Skip to main content

जब फौजी तेजबहादुर यादव ने बीजेपी के आक्रामक नेता नरेंद्र मोदी के साथ दो-दो हाथ किये ।

भारत का बनारस संसदीय चुनाव क्षेत्र विवादित सुर्ख़ियों में तब आया था, जब एक देश के 
बीएसएफ जबान तेजबहादुर यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ़ चुनाव लड़ने के लिए हिम्मत किया और अपना चुनावी नामांकन का पर्चा भरा। बाद में चुनाव आयोग ने बीएसएफ जबान का संसदीय उम्मीदवार  के नामांकन पत्र को ख़ारिज कर दिया। जबकि वहीं चुनाव आयोग ने हरियाणा के करनाल संसदीय क्षेत्र से तेजबहादुर यादव को चुनाव लड़ने के लिए स्वीकृति दे दिया था। यह बताना बड़ा मुश्किल है कि हरियाणा के चुनाव आयोग ने ऐसा क्यों किया जबकि नियम तो सभी के लिए बराबर हीं थे। 

लोकतांत्रिक देश के लिए खतरे की घंटी बताया जाने लगा: बनारस संसदीय क्षेत्र में तेजबहादुर यादव के प्रवेश के बाद विवाद ऐसा गहराया था कि एक समय यह सुनने को मिलने लगा था कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। अब से देश की जनता को सावधान होने की जरूरत है। जबकि भारतीय मीडिया इस मामला को इस रूप में वर्णन करने के फ़िराक में नहीं थी। बल्कि, इस मामला को एक छोटी सी गलती बताकर दबाने के प्रयास में जान लगाने पर आमदा हो चुकी थी। भारत के लोगों को इसी समय पता चला कि चुनाव के समय भारतीय मीडिया को ख़रीदा जाता है, और इसी समय भारतीय मीडिया साल की पूरी आमदनी भी कर लेती है। लेकिन, मामला शांत नहीं हुआ क्योंकि सोशल मीडिया और भारत के स्वतंत्र पत्रकार जो अपनी रोजीरोटी का चिंता न करके देश के लोगों का भला कैसे हो के बारे में सोचते रहते हैं लोगों ने इस घटना पर पैनी नजर गड़ाये हुए थे। जिसके कारण देश-दुनिया को जानने का अवसर मिला कि भारत के चुनाव में पावरफुल नेता कुछ भी कर सकते हैं। भारत के लोकतंत्र की ये कहानी के बारे में दुनिया को सोचने का व इस पर चर्चा करने का समय आ गया है।

विश्व के लोकतान्त्रिक समुदाय को इस बात का मंथन करना चाहिए कि विश्व का बड़ा लोकतान्त्रिक जिम्मेदार देश भारत का ये हाल हो सकता है तो दूसरे अन्य देशों का क्या कहना ? भारत दूसरे देशों को लोकतान्त्रिक पाठ पढ़ाने वाला देश के नाम से जाना जाता था, लेकिन इस देश के नेता ने स्वयं हीं पद को हासिल करने के फ़िराक में एक सधारण उम्मीदवार का नामांकन नामंजूर करने की गलती कर दिया। बनारस संसदीय नामांकन विवाद बाहर आने के बाद भारत को विश्व समुदाय के सामने निष्पक्ष चुनाव की बात नहीं करनी चाहिए। 

बनारस से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ रहें थे: बनारस से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ रहें थे और वहीं से बीएसएफ जबान तेजबहादुर यादव ने समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन का पर्चा भरा था। लेकिन, चुनाव आयोग ने इनका नामांकन रद्द कर दिया। तेजबहादुर बनारस संसदीय क्षेत्र के जनता का पसंदीदा नेता बन चुके थे। और इस घटना के बाद उनका नाम देश में और भी लोकप्रिय होने लगा। फ़िर भी चुनाव आयोग ने इस फौजी नेता को चुनाव लड़ने योग्य नहीं है बताकर नामांकन रद्द कर दिया। इतना होने के बावजूद भी तेजबहादुर हिम्मत बनाये रखे और भारत के लोगों से बार-बार गुजारिश करते रहे कि देश गलत लोगों के हांथ में चला गया है इस बात को समझने की अन्तिम घड़ी है।

