क्रिकेट पर एकच्छत्र राज्य करनेवाला
खिलाङी, जिन्होंने अपनी सत्ता बचाने के ख़ातिर बदल दिया कानून को।
भारत में धुरंधर खिलाङियों कि कमी
कभी नहीं रही। हमेशा कोई-न-कोई ऐसे खिलाङी भारत के पीच पर खेलते रहें है, जिसे
हटाना अन्य खिलाङियों के लिए मुश्कील हीं नहीं असंभव भरा कार्य साबित हुआ। इसे
हटाने का बहुत प्रयास किया गया, लेकिन सब गोरख-धाम साबित हुआ।
लोग ऐसे धुरंधर खिलाङी को जितना
हटाने का प्रयास किया गया, वो उतना हीं निखर कर चमके हैं। कुछ खेल खेलनेवाले
खिलाङी होते हैं, तो कुछ सत्ता का खेल खेलनेवाले भी खिलाङी होते है। हम वैसे हि
खिलाङी की बात करने जा रहें है, जिन्होंने खेल नहीं खेला लेकिन खेल पर एकच्छत्र
राज्य कर रहा है।
भारत में बङे हीं रोचक लोग वास करते
हैं जो सत्ता के लिए कुछ भी कर सकते हैं। भारत का गृहमंत्री अमित शाह का एक बेटा
है, जिसका नाम जय शाह है और वह क्रिकेट जगत का बहुत हि पावरफुल आदमी के रूप में
अपने-आप को स्थापित कर चुका है। वह भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सचिव है।
गृहमंत्री अमित शाह का बेटा पिछले कई
सालों से भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) का सचिव बना हुआ है। समय पर सचिव
पद का चुनाव होता है, लेकिन हर-बार गृहमंत्री का बेटा हि सचिव बनता है। यह सत्ता
का असर है, या वो जीत जाते हैं। कुछ भी हो मतलब इससे है कि अमित शाह का बेटा हीं सचिव
बनते है।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड सचिव जय शाह
कोई क्रिकेटर नहीं है। वह एक बीजेपी नेता और भारत के गृहमंत्री का बेटा है। यहीं
वजह है कि ये लम्बे समयों से भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) पर अपना
राज्य स्थापित किये हुए है। इनको कोई हटानेवाला नहीं है। इसे दूसरे शब्दों में
दादागिरी नामकरण कर सकते है। जय शाह क्रिकेट से बहुत पैसा बना लिया है, इतना कि वो
कुछ भी कर सकता है।
इस खिलाङी (जय शाह) को अमर करनेवाली भारतीय
जनता पार्टी (बीजेपी) का भारत पर शासन होना माना जाता है। बिजेपी अपनी सत्ता के
अधिकार का प्रयोग करते हुए- जय शाह को सचिव तो बना हीं देता रहा है, साथ में ख़बर
ये भी है कि क्रिकेट बोर्ड के पूर्व के कुछ नियमों में संशोधन किया गया है, जिसका
फायदा जय शाह को सीधे-सीधे मिल रहा है।

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