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जब फौजी तेजबहादुर यादव ने बीजेपी के आक्रामक नेता नरेंद्र मोदी के साथ दो-दो हाथ किये ।

भारत का बनारस संसदीय चुनाव क्षेत्र विवादित सुर्ख़ियों में तब आया था, जब एक देश के  बीएसएफ  जबान तेजबहादुर यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ़ चुनाव लड़ने के लिए हिम्मत किया और अपना चुनावी  नामांकन का  पर्चा भरा। बाद में चुनाव आयोग ने  बीएसएफ  जबान का  संसदीय उम्मीदवार   के नामांकन पत्र को ख़ारिज कर दिया। जबकि वहीं चुनाव आयोग ने हरियाणा के करनाल संसदीय क्षेत्र से  तेजबहादुर यादव को  चुनाव लड़ने के लिए स्वीकृति दे दिया था। यह बताना बड़ा मुश्किल है कि हरियाणा के चुनाव आयोग ने ऐसा क्यों किया जबकि नियम तो सभी के लिए बराबर हीं थे।  लोकतांत्रिक देश के लिए खतरे की घंटी बताया जाने लगा:  बनारस संसदीय क्षेत्र में तेजबहादुर यादव के प्रवेश के बाद विवाद  ऐसा गहराया था कि एक समय यह सुनने को मिलने लगा था कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। अब से देश की जनता को सावधान होने की जरूरत है। जबकि  भारतीय मीडिया इस मामला को इस रूप में वर्णन करने के फ़िराक में नहीं थी। बल्कि, इस मामला को एक छोटी सी गलती बताकर द...

खामोसी के साथ काम करने में विश्वास रखनेवाले भारत के प्रधानमंत्री - डाक्टर मनमोहन सिंह ।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डाँक्टर मनमोहन सिंह के बारें में पहली पंक्ति यही कहा जा सकता है जो अपने कूल व्यवहार से प्रसिद्ध हुए। सिंह 2004 में भारत के प्रधानमंत्री बने और फ़िर लगातार दूसरा कार्यकाल पूरा करनेवाले भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरु के रिकार्ड की बराबरी की तथा दूसरे प्रधानमंत्री का कीर्तिमान स्थापित किया। इन्होंने अपने दो कार्यकाल में कई चमत्कारी काम किये जिसे जनता हमेशा याद करेगी। इन्होंने अपने इस कार्यकाल में कभी बकवास संबोधन नहीं किया और न हीं जनता का धोखा देनेवाला कभी भाषण दिए। एक कूल मैन की तरह प्रधानमंत्री के जिम्मेदारी को निभाने का काम किये।   पंजाब के इस लाल ने अपने जीवन में खूब पढ़ाई की और पढ़ाई के बदौलत भारत के बड़े-बड़े सरकारी पद को बड़ी ईमानदारी के साथ सम्भालने का उदाह्र्ण पेश किये हैं। कम और सही बोलने में विश्वास रखने वाले मनमोहन सिंह को अपने कार्यकाल के दरम्यान सिर्फ काम से उनका मतलब रहता। वह शायद हीं बगैर मतलब के जनता को संबोधन किये होंगें। खामोसी के साथ काम करनेवाले प्रधानमंत्री डाँक्टर मनमोहन सिंह पर एक फ़िल्म का निर्माण हो चुका है। इस फिल्म को...

जम्मू-कश्मीर पर नरेंद्र मोदी का हुंकार ।।

भारत का विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने लंगड़ा हो गई है, जुबान भी सही तरीके से नहीं खुल रहें हैं, यूं कहें विपक्ष चरों खाने चीत हो गई है। वर्ष 2014 से कांग्रेस (विपक्ष) को मोदी नामक जीन का तोड़ निकालने में जुटी है, लेकिन आज तक असफल रही। अब हालात ये दिखने लगा है कि स्वयं मोदी हीं अपनेआप को कमज़ोर कर लें तो विपक्ष की बात बन सकती है, वरना विपक्ष को लड़खड़ाने के अलावा कुछ नहीं मिलने वाला। इस बार जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर विपक्ष घिरते नजर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी पार्टी के लिए चुनावी रैलियां करना शुरू किये थे। शुरुआत में हीं विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए चुनावी हुंकार का शंखनाद किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “ मैं विपक्ष (कांग्रेस और रांकपा) को चुनौती देता हूँ कि अगर उनमें हिम्मत है तो महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव या देश में आनेवाले दूसरे चुनावों के लिए घोषणापत्र में एलान करें कि अनुच्छेद 370 और 35ए को वापस लाएंगें, पांच अगस्त के निर्णय को बदल देंगें, वर्ना ये घड़ियाली आंसू बहाना बंद करें”। देशवासियों को गुमराह करने से कुछ नहीं मिलन...

