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एक युग का अंत: कला और सामाजिक सरोकार के बेमिसाल प्रतीक नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि

एक युग का अंत: कला और सामाजिक सरोकार के बेमिसाल प्रतीक नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि भारतीय सिनेमा और रंगमंच के इतिहास में कुछ ही कलाकार ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल उनकी अदाकारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे अपने बेबाक व्यक्तित्व और समाज सेवा के माध्यम से जन-जन के दिल में अमिट छाप छोड़ जाते हैं। पद्म श्री और तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर (75 वर्ष) का 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा पड़ने) के कारण आकस्मिक निधन हो गया। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर (CPR) देकर उन्हें बचाने का अंतिम प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। राजकीय सम्मान के साथ पुणे स्थित उनके फार्महाउस पर अंतिम संस्कार संपन्न किया गया। नाना पाटेकर का जाना केवल मनोरंजन जगत की क्षति नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे अध्याय का अंत है जिसने सिनेमा को यथार्थ, सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ा। 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'तिरंगा', 'प्रहार' और '...

संपादकीय: वनडे क्रिकेट में 200 विकेट पूरे किए स्पिन का जादूगर कुलदीप यादव ने शेन वॉर्न की यादें ताजा कर दीं

संपादकीय: वनडे क्रिकेट में  200 विकेट पूरे किए स्पिन का जादूगर कुलदीप यादव ने शेन वॉर्न की यादें ताजा कर दीं क्रिकेट की दुनिया में जब भी लेग स्पिन का जिक्र होता है, तो आंखों के सामने ऑस्ट्रेलिया के महान स्पिनर स्व. शेन वॉर्न का चेहरा अपने आप घूम जाता है। हवा में गेंद को तैराना, पिच पर पड़ते ही उसे अप्रत्याशित मोड़ देना और बल्लेबाज को पूरी तरह भ्रमित कर देना—यह कला वॉर्न के नाम के साथ अमर हो चुकी है। लेकिन जब भारतीय टीम का एक युवा चाइनामैन गेंदबाज 22 यार्ड की पट्टी पर उतरता है, तो लगता है मानो वॉर्न का वही दौर एक नए अंदाज में लौट आया है। हम बात कर रहे हैं कुलदीप यादव की, जिन्होंने अपनी फिरकी से क्रिकेट प्रेमियों को बार-बार वॉर्न की जादुई रातों की याद दिलाई है। अगर समय की सुई को थोड़ा पीछे घुमाएं और दोनों दिग्गजों के शुरुआती सफर पर नजर डालें, तो आंकड़ों का सफर बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ा दिखता है। 122 वनडे मुकाबलों के बाद अगर आंकड़ों के तराजू पर तौला जाए, तो कुलदीप यादव, शेन वॉर्न के इतने करीब आकर खड़े हो जाते हैं कि दोनों के बीच फर्क कर पाना मुश्किल हो जाता है। जहाँ ऑस्ट्रेलिया के जाद...

संपादकीय: राष्ट्रीयता का आवरण और क्षेत्रीयता का सच—किस राह पर है कांग्रेस?

संपादकीय: राष्ट्रीयता का आवरण और क्षेत्रीयता का सच—किस राह पर है कांग्रेस? भारतीय राजनीति के वर्तमान परिदृश्य में देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी—भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस—एक विचित्र और गभीर विरोधाभास के दौर से गुजर रही है। एक तरफ जहाँ कागजों, इतिहास और कॉरपोरेट चंदे के आंकड़ों में कांग्रेस आज भी देश की मुख्य विपक्षी ताकत नजर आती है, वहीं दूसरी ओर चुनावी परिणामों और जमीनी जनाधार के तराजू पर तौलने पर उसकी स्थिति किसी क्षेत्रीय दल से अलग नजर नहीं आती। 'राष्ट्रीय दल' का आवरण और 'क्षेत्रीय क्षमता' का सच—यही आज की कांग्रेस की सबसे बड़ी त्रासदी बन चुका है। संसाधनों में राष्ट्रीय, नतीजों में सीमित चुनावी चंदे और वित्तीय संसाधनों के आंकड़ों को देखें तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बाद कॉर्पोरेट जगत और इलेक्टोरल बॉन्ड/ट्रस्ट्स से सबसे ज्यादा फंड हासिल करने वाली पार्टी कांग्रेस ही है। संसद के भीतर मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हो या राष्ट्रीय मीडिया में बहस का केंद्र बिंदु बनना, कांग्रेस आज भी अपनी पुरानी सत्ता के प्रभाव और अखिल भारतीय नेटवर्क के दम पर राष्ट्रीय विकल्प होने का दा...

