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India'S scientific poltice era की समाप्ति का जश्न।।

यह मान लिया जाय कि भारत में विज्ञानवादी सोच रखनेवाली राजनीति का युग को समाप्त होने का समय आ गया है और भाषण युक्त राजनीति की शुरुआत हो चुकी है। ऐसी राजनीति का नींव रख दिया गया है, जिसमें कुछ वैज्ञानिक फैसले लेने के बजाय लोगों को उटपटांग हरकते करने का निर्देश दिया जाना को बेहतर समझा जाने लगे। पंडित जवाहरलाल नेहरु, लालबहादुर शास्त्री, इंदरा गाँधी, राजीव गाँधी, अटल बिहारी वाजपेयी ज़ी और एपीजी अब्दुल कलाम जैसे वैज्ञानिक सोच रखनेवाले नेताओं के संस्कार तथा उनके द्वारा भारत को इस सोच से सींचने वाले नेताओं के युग को भुला दिया जाय और अंधविश्वास युक्त युग में कदम रख दिया जाय।

सरकार के आदेश का पालन करना हमारा कर्तव्य: हम सब भारतीयों का यह कर्तव्य है कि अपने देश के सरकार का हरेक फैसला को मानना चाहिए उस वक्त इस बात को और ख्याल रखना होगा जब सरकार को जनता की जरूरत हो। वर्तमान समय में भारत के लोग क्या पूरी दुनिया कोरोना वायरस से भयभीत व पीड़ित है, जिसमें सरकार का निर्देश का पालन हीं इस महामारी से छुटकारा दिला सकता है। इसलिए आज पूरा विश्व समुदाय अपने नागरिकों को अपने घरों में रहने का निर्देश दिया है, जिसका लोग पालन कर रहें है। भारत के लोग भी इस निर्देश का पालन कर रहें हैं और आगे भी सरकार का निर्देशों को हमे मिलजुलकर पालन करना है ताकि कोरोना को हराने में सरकार की सुविधा हो।

भारत का अंधविश्वास से भरा निर्देश: क्या भारत के वर्तमान सरकार ने कोरोना को हराने के लिए अपनी जनता को जो निर्देश दिए हैं वो वैज्ञानिक सोच रखने में समर्थ है? सरकार का उद्देश्य भले हीं अच्छा हो पर इस बात से इसकी पुष्टि हो जाती है कि जो देश कोरोना जैसे महामारी से ग्रसित हो वहां के लोगों को थाली बजाने व रात्रि में घर के लाइट्स बन्द करके मोमबती, मोबाइल, दीया तथा पटाखे फोड़कर देश को रौशन करना चाहिए वाला फैसला वैज्ञानिक नहीं हो सकता। 

भले हीं यह निर्णय एक राजनीतिक दिग्गज नेता के द्वारा लिया गया हो जो पूरे भारत को एक करना चाहता हो। इस लड़ाई में सबको जागरूक करना चाहता हो। जिसका पूरा भारत का समर्थन प्राप्त हो का निर्णय इसलिए लिया गया हो कि देश को एक करना है इसकी जरूरत है लेकिन इस सोच के साथ एक नये और वैज्ञानिक भारत का निर्माण करना असम्भव हीं नहीं टेढ़ी खीर साबित होनेवाला है। इसके दूरगामी परिणाम अंधविश्वास से सना होगा।

सरकार जनता को यह भी निर्देश दे सकती थी: हमारी सरकार देश में एकता व अपनी लोकप्रियता की ताकत इस रूप में भी दिखा सकती थी, जिसकी जनता को भी जरूरत था जिसके बगैर जनता अपनेआप को हरा चुकी है, अन्दर से नेतृत्वविहीन समझ बैठी है। भारत सरकार घंटी बजाने व मोमबती जलाने के स्थान पर अपने जनता को एक साथ मास्क पहनने को कहकर एकता का परिचय लोगों को दिला सकती थी। अपने आवाम को यह निर्देश दे सकती थी कि आज रात नौ बजे सभी अपने घरों में रहकर अपने व अपने परिवार के सभी सदस्यों के हाँथ को  एक अच्छे हैण्डवाश से धोने है। 

हमारी सरकार के निर्णय कुछ भी हो सकता है, जिसको हम सब भारतीयों को सिर्फ अपने सरकार के फैसलों को पालन करना है। यह हमलोगों का मौलिक कर्तव्य है। लेकिन इसके साथ हमारी सरकार को भी इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि उनका निर्णय वैज्ञानिक हो, जिससे देश विज्ञान की ओर अग्रसर हो, अंधविश्वास से दूर भागे और अपने बच्चों को विज्ञान पढ़ाये।

     

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