अब इस बात से इनकार नहीं कर सकते या हमे इससे अपना मुहँ नहीं फेरना चाहिए कि भारत ऐसा देश बन चुका है जहाँ बाबाओं को लोग बहुत पसंद करते हैं , इनके बात को बड़े चाब से चबा-चबा कर हजम करते हैं इसलिए यहाँ बाबाओं के पास भीड़ लगी होती है। साधुसंत जैसे सोच या विचार प्रकट करनेवाले महाशयों को भी भारत के लोग दिलों जान से चाहते हैं। इन्हें अपने घरों में स्थान देने में भी नहीं हिचकते। जबकि , यदि एक ईमानदार व्यक्ति कितनों समझा दे कि आपके लिए ये ठीक रहेगा फ़िर भी इसकी बात नहीं मानते हैं और जब एक बाबा वहीँ बात कह दे तो लोगों पहले बाबा के बातों को जल्द हीं समझ में आ जाता है। खास बात यह है कि भारत के लोग उनके बात में आ जाते हैं और उनके भाषणों पर तालियां बजाते है जो बहुत कम पढ़े होते हैं। आपको विश्वास नहीं हो रहा होगा , आप सबूत मांग रहें होंगें तो लीजिये पेश है । वर्ष 2013-14 का समय तो याद होगा! भारत के इस दौर को हमेशा याद किया जायेगा और बड़े हीं सिद्दत के साथ याद किया जायेगा। क्योंकि , भारत का यहीं वो समय था जिसमें बाबाओं के बात पर भारत के लोगों ने कथक किया और एक कम पढ़े वैसा व्यक्ति जिसने अपने पत्नी , माँ-बाप...