बेमौसम बारिश की मार: मंडियों में भीगा सोना, खेतों में बिछी फसलें

बेमौसम बारिश की मार: मंडियों में भीगा सोना, खेतों में बिछी फसलें

नई दिल्ली/पटना/लखनऊ: पिछले कुछ दिनों से उत्तर और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में हो रही बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने किसानों की कमर तोड़ दी है। पंजाब, हरियाणा से लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार तक, मंडियों में रखा अनाज और खेतों में खड़ी रबी की फसलें भारी संकट में हैं।


प्रमुख राज्यों की स्थिति: एक नज़र में

राज्यमुख्य प्रभावसरकारी कार्रवाई / स्थिति
पंजाब & हरियाणामंडियों में लाखों टन गेहूं खुले में भीगा; उठान (Lifting) में देरी।अमृतसर और पटियाला जैसे क्षेत्रों में तिरपाल की कमी की खबरें।
उत्तर प्रदेशतेज हवाओं से फसल खेतों में गिरी (Lodging); दानों की चमक कम होने का डर।पश्चिमी यूपी और पूर्वांचल में खरीद केंद्रों पर जलजमाव।
बिहार13 जिलों में ओलावृष्टि से भारी नुकसान; लगभग 45,000 हेक्टेयर फसल प्रभावित।कृषि इनपुट अनुदान के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू; मुआवजा राशि तय।

संकट के तीन बड़े कारण

  1. मंडियों में कुप्रबंधन: पंजाब और हरियाणा की मंडियों में अनाज का उठान समय पर न होने के कारण बोरियां खुले आसमान के नीचे पड़ी रहीं। अचानक हुई बारिश ने अनाज को गीला कर दिया, जिससे दानों के सड़ने और नमी (Moisture) बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

  2. प्रकृति का प्रकोप: उत्तर प्रदेश और बिहार में बारिश के साथ चली 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाओं ने गेहूं की पकी हुई फसल को खेतों में गिरा दिया है। गिरी हुई फसल की कटाई न केवल महंगी पड़ती है, बल्कि पैदावार भी कम हो जाती है।

  3. खरीद में तकनीकी बाधा: सरकारी नियमों के अनुसार, गेहूं में नमी की मात्रा 12% से अधिक नहीं होनी चाहिए। बारिश के कारण यह सीमा पार हो गई है, जिससे सरकारी केंद्रों पर खरीद प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।

किसानों के लिए राहत और चुनौतियां

  • बिहार सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की घोषणा की है, जिसके लिए किसान 5 मई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।

  • पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया है कि खरीद की जा चुकी बोरियों के नुकसान की जिम्मेदारी एजेंसियों की होगी, किसानों की नहीं।

  • विशेषज्ञों की सलाह: मौसम विभाग (IMD) ने अगले 48 घंटों तक सतर्क रहने को कहा है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अनाज को पूरी तरह सुखाकर ही मंडी लाएं ताकि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिल सके।

निष्कर्ष: यह समय किसानों के लिए "दोहरी मार" जैसा है—एक तरफ प्रकृति की बेरुखी और दूसरी तरफ मंडियों में उठान की सुस्त रफ्तार। आने वाले दिनों में सरकार द्वारा खरीद नियमों में ढील और मुआवजे का वितरण ही किसानों को इस आर्थिक तंगी से उबार सकता है।

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