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सौ दिन के रोजगार से गैस चूल्हा तक का सफ़रनामा ।।


यह लेख गैर राजनीतिक है, किसी पार्टी या नेता को टारगेट करके नहीं लिखा जा रहा है, इसका मकसद सिर्फ देश हीत है। यदि किसी नेता या पार्टी का जिक्र होता है तो उसके संलिप्तता के कारण होगा और इसके जरिये किसी को किसी प्रकार का नुकसान पहुँचाना नहीं है।
नरेंद्र मोदी उज्वला योजना को लेकर बहुत हीं एग्रेससिव मोड में दिखते हैं। वहीं इनके समर्थक शौचालय निर्माण स्कीम को लेकर बोलते नहीं थकते लोगों को ताने मारते फिरते हैं। शौचालय निर्माण पर मोदी के स्टार समर्थक अक्षय कुमार फिल्म भी बना चुके हैं। सरकार अपने पांच सालों के कार्यकाल में इन दोनों योजना को महत्वपूर्ण उपलब्धी मानती है और इसके आधार पर वोट मांगने का काम किया और टीवी पर प्रचार किया कि एक बार फ़िर मोदी सरकार। इस हिसाब से इसपर सवाल करना बनता है।
आखिर इन दोनों योजना में ऐसा क्या है जिसे इतना प्रचार किया जा रहा है। मोटे तौर पर हिसाब है कि कांग्रेस के समय सिंगल सिलेंडर रिफिल वाला घरेलू गैस कनेक्शन 4500 रूपये में मिलता था, जिसको मोदी ज़ी ने गरीब लोगों को मुफ्त में देने का काम किया है। कांग्रेस के समय गैस चूल्हा और मोदी ज़ी के गैस चूल्हा के क्वालिटी में भी अन्तर है। मनमोहन सिंह के चूल्हा ज्यादा बेहतर था यह देखने का चिज है। फ़िर भी फ्री का माल है क्वालिटी मायने नहीं रखता, मुंशी प्रेमचन्द के समय एक कहावत थी कि मुफ्त के बैल का दांत देखा नहीं जाता।
मोदी ज़ी की दूसरी योजना शौचालय निर्माण है, जिसको लेकर इनके समर्थक जनता को खूब ताना मारते फिरते हैं और अक्षय कुमार ने तो फिल्म हीं बना दिया है। इसमें शौचालय निर्माण के लिए जनता को 12,000 रूपये दिया जाता है, यह पैसा लोगों के सीधे बैंक खाता में जाता है, जिसके बावजूद इसके अधिकारी दो हजार रूपये ले लेते हैं, वो भी पहले पैसा लेकर शौचालय निर्माण को पास करते हैं। यह भ्रष्टाचार खुलेआम चल रहा है। खैर, यहाँ भ्रष्टाचार की बात करना सही नहीं है, क्योंकि सबूत देना पड़ेगा जो नहीं है इसलिए इसे ख़ारिज करते हैं।
आप याद कीजिये मनमोहन सिंह की सरकार ने नेशनल रोजगार गारन्टी स्कीम (नरेगा/मनरेगा) भारत के गरीब लोगों को दिया था, जिसमें 220 रूपये के हिसाब से एक साल में 100 दिनों का रोजगार देने का सरकार ने कानूनी वादा किया था। इसके हिसाब से एक साल में जनता को 22000 रूपये दिया गया जो पांच सालों में एक लाख दस हजार बनता है। अब आप सोचिये पांच सालों में नरेंद्र मोदी ने एक घर के मालिक को 16500 रूपये जनता को दिया और वहीं मनमोहन सिंह की सरकार ने जनता को 110000 रूपये देने का काम किया।
मनरेगा में अधिकारियों ने जनता से लूटा इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। इसी भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए भारत के लोग परेशान थे और इसी को जड़ से खत्म करने के लिए जनता से नरेंद्र मोदी ने वोट मंगा और यहीं वजह रहा की इनको स्पष्ट बहुमत से जनता चुना, लेकिन नरेंद्र मोदी ज़ी गैस चूल्हा और शौचालय वितरण करके जनता को उलझा कर रख दिया।   

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