“पीएम ने दोहराया बयान और बताया, 'दिमागी नक्सल' को लाल किला से होम्योपैथी की पहली गोली दी थी।”

पीएम ने दोहराया बयान और बताया,  ' दिमागी नक्सल ' को लाल किला से होम्योपैथी की पहली गोली दी थी। “मैंने लाल किले से जैसे ही दिमागी नक्सल वाली होम्योपैथी की गोली दी , सारे दिमागी नक्सल निकल कर बाहर आने लगे , और जो लोग दिमागी नक्सल को बढ़ावा दे रहे हैं , अब जनता उनका भी असली रंग देख रही है।-माननीय प्रधानमंत्री।” पीएम नरेंद्र मोदी का यह बयना उन युवायों के सामने दिया गया जो आगे चलकर कुछ हिं दिनों में देश के मुख्य धारा अगली पंक्ति का नेतृत्व करने वाले हैं। इस बयान के कई मायने हैं।  पहला कि यह बयान पीएम ने स्वतंत्रता दिवस के दिन दिया था। दूसरा कि लाल किला से दिया था। तीसरा, लाल किला ऐसा स्थल है, जहाँ से सिर्फ शांति फैलाया जाता है। यहाँ से किसी वर्ग पर राजनीतिक प्रहार नहीं कर सकते। भारत के अन्य प्रधान मंत्री मोदी जैसा बयान दिया होगा , लेकिन भारत का एक ऐसा पीएम हुए डॉक्टर मनमोहन सिंह जी , जिसने लाल किला से ऐसा भाषण नहीं दिया और उसके बाद उस बयान को फिर दोहराया नहीं। भारतीय राजनीति और सार्वजनिक विमर्श में शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं के बयानों का अपना एक विशेष महत्व और वजन होता है। हाल...

JPNIC विवाद पर अखिलेश यादव का तीखा हमला: 'निर्माता नहीं, केवल बेचने वाली सोच है भाजपा'

"JPNIC विवाद पर अखिलेश यादव का तीखा हमला: 'निर्माता नहीं, केवल बेचने वाली सोच है भाजपा" लखनऊ/उत्तर प्रदेश/N5: ​उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर विकास, जन-विरासत और सियासी सोच को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार पर बेहद कड़ा और भावनात्मक हमला बोला है। सोशल मीडिया के जरिए सरकार की प्राथमिकताओं और नीतियो पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव ने साफ कहा कि सत्ता में बैठे लोग जन-हित की भव्य संरचनाओं को बनाने का हौसला नहीं रखते, वे सिर्फ बनी-बनाई विरासतों का सौदा करना जानते हैं। सपा प्रमुख ने अपने आधिकारिक बयान में तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि भाजपा JPNIC जैसी अद्भुत और ऐतिहासिक सिग्नेचर बिल्डिंग्स का निर्माण करना तो दूर, उसके बारे में सोच भी नहीं सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और संकीर्ण मानसिकता ने सत्ताधारियों की दृष्टि को कुंठित कर दिया है। जब कोई सरकार जन-हित के लिए बड़ा विजन नहीं रख पाती, तब ...

जब मासूमियत भी व्यवस्था के दावों की पोल खोल दे।छह साल के बच्चा का सरकार पर आक्रोश।.

