वर्ष 2014 के पहले
भारत के लोग पढ़-लिखे नेता की इच्छा रखते थे। इस समय लोगों का यह मानना था कि नेता
को भी पढ़ा-लिखा और मानवीय गुणों से भरपूर होना चाहिए। लोग इस मुद्दे पर घंटों
चर्चा करते रहते थकते तक नहीं थे। मीडिया भी इस मुद्दा को लेकर चर्चा करती रहती।
जबकि शुरुआती के समयों में भारत में पढ़े-लिखे लोगों का अभाव था और राजनीतिक में
ऐसे लोगों की भागीदारी जरूरी थी उस समय लोग पढ़-लिखे नेता ख़ोज रहे थे। अब जब ये लोग
पढ़-लिख कर नेता बन गए हैं तब इन नेताओं का तिरस्कार किया जा रहा है | क्यों?
इसका सबसे बड़ा सबूत
है पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 के परिणाम इस कांग्रेस की ओर से पंजाब के
मुख्यमंत्री के उम्मीदवार चरनजीत सिंह चन्नी थे। ये पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलबी
और एमबीए की उच्चस्तरीय शिक्षा ग्रहण किये हैं। इतना हीं नहीं करीब 200 दिनों तक
पंजाब के मुख्यमंत्री भी रहे औऱ इस दरम्यान इन्होंने जो राजनीतिक फैसला लिये उनमें
इनके सभी फैसला लोकतान्त्रिक, आम लोगों के हीत और किसानों के ध्यान में रखकर लिया
गया फैसला रहा। इनका एक भी फैसला ऐसा नहीं रहा जिसे गलत माना जाय।
इतना हीं नहीं जब पंजाब
के किसान कृषि कानून को वापसी को लेकर आंदोलन कर रहे थे, जिसमें 700 किसान मारे गए
थे औऱ इसके बावजूद भी केन्द्र सरकार कृषि कानून को वापसी लेने को तैयार नहीं था
लेकिन जैसे हीं चरनजीत सिंह चन्नी पंजाब के मुख्यमंत्री बने वैसे हीं केन्द्र
सरकार झुकने लगी और अन्त में कृषि कानून को वापसी करने को मजबूर हो गई। ये घटना व फैसला
कहता है कि केन्द्र सरकार के द्वारा कृषि कानून की वापसी लेने का पहला तत्कालिन
कारण चरनजीत सिंह चन्नी का पंजाब के मुख्यमंत्री बनना है और इनके कूटनीतिक निर्णय
को जाता है |
पंजाब विधान सभा चुनाव परिणाम के बाद आख़िर ये सवाल क्यों न पुछा जाय कि एक पढ़े-लिखे व लोकतान्त्रिक नेता के लिए पंजाब के लोगों व किसानों ने वोट क्यों नहीं किया आख़िर कैसे नेता की जरूरत है पंजाब के लोगों व किसानों को ?

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