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प्रियंका गाँधी के राजनीतिक कैरियर का पहला अभिभाषण- गुजरात से।।

साउथ अफ्रीका में ब्रिटिश हुकूमत का ईंट से ईंट हिला कर रख देनेवाला साधारण सा युवा महात्मा गाँधी का प्रथम पड़ाव गुजरात हीं था, जिसके बाद वह बिहार के चम्पारण जिला से भारत के आजादी के लिए जो शांत उग्र रूप का वस्त्र धारण किया तो आजादी के बाद अपनी हत्या होने तक अपने आप में कभी बदलाव नहीं किया और न कभी किसी के सामने घुटने टेके। वहीं से प्रियंका गाँधी ने भी अपना पहला राजनीतिक भाषण की शुरुआत किया है उस भाषण में उन्होंने बहुत कुछ कहा है। भावनाओं से भाषण की शुरुआत पहली बार मैं गुजरात आयी हूँ.......... और पहली बार साबरमती के उस आश्रम में गयी जहाँ से महात्मा गाँधी ज़ी ने इस देश की आजादी का संघर्ष शुरू किया था और मैं बता नहीं सकती आपको की वहां के पेड़ों के नीचे बैठते हुए भजन सुनते हुए मेरे दिल में क्या भावना जागी लगा कि आँसू आनेवाले हैं क्योंकि मैंने उन देशभक्तों के बारे में सोचा जिन्होंने आजीवन संघर्ष किया जिन्होंने इस देश के लिए अपनी जान दे दी सब कुछ त्याग कर दिया जिनके वालिदानों पर इस देश की नींव डाली है। फ़िर मन की बात का जिक्र किया   वहां बैठे हुए मन में ये बात आयी की ये देश ...

सरल स्वभाव की प्यारी किट्टी - भाग एक

बहुत हीं शान्त स्वभाव की किट्टी को किसी से भी इससे प्यार हो जाय! इसकी सादगी और मिलनसार प्रवृति से हम प्रभावित हुए। वह अपनी ओर हमे आकर्षित करने में सफल रही। ऐसे तो यह एक जानवर है जो हमेशा घूम-घूम के जीवन व्यतीत करती है। दूसरे तरह से कहे मतलब इसका कोई निश्चित ठिकाना या बसेरा देखने को नहीं मिला। और इसमें एक ख़ास गुण देखने को यह मिला कि इसे किसी से बैर करते भी नहीं देखा। इतने नरम दिल वाली शायद हीं कोई हो। इसके  इस स्वभाव से हम भी जलसी हो जाते। अपने बच्चों को इससे दूर रहने की हिदायत हमेशा देते।  लेकिन, इसके करीब जाने से हम अपने आप को रोकने में उससे पराजित हो गए। वो एक जानवर और हम मानव, उसमें भी पढ़ा-लिखा मानव, फ़िर भी उस जानवर ने अपने सरल स्वभाव के मामले में और लोगों के साथ रहने के मामले में हमे पराजित कर दिया। मैं उससे हार स्वीकार करता हूँ। शायद इसलिए हमारे बच्चे भी इसके पास चले जाते और इसे खाना खिला हीं देते। लाख मना करने पर भी बच्चे नहीं मानते। गांव के बच्चे तो इसे 'कुतिया' कहकर बुलाते। हलांकि इस क्षेत्रवासियों के लिए कुतिया शब्द एक बोलचाल की भाषा है। यूं कहें इस जानवर के लिए यह...

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों की शादी पर उठते नये सवाल ।

शादी को एक जन्म-जन्म का बंधन माना जाता है। ऐसे तो यह कल्चर पूरे भारत में प्रचलित है और सारे भारतवसियों शादी को लेकर बहुत सचेत रहते हैं। यहाँ के समाज में एक कहावत खूब प्रचलित है कि “ पानी पियो छान के बेटी ब्याहों जान के”। मतलब साफ है जिस प्रकार जल को बहुत अच्छी तरह से छान कर पीना चाहिए जिससे स्वाथ्य ठीक रहता है उसी प्रकार अपने बेटी को जिस लड़के के साथ ब्याहने जा रहें हैं उसको बारे में अच्छी तरह से ठोक-बजकर परख लेना चाहिए ताकी बाद में दिक्कत का सामना करना न पड़े। इससे हम अनुमान लगा सकते हैं कि इस क्षेत्र में शादी ब्याह का कितना महत्व है। इसके बावजूद भी आजकल शादी से जुड़े समस्या को देखा सुना जा रहा है।  अब तो शादी का मामला कोर्ट तक पहुंचने लगा है जो विवाद का नया समस्या बनते जा रहा है। शादी से जुड़े दूसरी और अहम बात यह देखा जा रहा है जो दुल्हन और दूल्हा के उम्र के बारे में बयां करता है। शादी किस उम्र में होनी चाहिए को लेकर सभी वर्ग, जाति और कानून में मतभेद है। सब का अपना–अपना तर्क है जो अपने स्थान पर सही है और गलत भी हो सकता है। यहाँ के शादी सबसे रोड़ा बनकर खड़ा है वो है शादी में होनेवाला...

