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जातीय जनगणना से सामज का उचित और न्यायपूर्ण विकास संभव है-लालू प्रसाद यादव।।

बगैर जातीय जनगणना के सामज का उचित और न्यायपूर्ण विकास संभव नहीं है-लालू प्रसाद यादव।।


बिहार सरकार जानगणना कारकर, उसे सार्वजनिक भी कर दी। इस जनगणना में जातीय जनगणना भी करायी गई। आरजेडी नेतृत्व वाली बिहार सरकार का चुनावी एजेंडा था कि सरकार बनते हीं जातीय जनगणना कराएंगे और उसे फिर सार्वजनिक करके उसके अनुसार समाजिक और आर्थिक विकास की नीतियां बनाई जाएगी।


बिहार के इस जातिय जनगणना में 84 प्रतिशत से अधिक लोग पिछङे, अतिपिछङे, एससी और एसटी समाज के रहनेवाले हैं। इनमें 64 प्रतिशत लोग पिछङे और अतिपिछङे समाज से संबंध रखनेवाले लोग बिहार में रहते हैं। 20 प्रतिशत लोग एससी और एसटी समाज के लोग हैं।


बिहार राज्य में जातियों की संख्या पर नजर डाली जाय तो बिहार में अब्बल स्थान यादव समाज के लोग हैं। यादव समाज के लोग बिहार के कुल आबादी का 14 प्रतिशत से ज्यादा हैं। यह समाज बिहार के पिछङे कटेग्री में आते हैं। बिहार में इस साज के लोग बहुत हीं जातीय संघर्ष का सामना किया है।


बिहार के यादव समाज का नेता लालू प्रसाद यादव जी को माना जाता है। लालू प्रसाद यादव बिहार के ऐसे नेता हैं, जो पिछङे, अतिपिछङे और समाज के सबसे नीचले पायदान पर समाज के वंचित लोग के अधिकार के लिए बिहार राज्य के सङकों पर आंदोलन तो किये हिं साथ में देश के उच्च पद पर बैठने के बाद भी इस लङाई को जारी रखने का काम बराबर करते रहे।


इसलिए आज लालू प्रसाद यादव जी को बिहार का मसिहा के नाम से बुलाया जाता है। लालू प्रसाद यादव इस लङाई में जेल तक गए लेकिन अपनी लङाई को कभी कमजोर होने नहीं दिया और आज तक वह समाज वंचित लोग के लिए लङाई लङ रहें हैं। बिहार के इस जनगणना का लालू प्रसाद यादव को हीं जाता है। इनका मानना है कि बगैर जातीय जनगणना के सामज का उचित और न्यायपूर्ण विकास संभव नहीं है।बिहार में सामाजिक और आर्थिक नीतियां इसी से तैय होंगी-आरजेडी।

 

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