नरेंद्र मोदी सरकार को भी कुछ करने व भारत के किसानों के हीत को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने का समय आ गया है।
नरेंद्र
मोदी सरकार को भी कुछ करने व भारत के किसानों के हीत को ध्यान में रखते हुए फैसला
लेने का समय आ गया है।
जिस प्रकार से मनमोहनसिंह कि सरकार ने देश के गरीब बच्चों को विकास के लिए शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार में शामिल किये उसी प्रकार से भारत के किसानों के जीवन को सुरक्षित रखने व उन्हें आत्महत्या करने से रोकने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को भी कुछ करने की जरूरत है। ऐसे फैसला लेने का समय आ गया है कि मोदी सरकार किसानों के साथ हमदर्दी दिखाये। यह समय आ गया है।
सच में, मोदी सरकार किसानों का विकास चाहती है, भारत के किसानों का भला चाहती है, किसानों को आत्महत्या करने से रोकना चाहती है तो पहले सरकार अपने तीन नए कृषि कानूनों को समाप्त कर देना होगा। सरकार अपने नए तीन कृषि कानूनों को समाप्त करके भी किसानों का विकास सम्भव कर सकती है। इसके लिए पहले मोदी सरकार अपने तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लें, उसके बाद मोदी सरकार एमएसपी को एक कठोर कानून में तब्दील कर दे। इसमें गड़बड़ करने वाले अधिकारियों को कड़ी से कड़ी सजा देने का प्रवधान किया जाय और वहीँ किसानों के लिए इस कानून को सरल व सुगम व्यवस्था के साथ बनाया जाय। यह तब सम्भव है जब एमएसपी को किसानों के मौलिक अधिकार में शामिल किया जायेगा।
जबकि, भारतीय
किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत का मांग है कि केंद्र सरकार को विवादास्पद कृषि
कानूनों को वापस लेना चाहिए और न्यूनतम
समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली को पहले से बेहतर तरीके से लागू करना चाहिए। लेकिन नरेंद्र मोदी की
सरकार किसान के बातों को सुनने को अभी तक तैयार नहीं हुई है। क्या यहीं एक स्वच्छ
लोकतंत्र की पहचान होता है? जनता कृषि कानून का विरोध कर रही है और सरकार चुप-चाप
आंदोलन का मज़ा ले रही है जैसे देश में सरकस चल रहा हो! एक अच्छी लोकतान्त्रिक
सरकार जनता की आवाज को दबा कर अपनी कानून का लागू नहीं कर सकती। यदि ऐसा करती है
मतलब साफ है वह सरकार लोकतंत्र का हनन कर रही है। आंदोलन कर रहे किसानों का
कहना है कि भारत सरकार द्वारा लागू किया गया तीन कृषि कानून को समाप्त किया जाय।
इतना हीं नहीं पंजाब और भारत के दूसरे क्षेत्रों के किसान को एमएसपी कानून के रूप
में चाहिए। अब भारत के किसानों को कानून का मोहर लगा हुआ एमएसपी चाहिए, इसलिए पंजाब
और भारत के किसान भारत की राजधानी दिल्ली के पास आंदोलन कर रहे हैं। जबकि नरेंद्र
मोदी सरकार का कहना है कि तीन कृषि कानून से एमएसपी पर किसी प्रकार का खतरा नहीं
है। भारत के नरेंद्र मोदी की सरकार का कहना है कि हमारी सरकार
किसानों के एमएसपी को समाप्त नहीं कर रही, बल्कि तीन कृषि कानून को लागू कर रही है।
और यह सरकार आगे कहती है कि भारत के किसानों के एमएसपी सुरक्षित है। जब नरेंद्र
मोदी की सरकार किसानों से वादा कर रही है कि किसानों का एमएसपी सुरक्षित हैं, फ़िर
मोदी सरकार को किसानों का एमएसपी को कानूनी वैधता देने में किस बात की परेशानी हो
रही है ? मतलब साफ है कि नरेंद्र मोदी सरकार अपने तीन नए कृषि कानून के माध्यम से
किसानों का एमएसपी को लूटने की साजिश कर रही है। दूसरे शब्दों में कहा जाय तो
सरकार का उद्देश्य किसानों के हीत में बिल्कुल हीं नहीं है। जबकि आंदोलन कर रहे
किसान चाहते हैं कि किसानों का एमएसपी जीवित रखा जाय और एमएसपी को कानून वैधता
प्रदान किया जाय। इस समय भारत में नोटबंदी जैसी साजिश के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। आपको
मालूम होना चाहिए कि अभी तक सम्पूर्ण भारत में एमएसपी को कठोरता के साथ लागू हीं
नहीं किया गया है। भारत के किसानों की बहुत बड़ी संख्या एमएसपी के फायदा से अभी
कोसों दूर है। आपको बता दूँ कि भारत के पिछड़ा राज्य बिहार के सम्पूर्ण किसान अभी भी एमएसपी
से परिचित तक नहीं हुए हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो इस राज्य में अभी एमएसपी की
शुरुआत हीं हुई है। बिहार में एमएसपी से जुड़े सरकारी अधिकारी मनमाने ढंग से काम
करते हैं, जिससे किसान लोग फायदा नहीं उठा रहे हैं। यहीं वजह है कि बिहार के किसान
अपने पूर्ण ताकत के साथ इस आंदोलन में शामिल नहीं हुए हैं और भारत के सभी किसान
पंजाब के किसानों के आंदोलन को अभी तक समझ हीं नहीं पाए हैं। इसलिए पंजाब के
किसानों का आंदोलन अभी तक भारत के सम्पूर्ण हिस्सों में फैल नहीं सका है लेकिन इन
किसानों की मांग बिल्कुल हीं जायज है।

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