युवा नेता राहुल गाँधी ने झारखंड से मोदी पर किया प्रहार ।।

झारखण्ड के 2019 विधानसभा चुनाव खत्म हो गया है, इसके चुनाव के नतीजे भी आ चुके हैं और कांग्रेस गठबंधन के समर्थन वाली सरकार बन चुकी है। झारखण्ड के 11वें मुख्यमंत्री के रूप में हेमंत सोरेन झारखण्ड के मुख्यमंत्री का शपथ भी ले लिए हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा लाख प्रचार – प्रसार करने के बावजूद भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार झारखण्ड से बेदखल हो गई। मोदी के बड़े-बड़े काम तथा अमित शाह के चाणक्य नीतियां जनता को रास नहीं आयी। यह चुनाव झारखण्ड में उस समय कराया गया जिस समय नरेंद्र मोदी चुनाव से ठीक पहले नागरिक संशोधन अधिनियम लागू करने का पैतरा का दांवपेंच खेल चुके थे फ़िर भी यहाँ के आवाम नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बात को आवाम ने अनसुना कर दिया। यह जीत झारखण्ड के जनता की जीत है जिन्होंने अन्यायियों को सबक सिखाने का संदेश दिया है और यूपीए गठबंधन (कांग्रेस, राजद और झामुमो) के युवा नेता राहुल गाँधी, तेजश्वी यादव व हेमंत सोरेन पर भरोसा जताते हुए इनको मौका दिया। इन नेताओं को जनता के भरोसा पर खरे उतरना होगा, जनता के लिए अच्छे फैसले लेने होंगे तथा इन्हें जनता को आर्थिक, सामाजिक औ...

The demonetisation of India in 2016 is a mega crime.

Prime Minister Narendra Modi, while making the announcement on the night of November 8, 2016, presented good news to the 1.25 billion people of India, in which the notes of five hundred and one thousand were brought out of circulation in the country. It was called as demonetisation, which was a sudden decision taken by the government. Many big claims were made about its benefits, dreams were shown to more than one public, such an atmosphere was created in the country that it was felt that demonetisation would lead to welfare of the country. There will be complete end to the black money present in the country, after which the property of honesty will be dominated in India. At the time of demonetisation, all the arguments were given to the citizens of India in the language tone in which the middle and lower classes of India use the language of interaction between each other. The public was told that taking a sudden decision will work, the black money hoarders will be cautious due to th...

आर्थिक स्थिति में लुढ़कता भारत को पटरी पर लाने की कवायद।।

भारत में बेरोजगारी का आलम बड़ा व्यापक और स्वभाव से जिद्दी हो गया है हटने का नाम हीं नहीं ले रहा है। इतना हीं नहीं रोजगार भी बेदर्द हो गया है। इनको भी देश के युवाओं का चेहरा रास नहीं आ रहा है, फूटी कौड़ी नहीं सोहा रहा है। इतना बेदर्द तो अंग्रेज भी नहीं हुआ करते थे जनाब! वो भी समय आने पर नरम दिल वाला बन हीं जाते थे, हाँथ जोड़कर उन्होंने भी प्रणाम करना सीख गए, लोगों के सामने इज्जत से पेश आना भी सीख गए, अपने अन्दर लज्जा को भी समाहित कर लिया और आर्थिक मामले में तो उन्होंने सोने की चिड़ियाँ कहे जानेवाला देश भारत को भी पिछे छोड़ दिया। भरतीय भी इनसे शर्माने लगे थे तथा इर्ष्या के नजरों से देखने लगे थे। अंग्रेजी शासन ने भारत में पहली बार रेलगाड़ी चलायी, सती प्रथा को समाप्त करने का फैसला लिया, देश का एकीकरण किया और अंततः भारत को छोड़कर चले जाने का फैसला भी ले लिया। हमारी वर्तमान सरकार बेरोजगारी व भ्रष्टाचार खत्म करने तथा शिक्षा में सुधार करने के बजाय सामन्य वर्ग का आरक्षण देने, तीन तलाक प्रथा को खत्म करने एवं नागरिकता संशोधन अधिनियम लाने से काम चलाने के फ़िराक में लगी है। अब हमारी सरकार रेपो रे...