मणिपुर हिंसा के सवाल पर पीएम मोदी भागते-भागते फिर रहे हैं, क्यों!
मणिपुर
हिंसा के सवाल पर पीएम मोदी भागते-भागते फिर रहे हैं- कभी अमेरिका जाते हैं, कभी
समारोह में चले जाते हैं और कभी चुनाव में चुनाव के प्रचार प्रसार में, कभी
उद्घाटन में तो कभी मीडिया को बेतूका का बयान दे देते हैं।
लेकिन, पीएम मोदी मणिपुर हिंसा पर बात नहीं करते। अब ब्रिटेन के संसद
में मणिपुर हिंसा पर चर्चा हो गई, जहाँ के प्रधानमंत्री भारतीय मूल के वंशज हैं।
मणिपुर के राज्यपाल स्वयं कह रही हैं कि मणिपुर में हिंसा जिस प्रकार की हिंसा हुई
है, वैसे हिंसा मैंने जिंदगी में नहीं देखी।
यहां के हालात ठीक नहीं है, बहुत दुखद है। मैं सेंट्रल सरकार को इसकी
सूचना दे दी हूं और मीडिया को भी बता दी हूं।
छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम देव ने कहा है कि अगर पीएम मोदी मणिपुर की
जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते हैं, तो गृहमंत्री अमित शाह को प्रधानमंत्री बना देना
चाहिए।
मणिपुर के मुख्यमंत्री जो बीजेपी के ही हैं, एम वीरेंद्र सिंह ने कहा
कि अगर केंद्रीय नेतृत्व बोलेगी तो मैं इस्तीफा दे दूंगा।
अब दिल्ली में बैठे पीएम नरेंद्र मोदी और इनके मोदी टीम किस बात का
इंतजार कर रही है, जब मणिपुर मुख्यमंत्री वीरेंद्र सिंह स्वंय कह रहे हैं कि
केंद्रीय नेतृत्व बोले हम इस्तीफा दे देंगे तो केंद्रीय नेतृत्व किस का इंतजार कर
रहा है।
मणिपुर की जनता भी मुख्यमंत्री का इस्तीफा की बात कर रही है, लेकिन
नरेंद्र मोदी और इसके टीम मणिपुर मुख्यमंत्री के इस्तीफा की बात ना करके कांग्रेस
पर हमला कर रही है और इसे कुचलने का प्रयास कर रही है।
इस पर मनगढ़ंत आरोप लगाकर देश से उखाड़ फेंकने के प्रयास में बीजेपी
लगी है। मणिपुर के इस राजनीतिक घटना से साफ हो रहा है कि बीजेपी को केंद्रीय
नेतृत्व में दम नहीं बचा की राज्य का कंट्रोल कर सके।
मोदी को अपनी कुर्सी जाने का डर सताने लगा है। ये भी हो सकता है कि बीजेपी
2024 लोकसभा चुनाव हारने वाली है, क्योंकि इन्होंने
बात बनाने, झूठ बोलने, लूटपाट करने और जनता को मूर्ख बनाने के अलावा दूसरा कोई काम
देश के लोगों के लिए नहीं किया।
इसलिए मोदी और मौदी टीम द्वारा भारत को गुजरात बनाने का प्रयास किया
जा रहा है, जैसे गुजरात में दंगा फैलाकर सत्ता में रहा, वैसे भारत में दंगा फैलाकर
सत्ता में रहने का प्रयास बीजेपी कर रही है पूरे भारत में सत्ता कायम रखने के लिए।

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