Skip to main content

Tabligi Jamat people से हुई गलती का बवंडर।।



भारत की राजधानी दिल्ली का निजामुद्दीन तबलीगी जमात उस समय चर्चा का विषय बन गया या विवादों में आया जब इसके सदस्य Corona Virus से संक्रमित पाये गये। जिससे देश की मुश्किलें पहले के अपेक्षा और बढ़ गई। भारत के समाचार पत्रों पर भरोंसा किया जाय तो आज दिल्ली में कोरोना वायरस से संक्रमित जीतने मामले हैं उनमें से आधा लोग जमात से संबन्ध रखनेवाले हैं। देश में जितना इसका बवंडर उड़ा उतने की जरूरत तो नहीं थी। lock-down के दरम्यान ऐसे संगठन का आयोजना पर सरकार के पैनी नजर जमाने के लिए यह घटना आँखें खोलने का काम किया, जिनमें भारत सरकार को बहुत हद तक सफलता भी मिला। इसपर ज्यादा गंभीर सवाल इसलिए नहीं उठाये जा सकते क्योंकि यह आयोजन चोरी-छुपे नहीं किया गया। इसमें शामिल होनेवाले सदस्य भारत के हीं नहीं बल्कि दुनिया के लोग जमात में शरीक हुए थे जिसका इजाजत भारत सरकार ने वीजा-पासपोर्ट के माध्यम से दे दिया था फ़िर इसे किस आधार गलत ठहराया जा सकता है ईमानदारी से देखें तो यदि किसी का गलती है तो हमारी सरकार की है जिसने इन्हें अनुमती दी।

दिल्ली का निजामुद्दीन तबलीगी जमात भारत में कोरोना फ़ैलाने के उद्देश्य से जमा नहीं हुआ था इस बात की पुष्टि ऐसे होती है कि इन लोगों यह आयोजन दुनिया के देश में बहुत पहले हीं चलता आ रहा है  जिसका प्रत्येक वर्ष लोग इसका आयोजन करते हैं। यह मुस्लिम समुदाय के लोगों का धार्मिक आयोजन है जो अपने धर्म को बचाने व विकास पर काम कर रहे हैं जैसे भारत के लोग ने अपने-अपने धर्म के बचाने के खातिर ऐसे रक्षक लोगों को लोकतंत्र का सत्ता भी सौंप देते है वैसे हीं यह भी एक संगठन है। निजामुद्दीन तबलीगी जमात मरकज को इस तरह से भी समझा जा सकता। मुस्लिम समुदाय में तबलीगी उन्हें कहा जाता है जो अल्लाह के मुख से निकली बात को अल्लाह के वन्दे को सुनाता फिरता हो, जमात का अर्थ समूह होता है और मरकज स्थान को कहते हैं जहाँ ये सब कार्यक्रम चलता है।

इस जमात का आयोजन 13 मार्च से 15 मार्च तक भारत की राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन में चला था, जिसमें भारत के कोने-कोने से मुस्लिम समुदाय के लोग शरीक हुए थे। विदेशी नागरिक भी इस आयोजन का हिस्सा रहे। भारत के मुख्य रूप से दिल्ली, उतर प्रदेश, बिहार, जम्मू कश्मीर, दक्षिण भारत के राज्य, उतर भारत, पूर्वी भारत तथा पश्चमी भारत के लोग इस मरकज में तबलीगी का बात सुनने को आये थे। विदेश से आनेवाले में अमेरिका, ब्रिटेन, किर्गिस्तान, सऊदी अरब, छह चीनी, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और फ़्रांस के लोग शिरकत करने भारत आये थे जिनकी संख्या नो सौ के आसपास बतायी जा रही है।

चीन से छह लोग तबलीगी जमात में भाग लेने की लिए भारत आये थे। अब यहाँ सवाल भारत सरकार से उठाना चाहिए कि जिस देश में पहले से हीं corona lock-down लागू हो उस देश के नागरिक को भारत में प्रवेश करने की अनुमती किस आधार पर दे दिया गया। लेकिन यह सवाल भारतीय मीडिया में कभी किसी से नहीं पुछा गया और न हीं चर्चा का विषय रहा। यदि भारत में चर्चा का विषय बना तो यह बना कि तबलीगी जमात के लोग भारत में corona virus फ़ैलाने का काम कर रहें हैं। यह समाचार भारतीय मीडिया में इतना चलाया गया कि यह समचार भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में इस रूप में पहुंचा कि मुस्लिम लोग भारत में corona virus फैला रहें हैं। भारतीय हिन्दुओं को मुस्लिम के प्रति corona virus को लेकर बिल्कुल गलत और बेबुनियाद भ्रांतियां फैल चुका है जिसे किसी आधार से सही नहीं ठहराया जा सकता है।

यदि ईमानदारी से देखा जाय तो निजामुद्दीन मरकज से भारत में जितना corona virus फैला है, उन सभी की जिम्मेदारी भारत सरकार के प्रशासन विभाग को लेना चाहिए क्योंकि भारत सरकार के लोगों ने तबलीगी लोगों को दिल्ली में उस समय जमात करने की अनुमती दी जिस समय दुनिया में कोरोना वायरस अपना पैर जमा चुका था। बहुत सारे देश lock-down में चले गए थे। भारत में भी मामले आने शुरू हो गए थे। निजामुद्दीन मरकज में शामिल विदेशी, घुसपैठी बनकर भारत में दाखिल नहीं हुए हैं बल्कि उनके पास पासपोर्ट और वीजा है जिसको भारत सरकार के अधिकारी अनुमती देती है यह छोटी-मोटी बात नहीं है। अब भारत के अधिकारी विदेशी तबलीगी को पहचान कर लिया है और इन्हें ब्लैक सूची में डालने का काम बहुत हीं मुस्तैदी से कर रहें। अब इस मामला को इन अधिकारियों ने सुलझा लिया है जिससे कहा जाना चाहिए की खबर अच्छी है।   

