पुलवामा में फिदायनी
हमला के बाद से देश के घर-घर में इसी बात को लेकर चर्चा हो रही है कि आख़िर यह कैसे
हुआ? ऐसा कब तक चलता रहेगा? क्या इसका समाधान सरकार के पास मौजूद नहीं है? की
सरकार कुछ करना नहीं चाहती? गली-मुहल्ले और चौक-चौराहे पर लोग इसके पक्ष-विपक्ष को
खोदना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया भी इससे अछूता नहीं। यहाँ लोग कमेन्ट, पोस्ट
तथा दूसरों के द्वारा पोस्ट किये गए मैटर को साझा करके अपनी बात लोगों के सामने रख
रहे हैं। देश की हालात से सरकार और देश सुधारकों को अवगत करा रहे हैं। इनमें कुछ
लोग राजनीतिक महकमा के विचार से प्रेरित हो सकते हैं इसमें कोई दो राय नहीं और सोशल
मीडिया का इस्तमाल कर रहे हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इन सबसे उपर उठकर देश के
बारे में चिन्ता कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर अपनी बात रख रहे हैं।
कालीन खान अपने
फेसबुक एकाउंट पर एक पोस्ट साझा किया है उसमें लिखा है कि पाकिस्तानी झंडा जलाकर
मुझे भी देशभक्ति साबित करनी है मगर झंडा नहीं मिल रहा है कोई बताएगा पाकिस्तान का
झंडा भारत में कहाँ मिलता है । वह एक दूसरे पोस्ट में लिखते हैं कि कश्मीर छोड़कर
यूनिवर्सिटीज में देशद्रोह तलाश रहे थे। आतंकवादी छोड़कर छात्रों, किसानों और
आदिवासियों से लड़ रहे थे ये उसी का परिणाम है।
रवि राय नाम के
फेसबुक एकाउंट लेखक तारेक फतेह के पुराने स्टेटमेंट का साझा किया है। यह वहीं
टिप्पणी है, जिससे तारेक फतेह को कट्टर मुस्लिम समुदाय से बहुत कड़वे वचन सुनने पड़े
थे। वह तारेक फतेह के फोटो के साथ लिखते हैं कि जो आतंकी मारा जाये उसे दफनाने न
दें बल्कि कुत्तों को खिलाए फ़िर देखिये आतंक का धर्म नहीं होता कहने वाले आ
जाएंगें धर्म बताने वाले- तारेक फतेह। टाइम्स नाऊ इंग्लिश न्यूज़ चैनल के हवाले
बताते हैं।उनके पोस्ट में लिखा है कि प्रशांत भूषण कहता है “आदिल डॉर’’ ऐसे हीं फिदायनी
आतंकी नहीं बना उसके उपर भारतीय सुरक्षावल ने बहुत अत्याचार किया है कश्मीर
मुस्लिम होने के नाते उसके पास और कोई रास्ता नहीं था मजबूर में आतंक का रास्ता
चुना.......
गुरमीत सिंह भासिन
ने एक पोस्ट साझा की है उसमें लिखा है पाकिस्तानियों के लिए दो लाइन गीले चावल में
शक्कर क्या गिरी तुम भिखारी खीर समझ बैठे, चंद गद्दारों ने पाकिस्तान जिन्दाबाद
क्या बोला, तुम कश्मीर को अपने बाप की जागीर समझ बैठे।
न्यू एचएलसी रेहान
नामक फेसबुक एकाउंटधारी ने एक पोस्ट साझा किया है वह पुस्तके माध्यम से भारतीय
मीडिया को कुछ कहना चाहते हैं अपने पोस्ट में लिखते हैं कि अफ़सोस!! न्यूज़ चैनल ने
5 शहीदों में सिर्फ शहीद मदन लाल का जिक्र किया! काम बख्तों कम से कम शहीदी पर तो
भेद भाव मत करो। वह दूसरे पोस्ट में पाकिस्तान मुर्दाबाद का नारा लगाते हुए
मुस्लिम बच्चों, महिलाओं और पुरुषों का फोटो का साझा किया है।
सरफराज़ अहमद ने एक
वीडियो साझा किया है जिसे किरण यादव फैन समूह ने पोस्ट किया था इस पोस्ट पर लिखा
हुआ है कि शहादत पर सियासत बंद करो बीजेपी। अभी चिता की राख ठंडी भी ना हुई थी और
सियासत शुरू। नीचे और लिखा है कि जहाँ शहीदों के शहादत पे सारा देश गम में डूबा
हुआ था, देश उन्हें नम आँखों से विदाई दे रहा था, अभी तो चिता की आग भी न ठंडी हुई
थी, जनता के दिलों में आक्रोश था, वहीं एक पार्टी अपने वोटों की तलाश में निकल
गयी। अपने प्रचार में व्यस्त हो गयी, क्या इतनी गिर गयी है राजनीति, आपको जरुर
सोचना होगा, आप सोचें और खुद निर्णय लें।
रवी राय ने एक पोस्ट
साझा किया है जिसे हम लिख नहीं सकते क्योंकि इस पोस्ट में शब्द और भाषा पर
नियंत्रण नहीं है इसमें मेरे अनुसार वैसा शब्द और भाषा का प्रयोग किया गया है जो
नहीं करना चाहिए।
