क्या टीम इंडिया अब सिर्फ 'एक्सपेरिमेंट की लेबोरेटरी' है? आयरलैंड के बाद इंग्लैंड से हार पर भड़के फैंस, उठे गंभीर सवाल।।
क्रिकेट डेस्क, नई दिल्ली/N5: भारतीय क्रिकेट टीम इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। फैंस का गुस्सा सातवें आसमान पर है और हो भी क्यों न? जो टीम कुछ समय पहले तक विश्व क्रिकेट पर राज कर रही थी, वह आज लगातार शर्मनाक हार का सामना कर रही है।
पहले Irland जैसी 11वें नंबर की टीम से क्लीन स्वीप होना और अब इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज गंवाकर क्लीन स्वीप की कगार पर खड़े होना—इसने भारतीय क्रिकेट के भविष्य पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
सोशल मीडिया से लेकर खेल के गलियारों तक, हर तरफ एक ही सवाल गूंज रहा है, क्या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अब देश के लिए जीतने की जगह नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के लिए 'एक्सपेरिमेंट का मैदान' बनकर रह गया है?
आयरलैंड से हारे तो चुप रहे, लेकिन अब पानी सिर से ऊपर है!
जब टीम इंडिया आयरलैंड के खिलाफ क्लीन स्वीप होकर लौटी, तो क्रिकेट पंडितों और मैनेजमेंट ने दलील दी कि "यह सिर्फ एक खराब फेज है, कप्तान और कोच पर इतनी जल्दी सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए।" क्रिकेट प्रेमियों ने इस कड़वे घूंट को भी पी लिया।
लेकिन अब कहानी बदल चुकी है। इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में भारतीय टीम का जो हश्र हुआ है, उसने मैनेजमेंट की पोल खोलकर रख दी है। आज टीम इंडिया क्लीन स्वीप की कगार पर खड़ी है। क्रिकेट फैंस का साफ कहना है कि अगर आज भी भारत हारता है, तो सिर्फ कप्तान या कोच ही नहीं, बल्कि पूरी सिलेक्शन कमेटी और बीसीसीआई (BCCI) को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए और कड़े फैसले लेने चाहिए।
इंटरनेशनल क्रिकेट: सीखने की जगह या जीतने का मंच?
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए कोई टीम "हार कर सीखने" की बात कह सकती है? इंटरनेशनल क्रिकेट कोई गली-मोहल्ले का मैच या घरेलू टूर्नामेंट नहीं है, जहाँ आप हर मैच में नए-नए प्रयोग करते रहें।
"दुनिया की कोई भी बड़ी टीम (जैसे ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड) अंतरराष्ट्रीय मैचों को खिलाड़ियों के लिए एक्सपेरिमेंटल ग्राउंड नहीं बनाती। वहाँ परफॉर्मेंस ही एकमात्र पैमाना है—परफॉर्म करो या बाहर बैठो।"
सचिन, धोनी, विराट से लेकर अब श्रेयस अय्यर तक: कब रुकेगा यह सिलसिला?
भारतीय क्रिकेट का इतिहास देखें तो ऐसा लगता है कि टीम इंडिया हमेशा से कप्तानों और चुनिंदा खिलाड़ियों के प्रयोगों की वेदी पर चढ़ती रही है। चाहे सचिन तेंदुलकर रहे हो, एमएस धोनी रहें हो, विराट कोहली रहे हो या फिर रोहित शर्मा —ये सभी अजीबोगरीब 'एक्सपेरिमेंट' से निकले खिलाङ हैं, जिनके वजह से कभी भारत लगातार हारा और अक्सर आईसीसी (ICC) नॉकआउट्स में टीम की हार का कारण बनते हैं।
और अब, यही सिलसिला श्रेयस अय्यर के साथ दोहराया जा रहा है। खेल विशेषज्ञों और फैंस का मानना है कि भारतीय टीम इस समय श्रेयस अय्यर के लिए एक 'एक्सपेरिमेंट स्थल' बन चुकी है। खराब फॉर्म और तकनीक की कमियों के बावजूद उन्हें लगातार मौके दिए जा रहे हैं, जबकि बेंच पर बैठे कई प्रतिभावान खिलाड़ी अपनी बारी का इंतजार करते-करते थक चुके हैं।
बीसीसीआई दुनिया का सबसे अमीर और शक्तिशाली क्रिकेट बोर्ड है, लेकिन क्या पैसों की इस चमक में हम जीतना भूलते जा रहे हैं? फैंस अब सोशल मीडिया पर सीधे तौर पर कोच और सिलेक्शन कमेटी के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
निष्कर्ष: यदि भारतीय क्रिकेट को अपनी खोई हुई साख वापस पानी है, तो इस 'एक्सपेरिमेंट' के कल्चर को तुरंत बंद करना होगा। टीम में केवल उन्हीं को जगह मिलनी चाहिए जो देश को जिताने का माद्दा रखते हों, न कि उन्हें जो टीम इंडिया को अपनी पर्सनल लेबोरेटरी समझते हैं।
क्या आपको भी लगता है कि टीम इंडिया में जरूरत से ज्यादा एक्सपेरिमेंट हो रहे हैं? क्या कप्तान और कोच को बदला जाना चाहिए? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर बताएं।
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