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बाबा रामदेव ने भारत के पढेलिखे युवाओं, जनता और टीवी जगत के दिग्गज पत्रका...

अब इस बात से इनकार नहीं कर सकते या हमे इससे अपना मुहँ नहीं फेरना चाहिए कि भारत ऐसा देश बन चुका है जहाँ बाबाओं को लोग बहुत पसंद करते हैं , इनके बात को बड़े चाब से चबा-चबा कर हजम करते हैं इसलिए यहाँ बाबाओं के पास भीड़ लगी होती है। साधुसंत जैसे सोच या विचार प्रकट करनेवाले महाशयों को भी भारत के लोग दिलों जान से चाहते हैं। इन्हें अपने घरों में स्थान देने में भी नहीं हिचकते। जबकि , यदि एक ईमानदार व्यक्ति कितनों समझा दे कि आपके लिए ये ठीक रहेगा फ़िर भी इसकी बात नहीं मानते हैं और जब एक बाबा वहीँ बात कह दे तो लोगों पहले बाबा के बातों को जल्द हीं समझ में आ जाता है। खास बात यह है कि भारत के लोग उनके बात में आ जाते हैं और उनके भाषणों पर तालियां बजाते है जो बहुत कम पढ़े होते हैं। आपको विश्वास नहीं हो रहा होगा , आप सबूत मांग रहें होंगें तो लीजिये पेश है । वर्ष 2013-14 का समय तो याद होगा! भारत के इस दौर को हमेशा याद किया जायेगा और बड़े हीं सिद्दत के साथ याद किया जायेगा। क्योंकि , भारत का यहीं वो समय था जिसमें बाबाओं के बात पर भारत के लोगों ने कथक किया और एक कम पढ़े वैसा व्यक्ति जिसने अपने पत्नी , माँ-बाप...

दो हजार के नोटों का दर्शन हुआ दुर्लभ आब तो एटीम भी हमें इस नोट को देने ...

देखिये! आप मुझसे नाराज मत होइएगा ,  हम भी आपके जैसे हैं जनाब। देशभक्त हैं । आप चाहे तो हमारी परीक्षा ले सकते हैं ,  लेकिन एक बात का ख्याल रखियेगा कि हम हनुमान और राम को नहीं मानते हैं। हम भागवत गीता का पाठ पढ़ाने वाले श्री कृष्ण को मानते हैं। इसलिए आप    हमसे हनुमान जैसे सीना चीर कर दिखाने की उम्मीद मत कीजियेगा। हाँ ,  इतना हमसे उम्मीद तो कर हीं सकते हैं कि हम अपने भूमि के लिए जान तक दे सकते हैं ,  वो ऐसे    जिस प्रकार से एक सिपाही अपने वतन की रक्षा करने में अपनेआप को समर्पित कर देता है वैसे हीं हमसे उम्मीद कर सकते हैं। तो हमारे साथ बोलिए ,  भारत माता की जय !   असली मुद्दा पर लौटने का वक्त आ गया है। करीब छह महीना से जब भी एटीएम में जाता हूँ ,  पैसा निकलता हूँ और एटीम से पैसा निकलता है लेकिन हमे तो सिर्फ पांच सौ के नोट हीं मिलते हैं। बहुत दिनों से दो हजार के नोट हमे नहीं मिल रहा है। इस नोट को सिर्फ आर्थिक समाचार पत्रों के पन्नो पर हीं देखता हूँ। इतना हीं नहीं ,  आपको यह भी बता देना चाहता हूँ कि मेरा असली काम ये लिखने का नहीं है...

रामधारी सिंह दिनकर के द्वारा लिखी गई कविता "जनतंत्र का जन्म" याद आ गई तो...

