Skip to main content

Posts

Chief Election Commissioner of India T N Seshan whose name created terror among the politicians.

India's former IAS level government officer has now departed from this world, we as Indian citizens pray for the peace of his soul and also pray to God that he is born again in India and this time he becomes the Prime Minister of India. His full name was Tirunellai Narayana Iyer Seshan. He was born on 15 December 1932 in Palakkad district of Kerala before India's independence. He became more famous by the name of TN Seshan. Seven years after India's independence, in 1955, he was selected as IAS for Tamil Nadu cadre. Seshan soon became known for doing his work with seriousness and responsibility, he did his duty within the ambit of the Constitution and was not afraid of anyone at all in doing this. He used the authority of his post fearlessly throughout his life. He was awarded the Ramon Magsaysay Award in 1996 for discharging government services with honesty. TN Seshan was elected as the 10th Chief Election Commissioner of India in 1990, when Chandrashekhar ji was the Prime...

भारत के प्रतिष्ठित कांग्रेस पार्टी को स्वंय का अवलोकन करना चाहिए ।।

भारत के सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को अपनेआप को अवलोकन करने का समय आ गया है, समय रहते यह काम नहीं किया तो कांग्रेस स्वयं को नुकसान करेगी हीं देश को भी बहुत बड़ा झटका लगने से कोई नहीं बचा सकता। आज के कांग्रेस पार्टी पुराने कांग्रेस से बिल्कुल हीं अलग-थलग है, इसकी अलग पहचान है, इसकी तुलना पुराने कांग्रेस के साथ नहीं किया जा सकता और न हीं पुराने के आधार पर जनता को वोट करना चाहिए। कांग्रेस देश की पुरानी पार्टी के साथ-साथ एक प्रतिष्टित व बड़ी पार्टी है, जिसको अध्ययन करने की लिए निम्न को आधार मानकर पार्टी को समझा जा सकता है।     प्रथम- कांग्रेस का जन्म हुआ जिसमें स्वतंत्रता सेनानी शामिल थे उस समय पार्टी के अध्यक्ष पद का चुनाव योग्यता और सामर्थ्य व लोकप्रियता के आधार पर होता था। इसके आधार पर इसे एक स्वतंत्रता पार्टी कहना उचित होगा। दूसरा- भारत के आजादी के बाद का कांग्रेस इसमें भी अध्यक्ष पद का चुनाव में पारदर्शिता का बोलबाला से इनकार नहीं किया जा सकता। तीसरा- भारत आजादी के बाद अपने पैर पर खड़ा हुआ, विकास के मार्ग पर चलना शुरू किया, मतदान को समझने लगा के समय के कांग्रेस म...

त्यौहार मनाना और मेला लगाना नहीं भूले, लेकिन देशी बाजार को भूल गए।।

भारत एक पंथनिरपेक्ष देश है, इसलिए यहाँ धर्मों की बहुलता है। लगभग दुनिया के अधिकतर धर्मों को भारत में देखा जा सकता है। भारत की खासियत है कि विभिन्न धर्म के लोग एक छत के नीचे रहते हैं, इतना हीं नहीं सभी धर्म के त्यौहार को लोग साथ में मिलकर मनाने की प्रथा शुरू कर चुके हैं। इस देश की ख़ासियत यह बन चुका है कि धर्म अनेक उनके त्यौहार अनेक लेकिन इसको मनानेवाले त्यौहार के समय एक हो जाते हैं। यहाँ सभी दूसरे धर्म के त्यौहार को प्यार और सम्मान से देखता है, आज हिन्दू धर्म के लोग गुड फ्राइडे, ईद और मुस्लिम भाई दशहरा, दिवाली और छठ जैसे हिन्दू के महान पर्व के खुशियों में शरीक होने से अपने आप को रोक नहीं पाते हैं, लेकिन त्यौहार को मनानेवाले भारतीय अपने दायित्व को भूलते जा रहे हैं। आज भारत के त्यौहार का स्वरूप हीं बदल चुका है, इसमें प्रयोग होनेवाला संसाधन में भारी उलट-फेर हो गया है को सरलता के साथ देखा व महसूस किया जा सकता है। किसी धर्म का त्यौहार को ले लीजिये उसमें इस्तमाल किये जानेवाले वस्तुओं की निर्भरता बाजारू वस्तुओं पर चला गया है ( सभी के त्यौहार बाजार पर ज्यादा निर्भर हो गया है ) और भारत के...

पुलिसिया शिकंजा।

बहुत कुछ सोचना पड़ता है, क्योंकि हम बेटी की बाप हैं। ऐसे कैसे मुकदमा में फंस जाय, मेरी बेटी पर बदनामी का धब्बा लग जाएगा तो। इससे शादी भला कौन करेगा ? बेटी को कोर्ट में हज़ारों बार जाना पड़ेगा, दरोगा कई बार सवाल करेगा, समाज कहेगा कि जरुर लड़की में हीं गलती होगी तब न ऐसे हुआ। छोरा, दुसरों के साथ काहे न कुछ किया। पुलिस गवाह खोजेगा कौन गवाह देगा ? इतना आसान नहीं है, मुझमे इतना हिम्मत नहीं कि आगे की लड़ाई लड़ सकूं। हमें बख्श दो! हमें कोर्ट-कचहरी के चक्कर में नहीं पड़ना है, अब जो हुआ सो हुआ ये अभागी के किस्मत में यहीं लिखा था। लेकिन, हम सब तुम्हारे साथ हैं। तुमको डरने की जरूरत नहीं है। रात में जिस समय तुम्हारे बेटी के बाल पकड़कर छोरा लेकर भाग रहा था, उस समय गांव वाला नहीं दौड़ता, हल्ला नहीं करता तो छोरा तुम्हारे बेटी को लेकर भाग गया होता। आज तुम किसी का चेहरा दिखाने लायक नहीं होते और सब यहीं कहता कि तुम्हारी बेटी अपने मन से दो बच्चे का बाप के साथ भाग गई। हम सब गांव वाले मिलकर तेरे लिए, छोरा के परिवार वालों से पंगा लिया। यदि छोरा, उल्टा हम सब पर हीं मुकदमा कर दिया तो क्या होगा ? जरा सोचो! हम सब ही...