चाह नहीं मैं सुरबाला के, गहनों में गुथा जाऊं। चाह
नहीं प्रेमी माला में, बिंध प्यारी को ललचाऊं।चाह
नहीं सम्राटों के शव पर, हे हरि डाला जाऊं।चाह नहीं देवों के
सिर पर, चढूं भाग्य पर इठलाऊं।मुझे तोड़ लेना
बनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक,मातृभूमि पर शीश चढ़ाने,
जिस पथ पर जाएं वीर अनेक।
अंगेजी हुकूमत के शासन व्यवस्था से तंग आकर एक स्वतंत्रता
सेनानी के अंतरात्मा की आवाज ने इस कविता की रचना की थी। पं माखनलाल चतुर्वेदी ने
“पुष्प की अभिलाषा” शीर्षक नाम से 18 फरवरी 1922 को बिलासपुर के सेन्ट्रल जेल के
बैरक संख्या 9 में अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ़ जेल में बंद रहकर रचना की। आज
भारत आजाद है, लेकिन जिस तरह से जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा में फिदायनी हमला में
40-44 सैनिकों को मौत हुई, वह दिल दहला देनेवाली घटना है। इसे कभी भूलाया नहीं जा
सकता और भूलाने योग्य भी नहीं है। भारत माता के वीर सपूतों को इस दर्द के साथ जीना
है और देश में लगातार हो रहे ऐसी घटना से देशवासियों को आजाद करानी है।
इससे पहले भारत कई हमला हो चुका जिनमें वर्ष 1999 में भारत और
पाकिस्तान के मध्य हुए कारगिल युद्ध मुख्य स्थान रखता है इस समय भारत के
प्रधानमंत्री श्री अटल विहारी वाजपयी ज़ी थे जो भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता
थे। जिसके बाद 14 मई, 2002 को जम्मू एवं कश्मीर के कालूचक में सेना की छाबनी पर
आतंकवादी हमला हुआ। जिसमें 36 लोग मारे गए और 48 लोग घायल हुए थे। जिसके बाद 2003,
2005, 2006, 2013, 2014, 2015 और फ़िर 2019 में जम्मू-कश्मीर को आतंकी फिदायनी हमला
को झेलना पड़ा है। इस फिदायनी हमला से जम्मू-कश्मीर हीं नहीं बल्कि पूरा भारत सदमें
में है। अमेरिका, रूस, आस्ट्रेलिया, फ़्रांस, सऊदी अरब, श्रीलंका और बांग्लादेश
जैसे विश्व समुदाय के देशों ने कठोरता के साथ इस घटना का निंदा किया। भारत सरकार
ने सर्वदलीय बैठक बुलाया, जिसमें सेना को कुछ भी करने की पूरी छूट देने की घोषणा की
गई थी। दुःख की इस घड़ी में देश के सारे नेता और पार्टी ने एकजुटता का परिचय दिया था
जिससे सेना के मनोबल में इजाफ़ा जरुर हुआ होगा।
भारत के विश्वस्तरीय ख़ुफ़िया एजेंसी के रहते हुए इनके कान के
नीचे आतंकवादी इतनी बड़ी साजिश का अन्जाम कैसे दे जाते हैं? चिंतन करना चाहिए। आख़िर
ये एजेंसी देश को कब काम आएंगें? किस काम के लिए इन्हें रखा गया है? देश के
सुरक्षा का एक खम्भा इन एजेंसी पर हीं खड़ा है, लेकिन हमेशा से ये असफल हीं साबित
हो रहे हैं। राष्ट्रीय समाचार पत्र जनसता में छपी खबर के अनुसार ख़ुफ़िया एजेंसी ने
हमला के सात दिन पहले अलर्ट जारी किया था। संसद भवन पर हमला के दोषी अफ़जल गुरु और
मोहम्मद मकबूल भट्ट की फांसी की बरसी से ठीक पहले 8 फ़रवरी को जारी अलर्ट में साफ़
कहा गया था कि आतंकियों ने हमले की योजना बनाई है। इस बात से भारत का रक्षा
मंत्रालय भी अवगत था। जिसके बावजूद भी भारत सरकार के नाक के नीचे पुलवामा हमला
हुआ। ये भी देश का दुर्भाग्य हीं कहा जा सकता है कि इतना बड़ा हमला होने के बावजूद
भी इसको उच्चस्तरीय जाँच तक भी नहीं कराया जा सका।