“उज्ज्वला योजना” से ग्रामीण महिलाओं के बढ़े हैं कदम।।

भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री का महत्वकांक्षी योजना “उज्ज्वला” देश के ग्रामीण महिलाओं के लिए वरदान साबित हुआ है। इसमें दो राय नहीं है तथा इसपर कोई सवाल खड़ा नहीं कर सकता। इसके जरिये हीं आज भारत के उन महिलाओं ने गैस चूल्हा से खाना बनाना शुरू किया जिनके लिए फ़िलहाल असम्भव था इससे वे कोसों दूर थीं।  हलांकि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता की आज के तारीख में ग्रामीण समुदाय के अधिकांश कनेक्शन का सिलेण्डर घर के कोने में धरा पड़ा है, लेकिन लोग साल में एकाध बार तो भरा हीं लेते हैं जैसे बरसात के समय व ठंड के समय इसमें बढ़ोत्तरी होती है बाकी गर्मी के मौसम में लोग सिलेण्डर नहीं भराते हैं क्योंकि इस समय गाय - भैंस के उपला बनाकर इससे खाना बना लेते हैं।  उज्ज्वला को मौसमी गैस कनेक्शन कहा जाय तो इसे गलत नहीं माना जाना चाहिए बल्कि गर्व महसूस करना चाहिए। सरकार के द्वारा इतने हीं मदद से ग्रामीण महिलाओं को बड़ी राहत मिला है इसलिए इनके घरों में ख़ुशी का मौसम है जिसका श्रेय सीधे – सीधे उज्ज्वला के जनक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है। इनके इस योगदान को भारत के ग्रामीण महिलाएँ...

सौ दिन के रोजगार से गैस चूल्हा तक का सफ़रनामा ।।

यह लेख गैर राजनीतिक है, किसी पार्टी या नेता को टारगेट करके नहीं लिखा जा रहा है, इसका मकसद सिर्फ देश हीत है। यदि किसी नेता या पार्टी का जिक्र होता है तो उसके संलिप्तता के कारण होगा और इसके जरिये किसी को किसी प्रकार का नुकसान पहुँचाना नहीं है। नरेंद्र मोदी उज्वला योजना को लेकर बहुत हीं एग्रेससिव मोड में दिखते हैं। वहीं इनके समर्थक शौचालय निर्माण स्कीम को लेकर बोलते नहीं थकते लोगों को ताने मारते फिरते हैं। शौचालय निर्माण पर मोदी के स्टार समर्थक अक्षय कुमार फिल्म भी बना चुके हैं। सरकार अपने पांच सालों के कार्यकाल में इन दोनों योजना को महत्वपूर्ण उपलब्धी मानती है और इसके आधार पर वोट मांगने का काम किया और टीवी पर प्रचार किया कि एक बार फ़िर मोदी सरकार। इस हिसाब से इसपर सवाल करना बनता है। आखिर इन दोनों योजना में ऐसा क्या है जिसे इतना प्रचार किया जा रहा है। मोटे तौर पर हिसाब है कि कांग्रेस के समय सिंगल सिलेंडर रिफिल वाला घरेलू गैस कनेक्शन 4500 रूपये में मिलता था, जिसको मोदी ज़ी ने गरीब लोगों को मुफ्त में देने का काम किया है। कांग्रेस के समय गैस चूल्हा और मोदी ज़ी के गैस चूल्हा के क्वा...

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब बीजेपी वालों से अलग हुए थे- बिहार ।।

बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दावा करते हैं कि वह अपने सिद्धांत के पक्के इन्सान हैं और   अक्सर इस बात को लेकर बहस करते – करते प्रतिद्वंदियों से भीड़ जाते हैं। लेकिन, राजनीतिक क्षेत्र में इसका कोई महत्व नहीं रहता फ़िर भी इनके दावे को मानना या अनुसरण करना औचित्य बन जाता है क्योंकि इनका ऐसा मानना है कि सिद्धांत के बगैर हमारी जिन्दगी नहीं चलती इसलिए इनको सिद्धांतवादी पुरुष भी कहा जाता है। राजनीतिक के मिज़ाज से कुमार अपने आप को नहीं बचा सके। यह कहानी राजनीतिक पैतरे की है जिसे बिहार के रजनीतिक इतिहास में सदा जिक्र किया जायेगा। एक समय था जब नीतीश कुमार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ केन्द्र सरकार चला रहे थे तथा बिहार में भी राजनीतिक सिक्का का खेल खेल रहे थे और उस समय बीजेपी का कर्ताधर्ता अटल बिहारी वाजपेयी ज़ी के हांथों में था। जिसके बाद बीजेपी का साम्राज्य नरेंद्र मोदी के हाथ में आया तो कुमार साहब को सिद्धांत को लेकर इनसे मनमुटाव हो गया और नाराज होकर बीजेपी से अलग हो गए। इतना हीं नहीं मोदी के साथ कभी न होने का वचन बिहार के जनता को दिया तथा बिहार के विधानसभा मे...