बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान से डाक बंगला चौराहा तक बीजेपी
के जुलूस की धुलाई का सच।
13 जुलाई के दिन बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान से डाक बंगला चौराहा तक बीजेपी रौद्र रूप धारण कर ली, जिसमें बीजेपी के कार्यकर्तों पर लाठी चार्ज और इनके एक कार्यकर्ता की जान जाने की घटना पर बिहार में राजनीतिक गरम हो गई है।
पहला तर्क- बीजेपी के लोग बिहार
सरकार के नई शिक्षा नियमावली और डोमिसाईल पालिसी के विरोध में पटना के गांधी मैदान
में सभा
करने के लिए जमा हुए थे।
डोमिसाईल शिक्षा पालिसी बिहार के ग़रीब लोगों और सरकारी स्कूलों
पर निर्भर बच्चों के लिए वरदान साबित होनेवाली शिक्षा पालिसी है, फिर बीजेपी द्वारा
इस शिक्षा नीति के विरोध में गांधी मैदान में सभा का आयोजन करने का उद्देश्य क्या
हो सकते हैं!
दूसरा तर्क- बीजेपी के शीर्ष नेताओं
ने बताया कि हमलोग शांति ढंग से गांधी मैदान से विधान सभा तक मार्च निकालने रहे थे,
जिसे बिहार पुलिस ने लाठी-डंडों से हमारे कार्यकर्ताओं को पीटा और विधान सभा तक
जाने नहीं दिया गया और इसमें हमारे एक कार्यकर्ता की मौत भी हो गई।
इसपर बिहार पुलिस का कहना है कि 13
जुलाई के दिन बिहार के प्रमुख पीर्टी (बीजेपी भारतीय जनता पार्टी) को सिर्फ पटना
के गांधी मैदान में
सभा करने की अनुमति दी गई थी। दूसरे जगह की अनुमति नहीं थी, इसके बावजूद इन लोगों
ने गांधी मैदान से विधान सभा तक जुलूस निकालने का काम किया।
बिहार पुलिस इन नेताओं और कार्यकर्ताओं के आगे बढने और रोकने का
प्रयास किया गया, समझाने का काम किया गया, लेकिन ये लोग नहीं माने और अगली पंक्ति
में खङे पुलिसों के आँखों में मिर्च का पाउडर झोंका और पीछे से पत्थर फेंका।
पार्टी के नेताओं और इनके साथ दे रहे भीङ के द्वारा उग्र हो जाने पर
इन्हे रोकने के लिए पुलिस हल्का बल प्रयोग करके भीङ को तीतर-बितर किया जाने का काम
किया गया।
पुलिस ने बताया कि पार्टी (बीजेपी) के एक कार्यकर्ता विजय सिंह की पीएमसीएच
में मौत होने की ख़बर है। जिस समय पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं पर पुलिस अपने
बल का प्रयोग कर रही थी, उसी समय 13 बजकर 23 मिनट पर विजय सिंह छज्जू मार्ग स्वस्थ
अवस्था में घूमते देखा गया।
विजय सिंह के साथी ने बयान में कहा कि हमलोग डाक बंगला चौराहा कि ओर जा
रहे थे, लेकिन सुनने को आया कि उधर भगदङ मची हुई है, तो हमलोग नहीं गए और गांधी
मैदान की ओर ही लौटने लगे।

Comments