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अमरुद- अमरुद का नाम लेते हीं बचपन की बहुत सारे यादें अंगडाईयां लेने शुरू कर देती है जैसे!

अमरुद का नाम लेते हीं बचपन की बहुत सारे यादें अंगडाईयां लेने शुरू कर देती है। जैसे, बिहार राज्य के नालंदा जिला के जिस गांव में बचपन गुजरा वहां के लोग अपने घरों में अमरुद का पेड़ लगाने के रिवाज से ओत-प्रोत थे। घर के दरवाजे के पास भी कुछ लोग अमरुद का पेड़ लगाया करते, लेकिन ऐसे लोगों की संख्या न के बराबर थी, यूं कहें था हीं नहीं। गांव में जीतने अमरुद के पेड़ थे वो सभी एक चाहरदीवारी के अन्दर कैद थे और इसके साथ इसपर कठोर पहरा देने की प्रथा थी। पहरा ऐसा होता जैसे आज के नेता चुनाव के समय अपने मतदाताओं पर देते हैं। आज भी यहाँ अमरुद की गाछ दरवाजे के पास ही देखने को मिलता हैं, हलांकि घर के आंगन में लगाना लोग छोड़ चुके हैं, क्योंकि अब के घर पहले जैसा मिट्टी के दिवार से या बीस इंच मोटी ईंट से बने नहीं हैं बल्कि दस इंच के पक्की ईंट और सीमेंट से मिलकर बनी है। समय के अनुसार सब कुछ बदल जाता है और बदलने में हीं समझदारी है लेकिन एक बात जो आज भी यहाँ के लोगों में कूट-कूट कर भरा पड़ा है वो है अमरुद से लादे पेड़ के प्रति प्रेम और इसपर पहरा देने का रिवाज आज भी यह प्रथा वैसे हीं मौजूद है जैसे नब्बे के दशक में ...

एक कप चाय, मिट्टी वाली में - चाय को पीने में जो मजा है, वो मजा सात समन्दर पार जाकर भी नहीं वो कैसे !

एक कप चाय से याद आया कि मिट्टी के बर्तन वाली चाय को पीने में जो मजा है, वो मजा सात समन्दर पार जाकर एक प्रेमी को अपने प्रेमिका या एक प्रेमिका को अपने प्रेमी से मिलने में भी नहीं होगा! लेकिन वो मजा इस चाय पीने में आपको मिलेगा।  आप महिला हों या पुरुष यदि आप अपने जीवन में, प्रेम में प्रवाहित होने के आनंद से वंचित रह गाएं हैं तो हमारी मानिये एक बार इस चाय के प्रेम में बह जाइये, डूब जाइये और इसके गर्माहट में गोते लगा लीजिये! इसके मंद-मंद सुगंध में अपने नाक के दोनों सुराग को झोंक दीजिये। लेकिन एक बात का ख्याल रखियेगा,   इस चाय को पीने में कभी जल्दीबाजी नहीं कीजियेगा। नहीं तो, आपका जीभ आपसे नाराज हो जायेगा। बेमतलब के आप बेचारा स्वभाव से कोमल जीभ को रुखा कर दीजियेगा। यदि आपको विश्वास नहीं होता, तो एक बार मिट्टी वाला चुक्का में परोसी गई चाय को अपने होंठ से लगाकर और चाय को जीभ पर गिराकर तो देखिये! जैसे हीं, यह चाय आपके जीभ को स्पर्श करेगी वैसे हीं आप स्वयं इसके स्वाद से परिचित हो जाएंगें। हमारी मानिये तो आज हीं आप नुक्कड़ वाली एक कप चाय का मज़ा ले लीजिये। भारत आधुनीकता की ओर कदम बढ़ा च...

नरेंद्र मोदी सरकार को भी कुछ करने व भारत के किसानों के हीत को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने का समय आ गया है।

नरेंद्र मोदी सरकार को भी कुछ करने व भारत के किसानों के हीत को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने का समय आ गया है। जिस प्रकार से मनमोहनसिंह कि सरकार ने देश के गरीब बच्चों को विकास के लिए शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार में शामिल किये उसी प्रकार से भारत के किसानों के जीवन को सुरक्षित रखने व उन्हें आत्महत्या करने से रोकने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को भी कुछ करने की जरूरत है। ऐसे फैसला लेने का समय आ गया है कि मोदी सरकार किसानों के साथ हमदर्दी दिखाये। यह समय आ गया है।  सच में, मोदी सरकार किसानों का विकास चाहती है, भारत के किसानों का भला चाहती है, किसानों को आत्महत्या करने से रोकना चाहती है तो पहले सरकार अपने तीन नए कृषि कानूनों को समाप्त कर देना होगा। सरकार अपने नए तीन कृषि कानूनों को समाप्त करके भी किसानों का विकास सम्भव कर सकती है। इसके लिए पहले मोदी सरकार अपने तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लें, उसके बाद मोदी सरकार एमएसपी को एक कठोर कानून में तब्दील कर दे। इसमें गड़बड़ करने वाले अधिकारियों को कड़ी से कड़ी सजा देने का प्रवधान किया जाय और वहीँ किसानों के लिए इस कानून को सरल व सुगम व्यवस्था के...