भारत के किसान लगभग चार महीनों से दिल्ली के पास आंदोलन कर रहें हैं। दिल्ली के कड़ाके की ठण्ड से शुरुआत हुआ आंदोलन आज उतरी भारत के तपती जून और बॉडी को झुलस कर रख देनेवाली गर्मी तक आ पहुंचा है। इतना होने के बाद भी भारत सरकार को किसानों के हालात समझ में नहीं आ रही है। किसानों के मांग को आज तक सुना नहीं गया। मनमोहनसिंह जब भारत के प्रधानमंत्री तब देश के लोगों के लिए उपवास रखकर आंदोलन करनेवाले अन्ना हजारे भी किसानों को धोखा दे गए। ये जनाब बोले थे कि यदि मोदी सरकार जनवरी तक किसानों की बात नहीं मानती है तो हम किसानों के समर्थन में अपने जीवन का आखरी भूख हडताल पर बैठेंगें। लेकिन , जैसे हीं जनवरी और फरवरी भी आया तो अन्ना हजारे मोदी के बड़े नेता के साथ बैठकर पत्रकारों को बताये कि अब हम किसानों के समर्थन में भूख हड़ताल पर नहीं बैठेंगें!   https://youtu.be/cQzLXWh9MDI आप सोच रहे होंगें कि इस घटना पर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखित कविता का कविता पाठ करने का मतलब क्या है ? मैं भी इन्सान हूँ जनाब और देशभक्त भी। इतना हीं नहीं , भारतमाता के नारे रोज सुबह-सुबह लगाता हूँ इसलिए अपने दर्द को बत...

अमरुद- अमरुद का नाम लेते हीं बचपन की बहुत सारे यादें अंगडाईयां लेने शुरू कर देती है जैसे!

अमरुद का नाम लेते हीं बचपन की बहुत सारे यादें अंगडाईयां लेने शुरू कर देती है। जैसे, बिहार राज्य के नालंदा जिला के जिस गांव में बचपन गुजरा वहां के लोग अपने घरों में अमरुद का पेड़ लगाने के रिवाज से ओत-प्रोत थे। घर के दरवाजे के पास भी कुछ लोग अमरुद का पेड़ लगाया करते, लेकिन ऐसे लोगों की संख्या न के बराबर थी, यूं कहें था हीं नहीं। गांव में जीतने अमरुद के पेड़ थे वो सभी एक चाहरदीवारी के अन्दर कैद थे और इसके साथ इसपर कठोर पहरा देने की प्रथा थी। पहरा ऐसा होता जैसे आज के नेता चुनाव के समय अपने मतदाताओं पर देते हैं। आज भी यहाँ अमरुद की गाछ दरवाजे के पास ही देखने को मिलता हैं, हलांकि घर के आंगन में लगाना लोग छोड़ चुके हैं, क्योंकि अब के घर पहले जैसा मिट्टी के दिवार से या बीस इंच मोटी ईंट से बने नहीं हैं बल्कि दस इंच के पक्की ईंट और सीमेंट से मिलकर बनी है। समय के अनुसार सब कुछ बदल जाता है और बदलने में हीं समझदारी है लेकिन एक बात जो आज भी यहाँ के लोगों में कूट-कूट कर भरा पड़ा है वो है अमरुद से लादे पेड़ के प्रति प्रेम और इसपर पहरा देने का रिवाज आज भी यह प्रथा वैसे हीं मौजूद है जैसे नब्बे के दशक में ...

एक कप चाय, मिट्टी वाली में - चाय को पीने में जो मजा है, वो मजा सात समन्दर पार जाकर भी नहीं वो कैसे !

एक कप चाय से याद आया कि मिट्टी के बर्तन वाली चाय को पीने में जो मजा है, वो मजा सात समन्दर पार जाकर एक प्रेमी को अपने प्रेमिका या एक प्रेमिका को अपने प्रेमी से मिलने में भी नहीं होगा! लेकिन वो मजा इस चाय पीने में आपको मिलेगा।  आप महिला हों या पुरुष यदि आप अपने जीवन में, प्रेम में प्रवाहित होने के आनंद से वंचित रह गाएं हैं तो हमारी मानिये एक बार इस चाय के प्रेम में बह जाइये, डूब जाइये और इसके गर्माहट में गोते लगा लीजिये! इसके मंद-मंद सुगंध में अपने नाक के दोनों सुराग को झोंक दीजिये। लेकिन एक बात का ख्याल रखियेगा,   इस चाय को पीने में कभी जल्दीबाजी नहीं कीजियेगा। नहीं तो, आपका जीभ आपसे नाराज हो जायेगा। बेमतलब के आप बेचारा स्वभाव से कोमल जीभ को रुखा कर दीजियेगा। यदि आपको विश्वास नहीं होता, तो एक बार मिट्टी वाला चुक्का में परोसी गई चाय को अपने होंठ से लगाकर और चाय को जीभ पर गिराकर तो देखिये! जैसे हीं, यह चाय आपके जीभ को स्पर्श करेगी वैसे हीं आप स्वयं इसके स्वाद से परिचित हो जाएंगें। हमारी मानिये तो आज हीं आप नुक्कड़ वाली एक कप चाय का मज़ा ले लीजिये। भारत आधुनीकता की ओर कदम बढ़ा च...

