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दिल्ली हिंसा (delhi voilence) से गर्म हुई भारतीय राजनीतिक ।।


भारत की राजधानी दिल्ली धू-धू कर जलती रही लोग तड़प – तड़प कर मरते रहे पर कोई रोकने में सफ़ल नहीं रहा किसी का बुद्धि काम नहीं आया। अब हालात दिनों – दिन बेहतर हो रहें हैं और लोग सामान्य जीवन की ओर जाना शुरू कर दिया है। इस भयावह घटना की जाँच के लिए टीम का गठन भी  किया जा चुका है। वहीं विपक्ष भी अपना मोर्चा खोल दिया है। इतना हीं नहीं देश – विदेश से इस घटना को लेकर भारत सरकार को आलोचना सुनना पड़ा है लेकिन कोई कर भी क्या सकता है ऐसी घटना में  सब लाचार और बेवस हो जाते हैं।
विपक्ष पार्टी कांग्रेस घेराबंदी करने के लिए भाग दौड़ करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी अपनी अगुआई में एक शिष्टमंडल का निर्माण करके भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात भी कर चुकीं है। इनके शिष्टमंडल में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी, वरिष्ठ नेता अहमद पटेल और कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला तथा अन्य प्रमुख कांग्रेसी नेता शामिल हैं। इन सभी नेतागण राष्ट्रपति से मुलाकात किये और दिल्ली के इस घटना पर उचित फैसला लेने का आग्रह किया है। कांग्रेस के इस शिष्टमंडल का मानना है कि केन्द्र सरकार और दिल्ली की सरकार दोनों इस हिंसा पर कुछ करने के बजाय सिर्फ मूकदर्शक बनकर घटना को देखती रही जो नहीं होना चाहिए था। भारत के गृह मंत्री अमित शाह को उनके पद से हटाये जाने की सिफारिश राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से किया गया है।
भारत के अलावा दूसरे देश के नेतागण भी दिल्ली के इस घटना से अपने आप को प्रभावित होने से बचा नहीं सके इसलिए प्रतिक्रिया कर दिए। एक अमेरिका का अंतर्राष्ट्रीय संगठन अमेरिकी आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने दिल्ली हिंसा पर अपनी जागरूकता दिखाते हुए कहा है कि भारत सरकार लोगों की रक्षा करे, चाहे वो किसी भी धर्म के क्यों न हो। संघठन का मानना है कि दिल्ली में मुसलमानों पर कथित हमले बेहद चिंताजनक है सरकार अपने नागरिकों को रक्षा करे और उन्हें शारीरिक सुरक्षा प्रदान करे चाहे वो किसी भी धर्म से ताल्लुक रखते हों उनकी रक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। एक दूसरे इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआइसी) का मानना है कि दिल्ली हिंसा से निपटने में भारत सरकार मुसलमानों के खिलाफ़ भेदभाव किया है।
मालूम हो कि दिल्ली में हुए हिंसा के जाँच के लिए अब दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को यह जिम्मेदारी सौंप दिया गया है। जिसका जाँच पहले दिल्ली की स्थानीय पुलिस कर रही थी। इसकी जाँच अब अपराध शाखा एसआईटी टीम करेगी। अपराध शाखा के अतिरिक्त एक आयुक्त और दो उपायुक्त शामिल होंगें तथा इनके सहयोग के लिए चार सहायक पुलिस आयुक्त को भी जिम्मेदारी सौंप दिया गया है। अभी तक इस घटना में 48 मामला दर्ज किये जा चुके हैं और जल्द से जल्द दिल्ली में पहले जैसे सामान्य हालात कर दिए जाने के उम्मीद जतायी जा रही है।
दिल्ली के इस घटना पर विदेशी संगठनों के द्वारा टिप्पणी किये जाने पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय का प्रवक्ता रवीश कुमार कहते हैं कि यूएससीआईआरएफ, मीडिया के कुछ तबकों और कुछ अन्य लोगों के द्वारा दिल्ली में हिंसा की हालिया घटनाओं को लेकर की गई टिप्पणियों को देखी है इसका मुख्य उद्देश्य मुद्दा को शांत करना या निष्पक्ष करना नहीं बल्कि राजनीतिकरण करना है।     

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