भारत में पेट्रोल और
डीजल के बढ़ते दामों से परेशान जनता को देखकर नरेंद्र मोदी बौखला गए और उन्होंने
भारतीय मीडिया में बिफ़रते हुए केन्द्र सरकार को जोरदार लताड़ लगाई। मीडिया भी इस
खबर को प्राथमिकता देते हुए लोगों को खबर दिखाया और लोकतंत्र के चौथा स्तम्भ होने की
भूमिका को निभाने का काम किया। जिसके बाद भारतीय मीडिया के बारे में ये कहा जा सकता
है कि मीडिया ईमानदार है जो देश के लिए हितकर है।
केन्द्र सरकार के
नाकामयाबी को देखते हुए नरेंद्र मोदी ने मीडिया को कहा कि देश में जिस प्रकार से
पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए गए ये दिल्ली सरकार की शासन चलाने के नाकामयाबी का
जीता-जागता सबूत है। मोदी मीडिया को संबोधन करते हुए आगे कहते हैं कि देश की जनता
के अन्दर भारी आक्रोश है, इसके कारण और भी चीजें पर बहुत बड़ा बोझ होनेवाला है और सरकार
पर भी बहुत बड़ा बोझ होनेवाला है। भारत के आम लोगों का आर्थिक फ़िक्र तथा
प्रधानमंत्री को सचेत करते हुए नरेंद्र मोदी भारतीय मीडिया को आगे कहते हैं कि मैं
आशा करूँगा कि प्रधानमंत्री ज़ी देश की स्थिति को गंभीरता से लेंगें और पेट्रोल के
दाम बढ़ाएं हैं उसको कम करेंगें।
उपरोक्त यह खबर वर्ष
2014 या उससे पहले की है जब भारत के प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह थे और विपक्ष
में नरेंद्र मोदी हुआ करते थे। इस समय पेट्रोल का दाम लगभग 75 रूपये प्रति लीटर के
आस-पास था और इसके अलावा अन्य जरूरी की वस्तुएं समान्य दर से बाजार में लोगों के
लिए उपलब्ध थे इतना हीं नहीं लोगों के जीवन स्तर वैल्यू दिनोंदिन बेहतर होते जा
रहा था।
उस समय पेट्रोल के दाम पर भौंकने वाले नरेंद्र मोदी ज़ी आज जब भारत के प्रधानमंत्री हैं तो इनके काल में पटना में 107 रूपये प्रति लीटर पेट्रोल जनता को मिल रहा है। पेट्रोल के बढ़ते दाम पर पूर्व प्रधानमंत्री को भलाबुरा कहनेवाला मोदी ज़ी से आज तक पेट्रोल का दाम नियन्त्रण नहीं हुआ। यहाँ तक पूर्व प्रधानमंत्री के समय के दामों को सम्भालने में भी हमारे मोदी ज़ी फिसड्डी साबित हुए। आज देश का हालात ये हो गया है कि सभी वस्तुएं के दाम सरकार से अनियंत्रित हो चुकी है एवं देश में महंगाई राक्षस का रूप ले चुकी है जो आम लोगों के जीवन स्तर वैल्यू को दिनोंदिन निगलते जा रही है।

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