हिमाचल में भीषण गर्मी से धधके जंगल: शिमला और सोलन में आग से करोड़ों की संपदा का नुकसान।।
N5/शिमला: हिमाचल प्रदेश में इन दिनों भीषण गर्मी के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। शिमला जिले के कोटखाई के शिलडू गांव के जंगल में आग लगने की ताजा ख़बर है।
वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से जंगलों में आग लगने की खबरें आ रही हैं। हिमाचल प्रदेश इस समय भीषण गर्मी और सूखे की मार झेल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य के जंगलों में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि हुई है।
मई 2026 में अब तक राज्य में आगजनी के 248 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं स्रोत बता रहे हैं।
आग का तांडव और स्थिति की गंभीरता की ख़बर इस तरह के हैं:
शिमला जिले के कोटखाई के शिलडू गांव और आसपास के क्षेत्रों से जंगलों में आग लगने की खबरें सामने आई हैं।
जैसा कि फोटो में भी देखा जा सकता है। आग की ये लपटें इतनी विकराल थीं कि इन्होंने कई क्षेत्रों में स्थानीय धार्मिक स्थलों और आबादी के करीब तक पहुंच बना ली थी।
सोलन का कसौली क्षेत्र। यहां एक बड़ी वन अग्नि ने स्थिति को चिंताजनक बना दिया था, जिसे बुझाने के लिए भारतीय वायुसेना के Mi-17 और चिनूक हेलीकॉप्टरों की मदद लेनी पड़ी।
सोलन के अलावा मंडी, धर्मशाला और शिमला के अन्य इलाकों में भी आग की कई घटनाएं दर्ज की गई हैं।
### वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई
हिमाचल प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) संजय सूद ने जानकारी दी है कि अब तक लगभग 3,000 हेक्टेयर वन क्षेत्र इस आग की चपेट में आ चुका है, जिससे करीब 67 लाख रुपये की वन संपदा का नुकसान होने का अनुमान है।
प्रशासन ने अनेक ठोस कदम उठाए हैं। जैसे,
टास्क फोर्स का गठन: आग पर काबू पाने के लिए विशेष टास्क फोर्स तैनात की गई है।
छुट्टियां रद्द: वन विभाग के फील्ड स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं ताकि वे 24/7 निगरानी रख सकें।
हेलीकॉप्टर का उपयोग: जहां पहुंचना कठिन है, वहां वायुसेना की मदद से हवाई मार्ग से पानी का छिड़काव (Bambi Bucket operations) किया जा रहा है।
आग का मुख्य कारण क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण तापमान में अचानक हुई बढ़ोतरी और लंबे समय तक बारिश न होना है।
इसके अलावा, चीड़ की सूखी पत्तियां आग को तेजी से फैलाने में ईंधन का काम करती हैं।
निष्कर्ष: वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जंगलों में ज्वलनशील पदार्थ न ले जाएं और सावधानी बरतें क्योंकि कई बार मानवीय भूल या लापरवाही भी इन भीषण अग्निकांडों का कारण बनती है।