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कोरोना महामारी भारत में बीमारी नहीं बल्कि एक कानून है, जिसके माध्यम से भारत के असहाय लोगों को आर्थिक और मानसिक रूप से शोषण किया जा रहा है।।

      

  विश्व का लोकतांत्रिक देश भारत, कोरोना महामारी के दौर से गुजर रहा है लेकिन यहाँ के प्रशासन के करतूतों ने भारत को ऐसे मुकाम पर ला कर खड़ा कर दिया है जहाँ कोरोना वायरस एक बीमारी नहीं बल्कि एक कानून (जनता को शोषण करनेवाला कोरोना वायरस कानून) का रूप ले लिया है। और इस कोरोना वायरस कानून के माध्यम से भारत की पुलिस ने देश के असहाय, गरीब लोगों, काम के लिए मोटरसाईकिल से घूम रहें लोगों को आर्थिक और मानसिक रूप से शोषण करने का व्यापार व्यापक स्तर पर भारत में शुरू कर दी है। यह काम पिछले साल से लगातार चलते आ रहा है। आपको विश्वास नहीं हो रहा है तो इस रिपोर्ट को पढ़ें सब साफ़ हो जायेगा।https://youtu.be/_imfNQuYuNs

भारत में कोरोना महामारी इतना जोर से फैल चुका है और इतने चरम सीमा को पहुँच चुका है कि आज देश में इस बीमारी से बीमार व्यक्ति के उपचार के लिए मेडिकल instrument जीतने मात्रा में होने चाहिए थे का सूखा पड़ गया है जबकि इस समस्या से बचने के लिए भारत को विदेश से मदद मिला इतना हीं नहीं भारत के लोगों के द्वारा अरबो-खरबों रुपया नरेंद्र मोदी के पीएम फंड में जमा किया वो सब आज कम पड़ गया है।

अब भारत में हालात ये हो गया है कि देश के किसान अपने जमा पूंजी को लगाकर सब्जी की फसल लगाई और आज जब उस फसल को काटकर बाजार तक पहुँचाकर पैसा वापसी करने का समय आया है तो भारत की पुलिस इन किसानों पर लाठी charge यह कहकर कर रही है कि ये लोग हीं देश में कोरोना फैला रहे है। इतना हीं नहीं भारत की पुलिस ठेला से सब्जी बेचकर अपनी जिन्दगी का गुजरबसर करनेवाले ठेला व्यपारी को भी दौड़ा-दौड़ा कर इन्हें लाठी से पिट रही है और इनके रोजगार को बरबाद करने पर अमदा हो चुकी यह कहकर कि ये लोग हीं भारत में कोरोना फ़ैलने के जिम्मेदार है। भारत में आज समय यह हो गया है कि जो लोग एक दिन काम नहीं करेंगें उनके घर में चूल्हा नहीं जलेगा, एक दिन मोटरसाईकिल से घूम-घूम कर आमदनी नहीं करेंगें तो उनके बच्चे का स्कूल से नाम काट दिया जायेगा, उनके परिवार को अब भूखे सोने के नौबत आ चुकी है ऐसे लोगों को भारत की पुलिस इन्हें सड़क पर लाठी से पिट रही है और साथ मने हजार दो हाजर रूपये फ़ाईन भी ले रही है यह कहकर कि ये लोग देश में कोरोना फैला रहा है ।

गौर करनेवाली बात यह है कि जिस समय पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का प्रचार-प्रसार चल रहा था उस समय कोरोना वायरस भारत से खत्म हो चुका था क्या ? नहीं! इस समय भी देश में कोरोना के रफ्तार थमे नहीं थे फ़िर भी भारत के home minister अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में धडल्ले से रोड शो निकला जिसमें बहुत सारे लोग शामिल हुए थे। इनमें कुछ हीं लोग हीं मास्क पहने हुए थे बाकी लोग बगैर मास्क के हीं रोड शो में शामिल हुए थे और यहाँ तक कि स्वयं अमित शाह भी मास्क पहने हुए नहीं थे। जबकि इनके पास के एक व्यक्ति ने मास्क पहन रखा था। भारत के home minister के द्वारा बगैर मास्क का रोड शो निकालना को किस दृष्टिकोण से उचित माना जा सकता है। इसके बावजूद भी किसी भारतीय पुलिस अधिकारी ने इस आदमी के चुनाव प्रचार-प्रसार पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता नहीं समझा। ऐसा हीं हाल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी रहा, इस व्यक्ति ने भी अपने चुनावी प्रचार-प्रसार में कभी मास्क पहनते तो कभी मास्क हाथ में लेकर भाषण देते रहते। इस आदमी को भी भारत के किसी पुलिस अधिकारी ने कभी नहीं टोका लेकिन आज भारत के पुलिस अधिकारी सब्जी वालों, किसानों, रोजीरोटी के तलाश में सड़क पर निकले लोगों को पिट रहा है और इन लोगों पर फ़ाईन भी कर रहा है।

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