भारत के पूर्व
प्रधानमंत्री डाँक्टर मनमोहन सिंह के बारें में पहली पंक्ति यही कहा जा सकता है जो अपने कूल व्यवहार से प्रसिद्ध
हुए। सिंह 2004 में भारत के प्रधानमंत्री बने और फ़िर लगातार दूसरा कार्यकाल पूरा
करनेवाले भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरु के रिकार्ड की बराबरी
की तथा दूसरे प्रधानमंत्री का कीर्तिमान स्थापित किया। इन्होंने अपने दो कार्यकाल
में कई चमत्कारी काम किये जिसे जनता हमेशा याद करेगी। इन्होंने अपने इस कार्यकाल
में कभी बकवास संबोधन नहीं किया और न हीं जनता का धोखा देनेवाला कभी भाषण दिए। एक कूल मैन की तरह प्रधानमंत्री के जिम्मेदारी को
निभाने का काम किये।
पंजाब के इस लाल ने अपने
जीवन में खूब पढ़ाई की और पढ़ाई के बदौलत भारत के बड़े-बड़े सरकारी पद को बड़ी ईमानदारी
के साथ सम्भालने का उदाह्र्ण पेश किये हैं। कम और सही बोलने में विश्वास रखने वाले मनमोहन सिंह को अपने कार्यकाल के दरम्यान सिर्फ काम से उनका मतलब रहता। वह शायद हीं बगैर मतलब के जनता को संबोधन किये
होंगें। खामोसी के साथ काम करनेवाले प्रधानमंत्री डाँक्टर मनमोहन सिंह पर एक फ़िल्म
का निर्माण हो चुका है। इस फिल्म को देखने का तो मौका नहीं मिला और हम देखना भी नहीं चाहते
क्योंकि फ़िल्म का नाम हीं इनके व्यक्तित्व से मेल नहीं खाता। मनमोहन सिंह
लोकप्रियता के मामले में भारतीय जनता में ख़ास पहचान बनाने में सफल नहीं रहे, लेकिन
जनता के लिए काम करने के मामले में इनके योगदानों को भूलाया नहीं जा सकता है और इनके जैसा प्रधानमंत्री की कल्पना भारत के लोग हमेशा करते रहेंगें।
मनमोहन सिंह विश्व
के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय कैम्ब्रिज और ऑक्सफ़ोर्ड से उच्च शिक्षा हासिल करने
के बाद भारत के आर्थिक तरक्की में अपना जीवन को समर्पित कर दिया। सिंह को 1956 में
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने एडम स्मिथ अवार्ड से सम्मानित किया। 1993-1994 का
एशिया मनी अवार्ड फार फाइनेंस मिनिस्टर आँफ द ईयर, 1994 में यूरोमनी अवार्ड फाँऱ द
फाइनेंस मिनिस्टर आँफ द ईयर, 1995 में इंडियन साइंस कांग्रेस का जवाहरलाल नेहरु
पुरस्कार और 2002 में सर्वश्रेष्ठ सांसद आदि अवार्ड प्राप्त करने वाले
प्रधानमंत्री हैं। भारत सरकार ने सिंह को पदम् विभूषण से भी सम्मानित किया है।
जिस समय अमेरिका,
यूरोप और जापान जैसे देश आर्थिक मंदी से जूझ रहा था, उस समय पंजाब के इस लाल (मनमोहन सिंह) के
बदौलत भारत विश्व आर्थिक मंदी से अछूता रहा और आर्थिक छलांग लगाता रहा। मनमोहन
सिंह भारत के ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने रुरल हेल्थ मिशन, यूनिक
आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी, रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम, राईट टू इनफार्मेशन एक्ट
और राईट टू एजुकेशन भारतीय जनता को देने का बड़ा फ़ैसला लेनेवाले प्रधानमंत्री का
कीर्तिमान स्थापित किया है। कई सालों से सिविल न्यूकिलियर शीत युद्ध से जूझ रहा
भारत को जीत दिलाने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हीं हैं जो वर्ष 2008 में करके
दिखाया। इनके इन साहसी फैसलों से दुनिया के सामने भारत के मान-सम्मान का कद ऊँचा हुआ है।
