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क्या भेंट चढ़ रही है टीम इंडिया वैभव को मौका और अय्यर की कप्तानी-सचिन के ढर्रे की नहीं, 'सूर्या' के इम्पैक्ट की जरूरत।।



क्या भेंट चढ़ रही है टीम इंडिया वैभव को मौका और अय्यर की कप्तानी-सचिन के ढर्रे की नहीं, 'सूर्या' के इम्पैक्ट की जरूरत।। 

नई दिल्ली/N5: भारतीय क्रिकेट टीम इन दिनों एक बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। एक समय अपनी बादशाहत के लिए मशहूर रही 'वर्ल्ड चैंपियन क्लास' टीम इंडिया आज लगातार हार और क्लीन स्वीप के संकट से जूझ रही है। 

हाल ही में मिली करारी हार के बाद अब टीम के चयन, युवाओं को अत्यधिक तवज्जो और कप्तानी के तौर-तरीकों पर क्रिकेट पंडितों और फैंस ने तीखे सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

​चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बने हैं अंडर-19 के उभरते खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी, जिन्हें सीनियर टीम में शामिल किए जाने के फैसले को टीम के पतन का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। आलोचकों का तो यहाँ तक कहना है कि यह ठीक वैसी ही ऐतिहासिक भूल है, जैसी एक दौर में सचिन तेंदुलकर के समय देखी गई थी।

सचिन के दौर से तुलना: क्या इतिहास खुद को दोहरा रहा है?

​क्रिकेट विश्लेषकों के एक वर्ग का मानना है कि जब तक सचिन तेंदुलकर भारतीय टीम के मुख्य स्तंभ रहे, तब तक टीम इंडिया व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स के इर्द-गिर्द घूमती रही और बड़े वैश्विक खिताबों (वर्ल्ड कप) के लिए तरसती रही। आज वैभव को लेकर भी कुछ ऐसी ही स्थिति बनती दिख रही है। 

सीनियर और मैच-विनर खिलाड़ियों को बेंच पर बैठाकर अंडर-19 के इस युवा खिलाड़ी को लगातार मौके दिए जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप भारत को लगातार दो सीरीज में क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा है। जानकारों का कहना है कि भविष्य की टीम बनाने के नाम पर वर्तमान की मजबूत टीम की बलि नहीं दी जा सकती।

श्रेयस अय्यर की अपरिपक्व कप्तानी पर बरसे फैंस।।

​टीम की इस दुर्दशा का दूसरा और सबसे बड़ा कारण कप्तान श्रेयस अय्यर की 'अपरिपक्व' कप्तानी को माना जा रहा है। हालिया मुकाबले में, जहाँ भारत 257 रनों के विशाल और चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा कर रहा था, वहाँ कप्तान को छोड़कर टीम के लगभग सभी खिलाड़ियों ने बेहतरीन और जुझारू क्रिकेट का प्रदर्शन किया।

​पूरी टीम अंत तक लड़ी, लेकिन कप्तान श्रेयस अय्यर एक बार फिर गैर-जिम्मेदाराना शॉट खेलकर पवेलियन लौट गए। मैच के बाद से ही सोशल मीडिया पर अय्यर के शॉट सिलेक्शन और मुश्किल परिस्थितियों में टीम को लीड न कर पाने की क्षमता पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।

बदलाव की मांग: सचिन के ढर्रे की नहीं, 'सूर्या' के इम्पैक्ट की जरूरत।।

​आज के आधुनिक और तेज-तर्रार क्रिकेट में भारतीय टीम के खेलने के तरीके को बदलने की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है। क्रिकेट प्रेमियों का स्पष्ट मानना है कि टीम को अब पुराने ढर्रे के खिलाड़ियों की नहीं, बल्कि सूर्यकुमार यादव (SKY) जैसे 'इम्पैक्ट प्लेयर्स' की जरूरत है।

​सूर्या जैसे खिलाड़ी, जो क्रीज पर आते ही मैच का रुख बदलने का माद्दा रखते हैं, आज के दौर में टीम इंडिया के लिए एक्स-फैक्टर साबित हो सकते हैं। अनुभवी सीनियर खिलाड़ियों को नजरअंदाज कर युवाओं के साथ जरूरत से ज्यादा प्रयोग करना टीम को वर्ल्ड क्लास बनाने के बजाय उसे कमजोर कर रहा है।

निष्कर्ष: क्रिकेट में युवाओं को मौका देना गलत नहीं है, लेकिन जब बात अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की साख की हो, तो संतुलन सबसे जरूरी हो जाता है। अगर भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) और चयनकर्ताओं ने समय रहते सीनियर खिलाड़ियों की महत्ता को नहीं समझा और कप्तानी के मोर्चे पर ठोस बदलाव नहीं किए, तो टीम इंडिया को इस संकट से उबारना नामुमकिन हो जाएगा।
Shailendra Kumar
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