साउथ अफ्रीका में ब्रिटिश हुकूमत का ईंट से ईंट हिला कर रख देनेवाला साधारण सा युवा महात्मा गाँधी का प्रथम पड़ाव गुजरात हीं था, जिसके बाद वह बिहार के चम्पारण जिला से भारत के आजादी के लिए जो शांत उग्र रूप का वस्त्र धारण किया तो आजादी के बाद अपनी हत्या होने तक अपने आप में कभी बदलाव नहीं किया और न कभी किसी के सामने घुटने टेके। वहीं से प्रियंका गाँधी ने भी अपना पहला राजनीतिक भाषण की शुरुआत किया है उस भाषण में उन्होंने बहुत कुछ कहा है। भावनाओं से भाषण की शुरुआत पहली बार मैं गुजरात आयी हूँ.......... और पहली बार साबरमती के उस आश्रम में गयी जहाँ से महात्मा गाँधी ज़ी ने इस देश की आजादी का संघर्ष शुरू किया था और मैं बता नहीं सकती आपको की वहां के पेड़ों के नीचे बैठते हुए भजन सुनते हुए मेरे दिल में क्या भावना जागी लगा कि आँसू आनेवाले हैं क्योंकि मैंने उन देशभक्तों के बारे में सोचा जिन्होंने आजीवन संघर्ष किया जिन्होंने इस देश के लिए अपनी जान दे दी सब कुछ त्याग कर दिया जिनके वालिदानों पर इस देश की नींव डाली है। फ़िर मन की बात का जिक्र किया वहां बैठे हुए मन में ये बात आयी की ये देश ...