भारत का विपक्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने लंगड़ा हो गई है, जुबान भी सही तरीके से नहीं
खुल रहें हैं, यूं कहें विपक्ष चरों खाने चीत हो गई है। वर्ष 2014 से कांग्रेस
(विपक्ष) को मोदी नामक जीन का तोड़ निकालने में जुटी है, लेकिन आज तक असफल रही। अब
हालात ये दिखने लगा है कि स्वयं मोदी हीं अपनेआप को कमज़ोर कर लें तो विपक्ष की बात
बन सकती है, वरना विपक्ष को लड़खड़ाने के अलावा कुछ नहीं मिलने वाला। इस बार
जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर विपक्ष घिरते नजर आ रही है।
प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी पार्टी के लिए चुनावी
रैलियां करना शुरू किये थे। शुरुआत में हीं विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए चुनावी
हुंकार का शंखनाद किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “ मैं विपक्ष (कांग्रेस और
रांकपा) को चुनौती देता हूँ कि अगर उनमें हिम्मत है तो महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव
या देश में आनेवाले दूसरे चुनावों के लिए घोषणापत्र में एलान करें कि अनुच्छेद 370
और 35ए को वापस लाएंगें, पांच अगस्त के निर्णय को बदल देंगें, वर्ना ये घड़ियाली
आंसू बहाना बंद करें”। देशवासियों को गुमराह करने से कुछ नहीं मिलनेवाला, इससे देश
भटकाव की ओर जायेगा जिसे देशहीत नहीं कहा जा सकता। मालूम हो की कांग्रेस शुरुआत से
हीं जम्मू कश्मीर से हटाये गए अनुच्छेद 370, 35ए तथा इस लागू करने के शैली से जम्मू में उत्पन्न
हालात को आलोचना करते आ रही है।
महाराष्ट्र के
जलगांव से चुनावी रैली को संबोधन करते हुए मोदी ने कहा था कि जम्मू- कश्मीर के लिए
यह फैसला लेना सरल नहीं था, जिसके बारे में पहले यह सोचा भी नहीं जा सकता था कि
ऐसा हो सकता है जिसको हमने कर दिखाया है। अनुच्छेद 370 तथा धारा 35ए की वजह से
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद का बोलबाला था। यहाँ ऐसी स्थिति हो चली थी
कि जम्मू के गरीब, दलित तथा शोषित आवामों के लिए विकास के रास्ता बंद हो चुके थे।
सरकार के इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर के विकास लिए नए अवसर खोले गए हैं। यह देश
का दुर्भाग्य है कि कांग्रेस और राकांपा अनुच्छेद 370, 35ए को खत्म करने के
अभूतपूर्व फैसले को राजनीतिकरण करने पर आमदा है। जम्मू-कश्मीर भारत के लिए ‘सिर्फ
जमीन का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि भारत का मस्तक है’ । हलांकि, नरेंद्र मोदी का यह
भाषण महाराष्ट्र के जनता को रास नहीं आया इसलिए स्पष्ट बहुमत न देकर मिलीजुली सरकार बनाने के अवसर दिया जिसमें मोदी ज़ी असफल
रह गए।
