भारत का बनारस संसदीय चुनाव क्षेत्र विवादित सुर्ख़ियों में तब आया था, जब एक देश के बीएसएफ जबान तेजबहादुर यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ़ चुनाव लड़ने के लिए हिम्मत किया और अपना चुनावी नामांकन का पर्चा भरा। बाद में चुनाव आयोग ने बीएसएफ जबान का संसदीय उम्मीदवार के नामांकन पत्र को ख़ारिज कर दिया। जबकि वहीं चुनाव आयोग ने हरियाणा के करनाल संसदीय क्षेत्र से तेजबहादुर यादव को चुनाव लड़ने के लिए स्वीकृति दे दिया था। यह बताना बड़ा मुश्किल है कि हरियाणा के चुनाव आयोग ने ऐसा क्यों किया जबकि नियम तो सभी के लिए बराबर हीं थे। लोकतांत्रिक देश के लिए खतरे की घंटी बताया जाने लगा: बनारस संसदीय क्षेत्र में तेजबहादुर यादव के प्रवेश के बाद विवाद ऐसा गहराया था कि एक समय यह सुनने को मिलने लगा था कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। अब से देश की जनता को सावधान होने की जरूरत है। जबकि भारतीय मीडिया इस मामला को इस रूप में वर्णन करने के फ़िराक में नहीं थी। बल्कि, इस मामला को एक छोटी सी गलती बताकर द...