भरत तिवारी एनकाउंटर पर गरमाई सियासत: अखिलेश यादव ने कहा— 'फर्जी एनकाउंटर का संविधान में कोई स्थान नहीं'
भरत तिवारी एनकाउंटर पर गरमाई सियासत: अखिलेश यादव ने कहा— 'फर्जी एनकाउंटर का संविधान में कोई स्थान नहीं'
पटना/लखनऊ/N5: बिहार के भोजपुर में पुलिस मुठभेड़ के दौरान युवक भरत (तिवारी/शर्मा) की मौत के बाद से राज्य में राजनीतिक और सामाजिक माहौल पूरी तरह से गरमा गया है।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और विपक्ष लगातार सरकार की 'एनकाउंटर नीति' पर सवाल खड़े कर रहा है।
इसी कड़ी में, पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति को मुख्यधारा में लाने वाले समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस एनकाउंटर को लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकारों को आड़े हाथों लिया है।
लोकतंत्र और संविधान से बाहर हैं एनकाउंटर: अखिलेश यादव।
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने इस घटना को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे 'फर्जी एनकाउंटरों' की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा;
"फर्जी एनकाउंटर करने वाले कानून के रक्षक नहीं, बल्कि खुद लोकतंत्र के गुनहगार हैं। भारतीय संविधान देश के हर नागरिक को जीवन और निष्पक्ष न्याय का अधिकार देता है, लेकिन इस तरह की कार्रवाई से हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म करने की एक बड़ी साजिश रची जा रही है।"
जनता में भारी आक्रोश, विपक्ष ने दागे सवाल
भरत की मौत के बाद बिहार में स्थानीय जनता और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी गुस्सा देखा जा रहा है।
सड़कों पर उतरकर लोग पुलिस प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी इसे पूरी तरह एकतरफा और 'फेक एनकाउंटर' करार देते हुए मुख्यमंत्री से माफी और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
जनता का गुस्सा: घटना के बाद से बिहार के कई हिस्सों में तनाव का माहौल है, जहां लोग पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।
विपक्ष का भाजपा पर हमला: समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने सवाल उठाया है कि क्या इस कथित फर्जी एनकाउंटर और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर सत्ताधारी दल (भाजपा) का कोई बड़ा नेता अपनी चुप्पी तोड़ेगा या इसका विरोध करेगा?
संविधान की दुहाई: नेताओं का कहना है कि सजा तय करने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है, पुलिस को खुद जज बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
निष्कर्ष: इस मामले के तूल पकड़ने के बाद अब यह देखना अहम होगा कि क्या इस पूरे प्रकरण की कोई न्यायिक जांच कराई जाती है या राजनीतिक बयानबाजी का यह दौर यूं ही जारी रहेगा।
