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पीएम मोदी मणिपुर को जातिय हिंसा के आग में जलने के लिए क्यों छोङ दिये? आज का बङा सवाल।

मणिपुर हिंसा और नरेंद्र मोदी

पीएम मोदी मणिपुर को जातिय हिंसा के आग में जलने के लिए क्यों छोङ दिये? आज का बङा सवाल।

प्रधानमंत्री ने संसद भवन में जवाब नहीं दिए- राहुल गाँधी


आज के भारत में सिर्फ मणिपुर में हिंसा की बात हो रही। इसको लेकर लोग खूब चर्चा कर रहें हैं। आख़िर यह कैसे और क्यों हुआ कि लोग देश के अन्य समस्याओं को भूलकर सिर्फ मणिपुर के बारे में चर्चा करने पर आमदा हैं।


आज के भारत के लिए यह बहुत बङा और जरूरी सवाल है। इसपर सोचने कि जरूरत है। कहीं ऐसा न हो, इसके आङ में देश का बङा नुकसान कर दिया जाय।


सोचनेवाली बात यह है कि पिछले दो माह से मणिपुर हिंसा से ग्रस्त है, यहाँ सेना का भी तैनात कर दिया गया है, इसके बावजूद हिंसा थमने का नाम नहीं ले रहा। भारत के गृहमंत्री भी मणिपुर गये, लेकिन दंगा पर कोई असर नहीं हुआ। गृहमंत्री को मणिपुर से लौटने के बाद ख़बर ये आयी की मणिपुर में हिंसा और बढ़ गया।


गृहमंत्री के जाने के बाद राज्य में शांति स्थापित नहीं हुई, तो इसके बाद केन्द्र सरकार को और उपाय करने कि जऱूरत थी। इसके बाद भारत के प्रधानमंत्री को मणिपुर जाकर समस्या को समझकर बङे अधिकारी के साथ दूसरा उपाय करने थे। लेकिन, भारत पीएम ने ऐसा नहीं किया और मणिपुर के लिए एक शब्द तक नहीं बोला।


उपरोक्त दोनों तथ्यों से ऐसा लगता है कि मणिपुर को हिंसा में जलने के लिए छोङ दिया गया। मणिपुर में हिंसा को रहने से ये हुआ कि भारत के लोग असली मुद्दे पर जो बहस कर रहे थे वो भूलकर मणिपुर पर चर्चा करने लगे।


मणिपुर हिंसा से पहले भारते के लोग नरेंद्र मोदी और गौतम अडानी मिलकर जो घोटाला किया उसपर चर्चा कर रहे थे, पुलवामा हमला हुआ था, जिसमें 38 सैनिक मारे गये थे का खुलासा होनेवाला था आदि मुद्दों की चर्चा बंद हो गई।


इन मुद्दों का खुलासा होने से सिर्फ बीजेपी और इसके नेता नरेंद्र मोदी का नुकसान हो रहा था। नरेंद्र मोदी इन दो मुद्दों की वजह से चुनाव हारते जा रहे थे। यहिं वजह रहा कि मोदी मणिपुर को हिंसा के आग में जलने के लिए छोङ दिया जैसे गुजरात को एक समय जलने के लिए छोङ दिया गया था।

 

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