तेजबहादुर का वकील नितिन विश्राम के उस समय कहा था: तेजबहादुर का वकील नितिन विश्राम ने  उस समय कहा था कि नोमिनेशन में कोई डिफेक्ट नहीं है। तेजबहादुर को नौकरी से डिसमिस भ्रष्टाचार और देशद्रोह के आधार पर नहीं हुआ है, इसलिए तेजबहादुर का नोमिनेशन रद्द करने का सवाल हीं पैदा नहीं होता। वकील ने आगे कहा था कि चुनाव आयोग हमारी बात को अनसुना कर दिया था, सिर्फ़ समय पे समय दिया गया और अंत में नोमिनेशन रद्द कर दिया गया। वह विवाद के समय आगे कहे थे कि यह घटना के बाद बीजेपी के बड़े नेता बनारस के चुनाव अधिकारी से मिले थे। 

वकील नितिन विश्राम उस समय कहे थे कि पहले हमे उलझा कर रखा गया फ़िर नोमिनेशन रद्द कर दिया गया। तेजबहादुर यादव को बीएसएफ अधिकारी ने खाना ख़राब होने की शिकायत के आधार पर नौकरी से डिसमिस किया था, भ्रष्टाचार या देशद्रोह के आधार पर नहीं किया था। इसलिए इनपर चुनाव अधिनियम सेक्शन 9 और 33 के मामला का लागू होने का आधार बनता हीं नहीं। इससे साफ हो जाता है कि भारत के चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहा है, बल्कि नेता के दबाव में काम कर रहा है। यह तानाशाही का प्रकाष्ठा है।

कोई रोटी मांगे तो क्या उसकी रोटी छीन लेंगें: उस समय महेंद्रगढ़ के बीएसएफ जबान तेजबहादुर यादव आर्मी में खाना की शिकायत करते हुए वीडियो शेयर किये थे। और उन्होंने वीडियो में आर्मी के सीनियर अधिकारियों पर भोजन की राशि के नाम पर घपला करने का आरोप लगाया था। जिसके एवज में बीएसएफ संस्था ने अपने अधिकारी पर कार्रवाई करने के बजाय तेजबहादुर को हीं नौकरी से डिसमिस करना बेहतर समझा। अब ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि वर्तमान समय में भारत में कोई हक की मांग कैसे कर सकता है? 

बीएसएफ संस्था द्वारा तेजबहादुर को नौकरी से डिसमिस किये जाने के बाद जबान ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दिया था। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पीबी बजंथरी ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहे थे कि यह ब्लंडर है। कोई रोटी मांगे तो क्या उसकी रोटी छीन लेंगें। हाईकोर्ट ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय और बीएसएफ के डायरेक्टर जनरल को नोटिस जारी कर 28 मई तक जवाब मंगा था, जबकि सरकार जवाब देने के बजाय तेजबहादुर की आवाज को कुचलने में लगा दिया। ऐसे में इस सरकार से आम आदमी न्याय की उम्मीद कैसे कर सकता है?

Popular posts from this blog

एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इस एक बात का ख्याल अवश्य रखना चाहिए।

एक सेल्स मैन को ये काम अवश्य करनी चाहिए, यदि आप एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इस एक बात  का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। एक सेल्स मैन को ये काम अवश्य करनी चाहिए। यदि आप एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इन बातों का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। हम कोई भी काम करते हैं उसकी योजना अवश्य तैयार करते हैं। एक छोटा सा छोटा काम के लिए भी हम योजना बनाते हैं। हलांकि छोटे कामों के लिए बनाये गए योजना हमारा दिमाग को पता नहीं चलता। हमारे दिमाग को इसके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसपर कभी आपने सोचा है कि आख़िर ऐसा क्यों होता है ? इसकी वजह को हमे जानने का प्रयास अवश्य करनी चाहिए। ऐसे तो इसके अनेकों वजह हो सकते हैं और इसके मनोवैज्ञानिक कारण भी कई हो सकते हैं, लेकिन हमे इन भारी वजहों को छोड़कर एक सरल वजह की तलाश करने की जरूरत है। मेरे अनुसार सरल स्वभाव से इसका एक वजह यह भी हो सकता है कि हमारा दिमाग इन छोटे-छोटे कामों को पहले कई बार कर चुका होता है। यूं कहें इस काम को मेरा दिमाग पूर्ण रूप से अभ्यस्त हो गया होता है। इसलिए हमारा दिमाग को इस छोटा काम को पूरा करने में किसी प्रकार की परेश...

