दिल्ली का निजामुद्दीन तबलीगी जमात भारत में कोरोना फ़ैलाने के उद्देश्य से जमा नहीं हुआ था इस बात की पुष्टि ऐसे होती है कि इन लोगों यह आयोजन दुनिया के देश में बहुत पहले हीं चलता आ रहा है जिसका प्रत्येक वर्ष लोग इसका आयोजन करते हैं। यह मुस्लिम समुदाय के लोगों का धार्मिक आयोजन है जो अपने धर्म को बचाने व विकास पर काम कर रहे हैं जैसे भारत के लोग ने अपने-अपने धर्म के बचाने के खातिर ऐसे रक्षक लोगों को लोकतंत्र का सत्ता भी सौंप देते है वैसे हीं यह भी एक संगठन है। निजामुद्दीन तबलीगी जमात मरकज को इस तरह से भी समझा जा सकता। मुस्लिम समुदाय में तबलीगी उन्हें कहा जाता है जो अल्लाह के मुख से निकली बात को अल्लाह के वन्दे को सुनाता फिरता हो, जमात का अर्थ समूह होता है और मरकज स्थान को कहते हैं जहाँ ये सब कार्यक्रम चलता है।
इस जमात का आयोजन 13 मार्च से 15 मार्च तक भारत की राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन में चला था, जिसमें भारत के कोने-कोने से मुस्लिम समुदाय के लोग शरीक हुए थे। विदेशी नागरिक भी इस आयोजन का हिस्सा रहे। भारत के मुख्य रूप से दिल्ली, उतर प्रदेश, बिहार, जम्मू कश्मीर, दक्षिण भारत के राज्य, उतर भारत, पूर्वी भारत तथा पश्चमी भारत के लोग इस मरकज में तबलीगी का बात सुनने को आये थे। विदेश से आनेवाले में अमेरिका, ब्रिटेन, किर्गिस्तान, सऊदी अरब, छह चीनी, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और फ़्रांस के लोग शिरकत करने भारत आये थे जिनकी संख्या नो सौ के आसपास बतायी जा रही है।
चीन से छह लोग तबलीगी जमात में भाग लेने की लिए भारत आये थे। अब यहाँ सवाल भारत सरकार से उठाना चाहिए कि जिस देश में पहले से हीं corona lock-down लागू हो उस देश के नागरिक को भारत में प्रवेश करने की अनुमती किस आधार पर दे दिया गया। लेकिन यह सवाल भारतीय मीडिया में कभी किसी से नहीं पुछा गया और न हीं चर्चा का विषय रहा। यदि भारत में चर्चा का विषय बना तो यह बना कि तबलीगी जमात के लोग भारत में corona virus फ़ैलाने का काम कर रहें हैं। यह समाचार भारतीय मीडिया में इतना चलाया गया कि यह समचार भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में इस रूप में पहुंचा कि मुस्लिम लोग भारत में corona virus फैला रहें हैं। भारतीय हिन्दुओं को मुस्लिम के प्रति corona virus को लेकर बिल्कुल गलत और बेबुनियाद भ्रांतियां फैल चुका है जिसे किसी आधार से सही नहीं ठहराया जा सकता है।
यदि ईमानदारी से देखा जाय तो निजामुद्दीन मरकज से भारत में जितना corona virus फैला है, उन सभी की जिम्मेदारी भारत सरकार के प्रशासन विभाग को लेना चाहिए क्योंकि भारत सरकार के लोगों ने तबलीगी लोगों को दिल्ली में उस समय जमात करने की अनुमती दी जिस समय दुनिया में कोरोना वायरस अपना पैर जमा चुका था। बहुत सारे देश lock-down में चले गए थे। भारत में भी मामले आने शुरू हो गए थे। निजामुद्दीन मरकज में शामिल विदेशी, घुसपैठी बनकर भारत में दाखिल नहीं हुए हैं बल्कि उनके पास पासपोर्ट और वीजा है जिसको भारत सरकार के अधिकारी अनुमती देती है यह छोटी-मोटी बात नहीं है। अब भारत के अधिकारी विदेशी तबलीगी को पहचान कर लिया है और इन्हें ब्लैक सूची में डालने का काम बहुत हीं मुस्तैदी से कर रहें। अब इस मामला को इन अधिकारियों ने सुलझा लिया है जिससे कहा जाना चाहिए की खबर अच्छी है।

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