बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर
प्रसाद ने राज्य में समाज सुधार की बात छेड़ दिए हैं, समाजिक क्रांति की बात कर
दिए हैं। इन्होंने ऐसे समाज की परिकल्पना कर लिए हैं, जिससे हमारा समाज आजतक
संघर्ष करता चला आ रहा है, उसमें डूबकी लगाना कल्याण समझता रहा, जीवन का उद्धार
माना और अपने कर्मों का आख़री मार्ग माना है, इतना ही नहीं जीवन का आख़री यात्रा
में उसी का नाम लेते हुए, लोग शमसान को जाते हैं।
सर पर पिले रंग
के वस्त्र का पगड़ी बांधे हुए, बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखरजी ने कहा कि नफ़रत
से कोई देश महान नहीं बनता, बल्कि मोहब्बत से भारत महान देश बनेगा। उन्होंने कहा,“मनुस्मृति को
जलाने का क्यों काम किये! इसलिए कि इस ग्रंथ में भारत के
एक बड़े तबका के खिलाफ, समाज के 85 प्रतिशत लोगों को व इनके ख़िलाफ़ गालियां लिखी
गईं हैं।”
‘रामचरितमानस’ की सच्चाई से समाज को अवगत कराते हुए, शिक्षा मंत्री ने कहा,“रामचरितमानस का प्रतिरोध क्यों हुआ, किस अंश का प्रतिरोध हुआ! इस ग्रंथ के एक अंश में “अधम जात में विद्या पाये, भयहूं जथा हीं दूध पिलाए” लिखा हुआ है। इसका अर्थ यह होता है कि ‘नीच जाती के लोग शिक्षा ग्रहण करके ज़हरीला हो जाते हैं, जैसा की सांप दूध पीकर ज़हरीला हो जाता है।’ मतलब साफ है, रामचरितमानस के अनुसार भारत के नीच वर्ग के लोग शिक्षा ग्रहण नहीं कर सकते, यह समाज के लिए ज़हरीला होगा।”

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