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भारत सरकार से सम्मानित अधिकारी आतंकवादी के साथ - गजब ।।


भारत का विपक्ष पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस ने सोलह जनवरी 2020 के अपने फेसबुक एकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखती है कि आतंकी हमले में दविंदर सिंह की संदिग्ध भूमिका सामने आई है सिंह को किसकी शह पर उसे सम्मान मिलता रहा और बड़ी जिम्मेदारियां मिलती रही जिससे जाहिर होता है कि भाजपा सरकार का सूचना तंत्र विफल है या फ़िर दविंदर सिंह को मजबूत सहारा मिला। देश इन सवालों के जवाब जानना चाहता है।
विपक्ष सत्ताधारी सरकार से आगे सवाल करते हुए पोस्ट में लिखता है कि भाजपा ने दविंदर सिंह को इतना क्यों महत्व दिया ? भाजपा शासन के समय हीं सिंह को अगस्त 2018 में सर्वोच्च पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया गया। हाल हीं में श्रीनगर दौरे पर आए पन्द्रह विदेशी प्रतिनिधियों के दल की जिम्मेदारी भी दविंदर सिंह को हीं दी गई। जम्मू - कश्मीर पुलिस के अधीक्षक के रूप में भी दविंदर को  नियुक्त किया जाना तय कर लिया गया था।
मालूम हो कि दविंदर सिंह डीएसपी हैं जो एक भारतीय प्रशासन का बहुत हीं जिम्मेदारी और ईमानदारी बरतने वाला पद है इस पद का गलत इस्तमाल करना उसमें भी देश सुरक्षा के मामला में यह देश के जनता को असहनीय पीड़ा देनेवाला काम है। एक बात और साफ़ है कि दविंदर सिंह इतना खतरनाक काम अकेले तो नहीं कर सकते बगैर बड़े पद के समर्थन के ऐसा काम करना असम्भव प्रतित होता है, जिसको दविंदर ने बड़ी सरलता के साथ अन्जाम दे रहा था। डीसीपी दविंदर सिंह को आतंकवादी के साथ गिरफ्तार किया गया है। वह आतंकवादी को शह देते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है। इसके साथ एक और दूसरा खबर का उज्जागर हुआ है जिसमें यह बताया जा रहा है कि भारत के पुलवामा हमला के वक्त दविंदर सिंह वहां मौजूद था। पुलवामा हमला में भारत के चालीस जवान मारे गए हैं। पुलवामा हमला से जुड़े एक बात यह भी सच है कि भारत के ख़ुफ़िया एजेंसी ने भारत सरकार को पुलवामा हमला से पूर्व हीं इस घटना के बारे में चेतावनी दे दिया था जिसके बावजूद भी भारत के उच्च सुरक्षा अधिकारी सचेत नहीं हुए और यह घटना घटित हो गया।
अभी भारत सरकार के स्टार अधिकारी हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज़ी आतंकवादी के विरुद्ध विश्व स्तर पर जंग छेड़ चुके हैं। विश्व समुदाय को आतंक के खिलाफ़ एकजूट होने का आग्रह करते दुनिया के देशों में चक्कर काट रहे हैं, पाकिस्तान को घेर रहे हैं और इससे पाकिस्तान शर्मिंदा भी हो चुका है। लेकिन वह भारत में हीं अपने अधिकारी को समझाने में नाकाम हो गए कि आतंकवादियों को मदद करना गलत बात है। जब आप अपने घरवालों को नहीं समझा सकते तो दुनियावाले भारत से सवाल अवश्य करेंगें कि पहले आप स्वयं ईमानदार बनो फ़िर बात करोगे तो ठीक होगा। क्योंकि सबसे बड़ी समस्या तो आपके अन्दर देश में हीं मौजूद है। जिस देश के अधिकारी आतंकवादी को लेकर दिनदहाड़े देश में घूमता हो तो ऐसे देश में आतंकवादी हमला होना तो स्वभाविक है फ़िर पाकिस्तान को घेरने की कवायद कैसे सम्भव हो सकता है? यह सिर्फ चुनावी मुद्दा हो सकता और देश सुरक्षा के नाम पर ढोंग हीं होगा।     

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