एक कप चाय, मिट्टी वाली में - चाय को पीने में जो मजा है, वो मजा सात समन्दर पार जाकर भी नहीं वो कैसे !

एक कप चाय से याद आया कि मिट्टी के बर्तन वाली चाय को पीने में जो मजा है, वो मजा सात समन्दर पार जाकर एक प्रेमी को अपने प्रेमिका या एक प्रेमिका को अपने प्रेमी से मिलने में भी नहीं होगा! लेकिन वो मजा इस चाय पीने में आपको मिलेगा।  आप महिला हों या पुरुष यदि आप अपने जीवन में, प्रेम में प्रवाहित होने के आनंद से वंचित रह गाएं हैं तो हमारी मानिये एक बार इस चाय के प्रेम में बह जाइये, डूब जाइये और इसके गर्माहट में गोते लगा लीजिये! इसके मंद-मंद सुगंध में अपने नाक के दोनों सुराग को झोंक दीजिये। लेकिन एक बात का ख्याल रखियेगा,   इस चाय को पीने में कभी जल्दीबाजी नहीं कीजियेगा। नहीं तो, आपका जीभ आपसे नाराज हो जायेगा। बेमतलब के आप बेचारा स्वभाव से कोमल जीभ को रुखा कर दीजियेगा। यदि आपको विश्वास नहीं होता, तो एक बार मिट्टी वाला चुक्का में परोसी गई चाय को अपने होंठ से लगाकर और चाय को जीभ पर गिराकर तो देखिये! जैसे हीं, यह चाय आपके जीभ को स्पर्श करेगी वैसे हीं आप स्वयं इसके स्वाद से परिचित हो जाएंगें। हमारी मानिये तो आज हीं आप नुक्कड़ वाली एक कप चाय का मज़ा ले लीजिये। भारत आधुनीकता की ओर कदम बढ़ा च...

राहुल गांधी ने 'एल्फिंस्टन' (Elphinstone) फाइल का जिक्र करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को घेरा। सदन में भारी हंगामा।।

राहुल गांधी ने 'एल्फिंस्टन' (Elphinstone) फाइल का जिक्र करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को घेरा। सदन में भारी हंगामा।। राहुल गांधी ने संसद में जिस 'एल्फिंस्टन' (Elphinstone) फाइल या संदर्भ का जिक्र किया, वह सीधा हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की कार्यशैली पर था। गांधी ने सदन में एक पुरानी फाइल या रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह तर्क देने की कोशिश की कि सरकार कुछ खास उद्योगपतियों (अडानी-अंबानी) को फायदा पहुँचाने के लिए नियमों में बदलाव करती है। उन्होंने 'एल्फिंस्टन' नाम का जिक्र उन ऐतिहासिक नियमों या व्यवस्थाओं के संदर्भ में किया जो मुंबई के बंदरगाहों या रेलवे के बुनियादी ढांचे से जुड़ी थीं। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को घेरते हुए निम्नलिखित बातें कहीं: ​नियमों में बदलाव: उनका आरोप था कि सरकार ने पुराने नियमों (जिनका उन्होंने एल्फिंस्टन संदर्भ से जोड़ा) को दरकिनार कर दिया ताकि एयरपोर्ट्स और पोर्ट्स का नियंत्रण कुछ विशेष व्यापारिक समूहों को दिया जा सके। ​अडाणी समूह का जिक्र: उन्होंने दावा किया कि पहले नियम था कि जिसे एयरपोर्ट संचालन का अनुभव नहीं है, उसे टेंडर नहीं म...