जिस देश से रोजाना हजारों की संख्या में महिला गायब होती हों, उस देश की महिलाओं के लिए न्याय की माँग करनी बहुत हिम्मत की बात लगता है।
महिलाएं आज भारत में सुरक्षित हैं,
ये कहना मुश्किल भरा सवाल है। कुछ सालों पीछे होकर या नरेंद्र मोदी के शासन में भारत के महिलाओं पर नज़र दौङाएं,
तो एक चीज बहुत देखने को मिलता है कि हमारे देश के महिलाओं के साथ न्याय नहीं हो
रहा है। और यह वाक्या सरकार के लोग ज्यादा किये हैं, हमारे देश के महिला के साथ।
एक बात और गौर करनेवाली है कि इस
सरकार के लोगों ने देश के महिला के साथ यौन हिंसा के वारदात ज्यादा किये हैं। इसे
दूसरे तरह से एसे समझा जा सकता है कि देश के महिलाओं के साथ यौन-हिंसा के वारदात जो
हुए हैं, उनमें ज्यादातर सरकार के लोग हीं शामिल हैं।
भारत की यह ख़बर महिलाओं के लिए सचेत कर चलनेवाली ये है कि जो महिलाएं इस सरकार के लोगों के विरोध में यौन-हिंसा का मामला लेकर न्यायालय गईं, उन्हें औंधे मूँह वापस घर को लौटना पङा है। इसका सबसे बङा उदाहरण महिला पहलवान लोग हैं, जो बीजेपी सांसद के विरोध में यौन- हिंसा मामला लेकर पहले पीएम के पास गईं, पुलिस के पास गई और न्यायालय के पास गईं कुछ नहीं मिला।
और फिर ये महिलाएं अपने अस्मिता बचाने के लिए आंदोलन कीं। ये पहलवान महिलाएं अपने साथ हुए यौन-हिंसा को लेकर भारत कि राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन की। लेकिन, यहाँ ये लोग सिर्फ पुलिस की लाठियाँ से पिटी गईं और फिर समय देखकर इन्हें पुलिस खदेङ दी।
अब ये लोग यौन-हिंसा का घूंट पीकर इन्हें इनके साथ यौन-हिंसा करनेवालों के अन्दर हीं काम करना पङ रहा है।
ये घटना बताता है कि वर्तमान भारत के
सरकार के शासन में महिला बहुत ज्यादा असुरक्षित हैं। इनके साथ कभी भी-कुछ भी हो सकता
है। और महिलाओं के साथ जो यौन-हिंसा करता है, वो सरकार के आदमी हीं ज्यादातर होते हैं। जिन्हे कानून
भी कुछ नहीं कर सकता। ये लोग कानून को जेब में लेकर घुमते हैं। महिलाओँ की ये स्थिति
भारत में रह गई है।
एनसीआरबी ने रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2019 से वर्ष 2021 के बीच में लगभग 13 लाख महिलाएं देश से लापता हो गईं हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत से प्रत्येक दिन 1187-88 महिलाएं भारत से गायब हुई हैं। अब सोचनेवाली बात ये है कि जिस देश से रोजाना हजारों से ऊपर की संख्या में महिलएं गायब होंगी, उस देश के महिलओं के साथ न्याय की बात करनी तर्कसंगत होगा क्या!
जिस देश से रोजाना हजारों की संख्या में महिला गायब होती हों, उस देश की महिलाओं के लिए न्याय की चर्चा करनी कितना हिम्मत होगी और इनके लिए न्याय की लङाई लङनी कितनी कठीन कार्य होगा। सोच कर शरीर के बाल खङे हो जाते हैं। ये महिलाएं औऱ उन्हें साथ देनेवाले उनके परिवार के लोग हीं बता सकते हैं। वाकई ये महिलाएं सलाम करने के हकदार हैं। इन महिलाओं को दिल से सलाम!

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