निश्चित करने पड़ेंगे। खासकर, अनाज के दाम को तीन हजार
प्रति क्विंटन करने होंगे और गेंहू के दाम 3,000रुपए प्रति क्विंटल मिलना चाहिए।”
विधायक जीतू ने आगे कहा, “मैं
भारतीय जनता पार्टी के किसानों से भी अनुरोध करता हूँ कि आप भारतीय जनता पार्टी को
वोट देते हैं, वो
आपका मन है और आपके अतंर्मन की इच्छा है, लेकिन
किसान के हीत की बात होगी तो आप भी तो किसान हो, अपका भी हीत की बात होगी।
ये पार्टी से ऊपर की मुद्दा है। इसपर सभी को मिलकर बात करने की ज़रूरत है और सरकार
से हक लेने का समय है।”
विधायक ने कहा कि शिवराज जी, 3,000 रुपए प्रति क्विंटल के रेट से किसानों के
फसलों का दाम दो, अन्यथा
कुर्सी छोड़ो। नई सरकार आएगी, वो
देगी। हमारी इस माँग को कोई कहता है ये राजनीतिक भाव है, तो
ये समझो, है।
राजनीतिक में काम करनेवाले व्यक्ति का हमेशा ये भाव रहता है कि वे अपने हीत के व
अपने लोगों के हीत के लिए काम करे। किसान की औलाद हूँ, किसान
का बेटा हूँ और मेरे पिताजी रोज खेती करते हैं। उस खेती से जीता हूँ और हमारी रोजी-रोटी धरती माँ
देती है, तो
किसान भईयों के लिए मैं बात नहीं करूंगा, तो कौन करेगा?
विधान सभा में जैसे हीं मैंने
ये बात किया मुझे निलंबित कर दिया। शिवराज सरकार हमेशा के लिए मुझे विधान सभा से
भगा दे तब भी मैं यहीं बात करूंगा, किसानों के हक के लिए
लड़ता रहूँगा और 3,000रुपए प्रति क्विंटल के
भाव देने होंगे के लिए लड़ता रहूँगा।

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