एक सेल्स मैन को कामयाबी की सीढियाँ चढ़ने के लिए शारीरिक रूप से फिट होना बहुत जरुरी है।

एक सेल्स मैन को शारीरिक रूप से फिट होना बहुत हीं जरुरी है क्योंकि इन्हें प्रति दिन नये लोगों के साथ मिलना होता है। एक सेल्स मैन को कामयाबी की सीढियाँ चढ़ने के लिए शारीरिक रूप से फिट होना बहुत जरुरी है। क्योंकि इन्हें प्रति दिन नये लोगों के साथ मिलना होता है। एक सेल्स मैन को शारीरिक रूप से फिट होना बहुत हीं जरुरी है, इसलिए इस पेशे से जुड़े हुए व्यक्ति को अपने शरीर पर खास तरीके से ध्यान देना चाहिए। ऐसे तो एक अच्छा स्वस्थ शरीर सभी पेशे से जुड़े हुए व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखता है, लेकिन सेल्स काम के साथ जुड़े हुए व्यक्ति के लिए अच्छा स्वस्थ शरीर की बहुत आवश्यकता होती है। यदि आप प्रति दिन नये लोगों से मुलाकात करनेवाला काम करते हैं, सेल्स का काम करते हैं, इधर-उधर घूम कर लोगों से मीटिंग करने का काम करते हैं तो आपको मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार से मजबूत होना होगा। एक शरीर से कमज़ोर और निर्बल व्यक्ति को सेल्स का काम नहीं करना चाहिए। इन्हें या तो कोई दूसरा काम ढूंड लेना चाहिए या अपने शरीर को तंदुरस्त करने में भीड़ जाना होगा। आख़िर क्यों एक सेल्स मैन को अपने स्वास्थ का देखभाल करना जरुरी ह...

एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इस एक बात का ख्याल अवश्य रखना चाहिए।

एक सेल्स मैन को ये काम अवश्य करनी चाहिए, यदि आप एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इस एक बात  का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। एक सेल्स मैन को ये काम अवश्य करनी चाहिए। यदि आप एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इन बातों का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। हम कोई भी काम करते हैं उसकी योजना अवश्य तैयार करते हैं। एक छोटा सा छोटा काम के लिए भी हम योजना बनाते हैं। हलांकि छोटे कामों के लिए बनाये गए योजना हमारा दिमाग को पता नहीं चलता। हमारे दिमाग को इसके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसपर कभी आपने सोचा है कि आख़िर ऐसा क्यों होता है ? इसकी वजह को हमे जानने का प्रयास अवश्य करनी चाहिए। ऐसे तो इसके अनेकों वजह हो सकते हैं और इसके मनोवैज्ञानिक कारण भी कई हो सकते हैं, लेकिन हमे इन भारी वजहों को छोड़कर एक सरल वजह की तलाश करने की जरूरत है। मेरे अनुसार सरल स्वभाव से इसका एक वजह यह भी हो सकता है कि हमारा दिमाग इन छोटे-छोटे कामों को पहले कई बार कर चुका होता है। यूं कहें इस काम को मेरा दिमाग पूर्ण रूप से अभ्यस्त हो गया होता है। इसलिए हमारा दिमाग को इस छोटा काम को पूरा करने में किसी प्रकार की परेश...

Today, the Modi government is convincing to farmers, what did say to the people of India at the time of demonetisation?

It has been 75 days since the farmers have been agitating near the capital of India, but no one is ready to listen to the farmers' problem. It has been 75 days since the farmers have been agitating near the capital of India, but no one is ready to listen to the farmers' problem. The Government of India is now trying to prepare these people to send them to jail by prosecuting the agitating farmers. Now, who will raise voice for the demand of farmers in the country? On the basis of this decision and system of the Government of India, how can it be fair to say that India has a clean democracy? Remember the people of India, what did Narendra Modi tell you during the time of demonetisation? Indian Farmers Union leader Rakesh Tikait said on Sunday that it is not possible to return home till the demands are met. The leader of the farmers union says that the central government should withdraw the controversial agricultural laws and enact a new law to give confidence to continue the...

The MSP of farmers should be included in the fundamental right of the farmers.

If Narendra Modi's government really wants develop to farmers, the MSP along with the stringent law should include the fundamental right of the farmers. 74 days have passed for the agitating farmers near Delhi, the capital of India, but the Narendra Modi government has not yet agreed to listen to the farmers. Is this where a clean democracy is identified? The public is opposing the agricultural law and the government is enjoying the silent arc movement. Like circus in the country. A good democratic government cannot enforce its law by suppressing the voice of the public. If it does, it is clear that the government is violating democracy. The government of Narendra Modi of India says that our government is not abolishing the MSP of the farmers but is implementing three agricultural laws. And this government further states that the MSP of the farmers of India is safe. When Narendra Modi's government is promising farmers that MSP of farmers is safe, then what is the problem of...