नरेंद्र मोदी सरकार को भी कुछ करने व भारत के किसानों के हीत को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने का समय आ गया है।

नरेंद्र मोदी सरकार को भी कुछ करने व भारत के किसानों के हीत को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने का समय आ गया है। जिस प्रकार से मनमोहनसिंह कि सरकार ने देश के गरीब बच्चों को विकास के लिए शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार में शामिल किये उसी प्रकार से भारत के किसानों के जीवन को सुरक्षित रखने व उन्हें आत्महत्या करने से रोकने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को भी कुछ करने की जरूरत है। ऐसे फैसला लेने का समय आ गया है कि मोदी सरकार किसानों के साथ हमदर्दी दिखाये। यह समय आ गया है।  सच में, मोदी सरकार किसानों का विकास चाहती है, भारत के किसानों का भला चाहती है, किसानों को आत्महत्या करने से रोकना चाहती है तो पहले सरकार अपने तीन नए कृषि कानूनों को समाप्त कर देना होगा। सरकार अपने नए तीन कृषि कानूनों को समाप्त करके भी किसानों का विकास सम्भव कर सकती है। इसके लिए पहले मोदी सरकार अपने तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लें, उसके बाद मोदी सरकार एमएसपी को एक कठोर कानून में तब्दील कर दे। इसमें गड़बड़ करने वाले अधिकारियों को कड़ी से कड़ी सजा देने का प्रवधान किया जाय और वहीँ किसानों के लिए इस कानून को सरल व सुगम व्यवस्था के...

एक सेल्स मैन को कामयाबी की सीढियाँ चढ़ने के लिए शारीरिक रूप से फिट होना बहुत जरुरी है।

एक सेल्स मैन को शारीरिक रूप से फिट होना बहुत हीं जरुरी है क्योंकि इन्हें प्रति दिन नये लोगों के साथ मिलना होता है। एक सेल्स मैन को कामयाबी की सीढियाँ चढ़ने के लिए शारीरिक रूप से फिट होना बहुत जरुरी है। क्योंकि इन्हें प्रति दिन नये लोगों के साथ मिलना होता है। एक सेल्स मैन को शारीरिक रूप से फिट होना बहुत हीं जरुरी है, इसलिए इस पेशे से जुड़े हुए व्यक्ति को अपने शरीर पर खास तरीके से ध्यान देना चाहिए। ऐसे तो एक अच्छा स्वस्थ शरीर सभी पेशे से जुड़े हुए व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखता है, लेकिन सेल्स काम के साथ जुड़े हुए व्यक्ति के लिए अच्छा स्वस्थ शरीर की बहुत आवश्यकता होती है। यदि आप प्रति दिन नये लोगों से मुलाकात करनेवाला काम करते हैं, सेल्स का काम करते हैं, इधर-उधर घूम कर लोगों से मीटिंग करने का काम करते हैं तो आपको मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार से मजबूत होना होगा। एक शरीर से कमज़ोर और निर्बल व्यक्ति को सेल्स का काम नहीं करना चाहिए। इन्हें या तो कोई दूसरा काम ढूंड लेना चाहिए या अपने शरीर को तंदुरस्त करने में भीड़ जाना होगा। आख़िर क्यों एक सेल्स मैन को अपने स्वास्थ का देखभाल करना जरुरी ह...