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हम सब भारत के लोगों को अपनी सरकार से जिसे चुन कर लोगों ने भेजा है उससे सवाल करने का अधिकार है क्या? इस बात को सोचिये !



हम सब भारत के लोग भारत में रहते हैं, इस देश के नागरिक है लेकिन कभी हम सभी ने यह सोचा है कि वर्तमान समय में हम लोगों को अपनी सरकार से जिसे चुन कर हम लोगों ने भेजा है उससे हम सब को सवाल करने का अधिकार है क्या? इस बात को सोचिये ! यदि आप नहीं सोचते हैं और ऐसे सवाल सोचनेवाले को गलत समझते हैं तो इस लेख को पूरा पढ़ने और वीडियो देखने की जरूरत नहीं हैं आप यहीं से बाहर हो जाइये। आप अपना समय बरबाद मत करें और यदि मुझे गलत साबित करना चाहते हैं तब इस लेख को पढ़े आपका बहुत – बहुत स्वागत है।https://youtu.be/F57xiCnRvCs


आज हम सब भारत के लोग भारतवासी नहीं रहे आज हम सब सहनवासी हो चुके हैं देश की सरकार कुछ भी करे हम सब चुप-चाप अपना काम करने में व्यस्त हैं आज रातदिन मजदूर की तरह काम करते लोग या फ़िर उच्च आधिकारिक कुर्सी पर बैठे लोग सब एक जिन्दा लाश की तरह देश के इधर-उधर घूम रहें हैं एक दूसरे पर अपने पावर को प्रयोग कर रहे हैं। भारत का न्यायलय और पुलिस जो भारत के नागरिकों के अधिकारों को रक्षा करने के लिए शपथ लेती है वो भी सरकार से यह नहीं पुछ रही है कि देश में इतने लोगों की जाने जा रही है इसके जिम्मेदार कौन है ?


वर्ष 2002 की घटना है गुजरात के गोधरा रेलवे स्टेशन पर जो कांड किया गया था, जिनमें बहुत सारे लोग जलकर तड़-तड़ कर मारे गए थे उसके बाद गुजरात में हिन्दू और मुस्लिम में तनाव उपन्न हुआ और इसमें लोग मारे गए से गुजरात तड़पता रहा का जिम्मेदार कौन है? गुजरात में हुए ऐसे नरसंहार का जिम्मेदार कौन हैं? किसके कहने पर ऐसा कांड हुआ? किसने इस नरसंहार को होने दिया? किसने सत्ता के बागडोर को ढील कर दिया और लोग एक दूसरे को कत्ल करने का कारण बनते गए।


जिस भारत सरकार ने दो हजार के नोट को लाने के लिए नोटबंदी करने के षड्यंत्र रची, ताकि वोट को आसानी से ख़रीदा जा सके के समय लोग पैसे के अभाव में अस्पताल पर दम तोड़ दिया, बाप बेटी की शादी के बोझ और उपर से नोटबंदी के बोझ के तले दबकर शांत हो गया, बेरोजगार होने के कारण घर नहीं चला सका और अपने जीवन को निहाल कर लिया जैसे घटनाएँ का जिम्मेदार कौन होगा? नोटबंदी में सैंकड़ो लोग रूपये-पैसे के अभाव में तड़पते रहे, मरते रहे और सरकार भारत के इन लोगों के लाश पर चढ़कर भाषण देते रही कि मुझे और समय दे दो .. मुझे और समय दे दो के रचियता कौन हैं?


पिछले लॉक-डाउन में भारत के मजदूर लोगों के लिए व्यवस्था न किये जाने के कारण बहुत सारे मजदूर सड़क पर हीं पैदल प्राण त्याग दिया। जब भारत सरकार ने लॉक-डाउन लागू किया तो मजदूर लोग कुछ दिन इन्तजार करने के बाद अपने घर को आने शुरू कर दिए और जब ये लोग अपने घर को लौटने लगे उस समय गाड़ी बंद कर दी गई थी इतना हीं नहीं इन मजदूरों को खाने के लिए कुछ संसाधन भी नहीं बचे थे और सरकार ने भी हाथ खड़े कर दिए तब ये लोग अपने बूढी माँ, बूढ़े बाप और छोटे-छोटे बच्चों के साथ पैदल हीं अपने घर को लौटने लगे। इस दरम्यान भारत के कई मजदूरों की जाने चली गई के जिम्मेदार कौन है? भारत के न्यायालय व पुलिस को सरकार से ये सवाल नहीं करनी चाहिए?


भारतीय मीडिया के अनुसार भारत में मार्च से मई माह तक एक लाख से ज्यादा लोग कोरोना के इस महामारी में मारे जा चुके हैं। प्रयाग में लोग मृत शारीर को नदी के बालू में दफ़न करके लोग अपने परिवार जनों को अलविदा कह रहे हैं। इसके जिम्मेदार कौन है और इस घटना के जनक कौन हैं? ऐसे लोगों को सरकार चलाने का अधिकार है क्या? इन लोगों को इस्तीफ़ा नहीं देनी चाहिए? इतने नरसंहार के सवाल को लेकर भला कोई सरकार कैसे चला सकता है! यदि ऐसे लोग सत्ता में होंगें तब उस देश के नागरिक अपनी सरकार से सवाल नहीं करेगी वो सिर्फ सरकार के नियमों को पालन करेगी, मतदान करेगी और फ़िर जान देगी और यहीं भारत में हो रहा है।

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