     

Comments

Popular posts from this blog

एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इस एक बात का ख्याल अवश्य रखना चाहिए।

एक सेल्स मैन को ये काम अवश्य करनी चाहिए, यदि आप एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इस एक बात  का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। एक सेल्स मैन को ये काम अवश्य करनी चाहिए। यदि आप एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इन बातों का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। हम कोई भी काम करते हैं उसकी योजना अवश्य तैयार करते हैं। एक छोटा सा छोटा काम के लिए भी हम योजना बनाते हैं। हलांकि छोटे कामों के लिए बनाये गए योजना हमारा दिमाग को पता नहीं चलता। हमारे दिमाग को इसके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसपर कभी आपने सोचा है कि आख़िर ऐसा क्यों होता है ? इसकी वजह को हमे जानने का प्रयास अवश्य करनी चाहिए। ऐसे तो इसके अनेकों वजह हो सकते हैं और इसके मनोवैज्ञानिक कारण भी कई हो सकते हैं, लेकिन हमे इन भारी वजहों को छोड़कर एक सरल वजह की तलाश करने की जरूरत है। मेरे अनुसार सरल स्वभाव से इसका एक वजह यह भी हो सकता है कि हमारा दिमाग इन छोटे-छोटे कामों को पहले कई बार कर चुका होता है। यूं कहें इस काम को मेरा दिमाग पूर्ण रूप से अभ्यस्त हो गया होता है। इसलिए हमारा दिमाग को इस छोटा काम को पूरा करने में किसी प्रकार की परेश...

एक कप चाय, मिट्टी वाली में - चाय को पीने में जो मजा है, वो मजा सात समन्दर पार जाकर भी नहीं वो कैसे !

एक कप चाय से याद आया कि मिट्टी के बर्तन वाली चाय को पीने में जो मजा है, वो मजा सात समन्दर पार जाकर एक प्रेमी को अपने प्रेमिका या एक प्रेमिका को अपने प्रेमी से मिलने में भी नहीं होगा! लेकिन वो मजा इस चाय पीने में आपको मिलेगा।  आप महिला हों या पुरुष यदि आप अपने जीवन में, प्रेम में प्रवाहित होने के आनंद से वंचित रह गाएं हैं तो हमारी मानिये एक बार इस चाय के प्रेम में बह जाइये, डूब जाइये और इसके गर्माहट में गोते लगा लीजिये! इसके मंद-मंद सुगंध में अपने नाक के दोनों सुराग को झोंक दीजिये। लेकिन एक बात का ख्याल रखियेगा,   इस चाय को पीने में कभी जल्दीबाजी नहीं कीजियेगा। नहीं तो, आपका जीभ आपसे नाराज हो जायेगा। बेमतलब के आप बेचारा स्वभाव से कोमल जीभ को रुखा कर दीजियेगा। यदि आपको विश्वास नहीं होता, तो एक बार मिट्टी वाला चुक्का में परोसी गई चाय को अपने होंठ से लगाकर और चाय को जीभ पर गिराकर तो देखिये! जैसे हीं, यह चाय आपके जीभ को स्पर्श करेगी वैसे हीं आप स्वयं इसके स्वाद से परिचित हो जाएंगें। हमारी मानिये तो आज हीं आप नुक्कड़ वाली एक कप चाय का मज़ा ले लीजिये। भारत आधुनीकता की ओर कदम बढ़ा च...

राहुल गांधी ने 'एल्फिंस्टन' (Elphinstone) फाइल का जिक्र करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को घेरा। सदन में भारी हंगामा।।

राहुल गांधी ने 'एल्फिंस्टन' (Elphinstone) फाइल का जिक्र करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को घेरा। सदन में भारी हंगामा।। राहुल गांधी ने संसद में जिस 'एल्फिंस्टन' (Elphinstone) फाइल या संदर्भ का जिक्र किया, वह सीधा हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की कार्यशैली पर था। गांधी ने सदन में एक पुरानी फाइल या रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह तर्क देने की कोशिश की कि सरकार कुछ खास उद्योगपतियों (अडानी-अंबानी) को फायदा पहुँचाने के लिए नियमों में बदलाव करती है। उन्होंने 'एल्फिंस्टन' नाम का जिक्र उन ऐतिहासिक नियमों या व्यवस्थाओं के संदर्भ में किया जो मुंबई के बंदरगाहों या रेलवे के बुनियादी ढांचे से जुड़ी थीं। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को घेरते हुए निम्नलिखित बातें कहीं: ​नियमों में बदलाव: उनका आरोप था कि सरकार ने पुराने नियमों (जिनका उन्होंने एल्फिंस्टन संदर्भ से जोड़ा) को दरकिनार कर दिया ताकि एयरपोर्ट्स और पोर्ट्स का नियंत्रण कुछ विशेष व्यापारिक समूहों को दिया जा सके। ​अडाणी समूह का जिक्र: उन्होंने दावा किया कि पहले नियम था कि जिसे एयरपोर्ट संचालन का अनुभव नहीं है, उसे टेंडर नहीं म...