कैग ने 1.76 लाख करोड़ रूपये के घोटाला होने का
खुलासा किया। यह 2ज़ी के लाइसेंस बाँटने में इतनी बड़ी धांधली हुई। कैग के द्वारा
इसकी खुलासा किये जाने पर भारत के जनता को हिला कर रख दिया। विपक्ष (भारत के लोग) ने यूपीए सरकार को घोटाले की
सरकार के नाम से संबोधित करने शुरू कर दिए। इसका सर्वप्रथम असर कांग्रेस के दिल्ली
के विधानसभा चुनाव में देखा गया। शिला दीक्षित की लोकप्रिय सरकार चुनाव हार गई। उस
समय से कांग्रेस को चुनाव हारने के अलवा कुछ नहीं प्राप्त हुआ है।
इसी समय भारत में एक और परिवर्तन का लहर दौड़ा। भ्रष्टाचार
सरकार को हटानी है की बात हरेक के जुवान पर आने लगी। इस संघर्ष को आगे बढ़ाने में
अन्ना हजारे का नाम व उनके द्वारा दिल्ली में किया गया आंदोलन को भला कोई कैसे
भूला सकता है! इन्होंने भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक आंदोलन छेड़ने का काम
किया। भूख हड़ताल पर बैठने शुरू कर दिये। मौजूदा सरकार इनके जाल में पूरी तरह से
फंस गई। इनके अनुयायियों ने भारत में एक नई आवाज बनकर उभरने लगे। भारत के राजनीतिक
स्वरूप बदलने लगा। अब जनता पार्टी व नेता को भ्रष्टाचार के तराजू से तौलने शुरू
क्र दिए। मतलब साफ हो गया की अगला चुनाव वहीँ पार्टी जीतेगी जो भारत को भ्रष्टाचार
से मुक्ति दिलाने की वादा करेगी। भारतीय राजनीतिक में यहीं हुआ।
पुरे भारत में अन्ना हजारे के नाम का हीं डंका
बजने लगा। इनके आंदोलन की ताकत भ्रष्टाचार को खत्म करनेवाली सोच थी। जिसके समर्थन
में सारे भारत के लोग खुल कर सामने आये। अन्ना हजारे के बैनर के तले आम आदमी
पार्टी और इसके नेते अरविन्द केजरीवाल का जन्म हुआ। इनके लहर के असर से केजरीवाल
भारत की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस को अपने पहले हीं चुनाव में सत्ता से बाहर का
रास्ता दिखाने का जादू कर दिखाया। बीजेपी ने भी इस लहर का लाभ उठाया और इस भ्रष्टाचार तूफ़ान के बदौलत केन्द्र में
बीजेपी की सरकार बन गई।
अब 2जी स्कैम का निर्णय भारत के जनता के सामने आ
चुका है। जज ओपी सैनी ने कहा कि “हमे ये कहने में कोई झिझक महसूस नहीं हो रही है
कि आरोपियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं इसलिए इनके अभियुक्तों को बरी किया जाता है”। वह आगे कहते
हैं कि इसपर एक डिबेट होनी चाहिए। बोफ़ोर्स केस, आरुषि केस में हुआ। इसमें देश का
समय जायजा हुआ, संसाधन बरबाद हुए और केस ट्रायल चलने पर कुछ हुआ हीं नहीं। खोदा
पहाड़ और निकली चुहिया।
