अभी हाल में भारत के
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुआ है जिसमें सभी राज्यों में सत्ताधारी
सरकार व इनके समर्थक पार्टी की जीत हुई है। इस जीत के बहुत मायने हो सकते हैं
लेकिन भारतीय मीडिया जीत का जश्न मना रही है चुनाव में हारे हुए पार्टी के नेताओं
से सवाल करके। मीडिया हारे हुए पार्टी से सवाल कर रही है कि आप लोग कैसे हार गए इस
पर मंथन किया जा रहा है और जीती हुए पार्टी के साथ जश्न मनाया जा रहा है। आज के
भारतीय मीडिया का जीता-जगता तस्वीर यहीं हे जिसे लोगों को जरूर देखना चाहिए और इसपर
विचार करनी चाहिए।
इन पांच राज्यों में
कांग्रेस चुनाव लड़ रही थी, जिसे इस जंग का नेता कहा जा सकता है। उतर प्रदेश से
समाजवादी पार्टी चुनाव लड़ रही थी यहाँ अखिलेश यादव को नेता माना जा रहा था और
पंजाब में चरनजीत सिंह चन्नी को मुख्य नेता माना जा रहा था। जनता ने इन लोगों को
सरकार चलाने का मौका नहीं दिया। आख़िर क्यों नहीं दिया, जबकि ये लोग जनता की आवाज
उठा रहे थे, जनता को मदद करना चाहते थे और जुल्मी सरकार से जनता को बचाना चाहते थे
फ़िर भी ये लोग चुनाव हार गए।
इस बात को इस रूप में समझा जा सकता है। भारत की जनता सत्ताधारी सरकार के द्वारा लागू किये गए नोटबंदी से सैंकड़ो लोग मारे गये, जीएसट से छोटे रोजगार वाले तबाह हो गए, कोरोना महामारी में लोगों सरकारी मदद के अभाव में जान दे दी, भूखमरी में भारत अपने पड़ोसी देशों से पिछे हो गया, बेरोजगारी के कारण लोग सड़क पर आंदोलन करने लगे, शिक्षा स्तर को भी गिरा दिया गया, महंगाई से लोगों को जीना दुर्लभ हो गया था। लोग सत्ताधारी सरकार के जुल्म से परेशान हो गए थे और इसके खिलाफ़ जंग छेड़ दिया। जिसको राजनीतिक अधिकार देने के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सामने आयी और इन लोगों के लिए चुनाव लड़ने का हौसला किया। इन पार्टी के नेताओं ने जुल्मी सरकार के खिलाफ़ जंग छेड़ दिया अपने जीवन का परवाह नहीं किया। जब इस धर्म युद्ध में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की हार हो गई तो इनकी हार थोड़े हुई इसमें जनता की हार हुई और एक जुल्मी सरकार की जीत हुई। बस!

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