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अखिलेश यादव ने मांगी आरोपियों की CDR जांच, अजय राय का दावा— 'तार RSS और BJP मुख्यालय से जुड़े':राम मंदिर चंदा विवाद।।



अखिलेश यादव ने मांगी आरोपियों की CDR जांच, अजय राय का दावा— 'तार RSS और BJP मुख्यालय से जुड़े':राम मंदिर चंदा विवाद।।

​लखनऊ / नई दिल्ली/N5: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और उसके चंदे को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और केंद्र सरकार को घेरते हुए बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। 

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय राय के हालिया बयानों ने इस राजनीतिक विवाद को और हवा दे दी है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि राम मंदिर चंदे में हुई कथित हेराफेरी के तार सीधे तौर पर सत्ताधारी दल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े हैं।

​अखिलेश यादव की चुनौती: 'निकलवाया जाए CDR, मच जाएगी भगदड़'

​इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चंदे में कथित चोरी और जमीन खरीद-बिक्री में धांधली का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया। 

अखिलेश यादव द्वारा आवाज उठाए जाने के बाद भाजपा के कई सांसदों और वरिष्ठ नेताओं ने उन पर तीखा पलटवार किया और उन्हें ही इस मामले में घेरने की कोशिश की।

​बीजेपी के हमलों का जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने साफ और कड़े शब्दों में सरकार को एक बड़ी चुनौती दे डाली। 

सपा प्रमुख ने कहा, "राम मंदिर के नाम पर हुए चंदे के खेल में जितने भी लोग आरोपी हैं, उन सभी का तुरंत सीडीआर (Call Detail Record) निकलवाया जाना चाहिए।" अखिलेश यादव ने दावा किया कि अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है और कॉल डिटेल्स सामने आती हैं, तो 99.99% आरोपियों के तार सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं से जुड़े मिलेंगे।"

उन्होंने आगे कहा, "यदि ऐसा हुआ, तो भाजपा के अंदर भारी भगदड़ मच जाएगी और कई बड़े चेहरों बेनकाब हो जाएंगे।"

अजय राय का बड़ा खुलासा: पीएमओ और नृपेंद्र मिश्रा पर साधा निशाना

​अखिलेश यादव के इस आक्रामक रुख के बीच, वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके कांग्रेस के दिग्गज नेता और यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने भी इस विवाद में एंट्री ली है। अजय राय ने इस मामले में एक ऐसा खुलासा किया है जिसने सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

​अजय राय ने प्रशासनिक कड़ियों को जोड़ते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे पूरे पांच साल तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'प्रधान सचिव' (Principal Secretary) रह चुके हैं। वे प्रधानमंत्री के सबसे करीबी और भरोसेमंद नौकरशाहों में से एक रहे हैं।

​अजय राय ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा, "राम मंदिर चंदे में जो भी गड़बड़ी या हेराफेरी हुई है, उसके तार कहीं न कहीं आरएसएस (RSS) और दिल्ली स्थित भाजपा के केंद्रीय मुख्यालय से जुड़े हुए हैं। बिना शीर्ष नेतृत्व के संरक्षण के इतनी बड़ी धांधली मुमकिन नहीं है।"

निष्कर्ष: विपक्ष द्वारा सीडीआर (CDR) जांच की मांग और सीधे पीएमओ तथा आरएसएस पर निशाना साधे जाने के बाद यह तय है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा शांत नहीं होने वाला है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट होकर सड़क से लेकर संसद तक सरकार को घेरता है, तो यह आगामी चुनावों में एक बड़ा सियासी हथियार बन सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार विपक्ष की इस चुनौती को स्वीकार कर किसी उच्च स्तरीय जांच का आदेश देती है या यह विवाद केवल बयानों तक ही सीमित रहेगा।
​(यह लेख राजनीतिक बयानों और दावों पर आधारित एक निष्पक्ष रिपोर्ट है।)
Shailendra Kumar
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