जब मासूमियत भी व्यवस्था के दावों की पोल खोल दे- छह साल के बच्चा का सरकार पर आक्रोश।। छह साल के इस बच्चा का सरकार पर जो आक्रोश था वो सरकार पर सवाल खङा करता है। नीतीश कुमार के बीस सालों के शासन को चुनौती देता है। ये घटना बता रही है कि सरकार पिछले बीस साल में सिर्फ राजनीतिक की है। शिक्षा और इसके सुधार को लेकर सिर्फ खाना-पूर्ति का काम की है। जिसे अब शिक्षित लोग समझ चुके हैं। बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और रोजगार की अनिश्चितता के बीच सड़कों पर उतरा आक्रोश अब केवल नौजवानों तक सीमित नहीं रह गया है। हाल ही में 6 साल के एक बच्चे द्वारा शासन-प्रशासन के खिलाफ मुखर होकर पोस्टर थामना और उस पर पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया , राज्य के मौजूदा ढांचे की संवेदन हीनता और विफलताओं का आईना है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में खिलौने और किताबें होनी चाहिए , उस उम्र में यदि एक बच्चा सरकार के खिलाफ सड़कों पर खड़ा होकर व्यवस्था को उखाड़ने की बात कहे , तो यह किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के दो दशकों के दावों पर सीधा कुठाराघात है। नीतीश मॉडल और बीस सालों का हिसाब पिछले दो दशकों से बिहार में ' सुशा...

पीडीएस विक्रेताओं का दर्द: व्यवस्था की उपेक्षा और वादों का जाल।।

पीडीएस विक्रेताओं का दर्द: व्यवस्था की उपेक्षा और वादों का जाल।। पटना के गर्दनीबाग में जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं ( PDS) की आठ सूत्री मांगों को लेकर आयोजित राज्यस्तरीय विशाल धरना-प्रदर्शन को बिहार नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने संबोधित कर अपना और पार्टी का समर्थन दे दिया है। बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा पटना के गर्दनीबाग में जन वितरण प्रणाली ( PDS) विक्रेताओं के राज्यस्तरीय विशाल धरना-प्रदर्शन में शामिल होना और उनकी मांगों का पुरजोर समर्थन करना , राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर एक बड़ा बहस छेङ दिया है। फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन के बैनर तले अपनी आठ सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन रत ये विक्रेता केवल अपने अधिकारों की लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं , बल्कि उस सार्वजनिक वितरण प्रणाली की बदहाली को उजागर कर रहे हैं जो राज्य के करोड़ों गरीब और वंचित परिवारों के जीवन का आधार है। रिकॉर्डतोड़ महंगाई , व्याप्त संगठित भ्रष्टाचार और सरकारी उपेक्षा की मार झेल रहे इन राशन डीलरों का आक्रोश अब राजधानी पटना की सङक पर आ चुका है। जन वितरण प्रणाली ( PDS) विक्रेताओं का राज...

संपादकीय: मुफ़्त कोचिंग का वादा — राहत की पहल या जनाक्रोश को शांत करने का राजनीतिक पैंतरा?

संपादकीय: मुफ़्त कोचिंग का वादा — राहत की पहल या जनाक्रोश को शांत करने का राजनीतिक पैंतरा? ​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मध्यवर्ग और छात्रों के लिए मुफ़्त ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क तैयार करने की घोषणा ने देश भर के राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। जहाँ समर्थकों का दावा है कि इस कदम से 'कोचिंग माफिया' पर लगाम लगेगी, वहीं विश्लेषक और छात्र संगठन इसे सरकार की घबराहट में उठाया गया नीतिगत कदम मान रहे हैं। ​ऐलान बनाम क्रियान्वयन: समयसीमा पर सस्पेंस। ​प्रधानमंत्री ने मुफ़्त कोचिंग का विचार तो सामने रखा, लेकिन यह योजना कब से धरातल पर उतरेगी, इसका कोई स्पष्ट खाका या समयसीमा जारी नहीं की गई। ​ पुराने मॉडल का उदाहरण: बैंकिंग सेवाओं के क्षेत्र में प्री-एग्जाम ट्रेनिंग (PET) जैसी मुफ़्त कोचिंग व्यवस्था पहले से ही विभिन्न परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध रही है। ऐसे में नई घोषणा में क्या मौलिक अंतर होगा, यह अभी भी अस्पष्ट है। ​ समयसीमा का अभाव: जब तक किसी नीति की आधिकारिक अधिसूचना और कार्यान्वयन की तिथि तय नहीं होती, तब तक ऐसी घोषणाएं केवल प्रशासनिक वादों तक ही...

पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा की प्रचंड जीत: पूर्वी भारत में भगवा क्रांति, विपक्ष का किला ढहा।।

पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा की प्रचंड जीत: पूर्वी भारत में भगवा क्रांति, विपक्ष का किला ढहा।। ​नई दिल्ली/कोलकाता/गुवाहाटी: ​भारतीय राजनीति के इतिहास में आज का दिन एक बड़े अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। 2026 के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने न केवल राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है, बल्कि देश के चुनावी नक्शे को भी पूरी तरह बदल दिया है।  पश्चिम बंगाल में जहाँ दशकों पुराना ममता बनर्जी का किला ढह गया है, वहीं असम में भाजपा ने अपनी रणनीतिक पकड़ को और मजबूत करते हुए 'जीत की हैट्रिक' लगाई है। ​ ​बंगाल में इस बार का 'परिवर्तन' भाजपा के पक्ष में रहा। 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल कर पहली बार कोलकाता के 'नबन्ना' (सचिवालय) की ओर कदम बढ़ाए हैं। ​इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर भवानीपुर सीट पर देखने को मिला, जहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। ​तृणमूल कांग्रेस मात्र 80 सीटों पर सिमट गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता विरोधी लहर और ध्रुवीकरण ने भाजपा के पक्ष में काम ...

सियासत से बड़ा 'साथ'—बंगाल के रण में ममता की 'शक्ति' बने तेजस्वी यादव

विशेष रिपोर्ट: सियासत से बड़ा 'साथ'—बंगाल के रण में ममता की 'शक्ति' बने तेजस्वी यादव कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चुनावी महासमर में जहाँ गठबंधन के कई साथी अपनी राहें जुदा कर चुके हैं, वहीं बिहार के युवा नेतृत्व तेजस्वी यादव ने 'गठबंधन धर्म' की एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसकी गूँज पूरे देश में है। राहुल गांधी के तीखे हमलों और कांग्रेस के विरोध के बीच, तेजस्वी यादव ने ममता दीदी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर यह साबित कर दिया कि असली राजनीति पदों के लिए नहीं, बल्कि सिद्धांतों और रिश्तों के लिए की जाती है। "दीदी बंगाल की शेरनी हैं": तेजस्वी का ममता को खुला समर्थन कोलकाता की सड़कों पर जब तेजस्वी यादव और ममता बनर्जी एक साथ नजर आए, तो समर्थकों का उत्साह चरम पर था। तेजस्वी ने न केवल चुनावी रैलियों को संबोधित किया, बल्कि ममता बनर्जी के संघर्ष को देश के लिए मिसाल बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ममता दीदी बंगाल की वह 'शेरनी' हैं जो अकेले दिल्ली की सत्ता को चुनौती दे रही हैं, और संकट के इस समय में उन्हें अकेला छोड़ना गठबंधन धर्म के खिलाफ होता। राजनीति से ऊपर की सोच जहाँ...

"उल्टा टांगने" वाले बयान पर तेजस्वी का अमित शाह को जवाब— "दम है तो ट्रंप को जवाब दें"

"उल्टा टांगने" वाले बयान पर तेजस्वी का अमित शाह को जवाब— "दम है तो ट्रंप को जवाब दें" बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के अंतिम दौर के प्रचार में भाषा की मर्यादा और व्यक्तिगत हमलों ने राजनीतिक विमर्श को एक नए निचले स्तर पर पहुँचा दिया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा भ्रष्टाचारियों और घुसपैठियों को "उल्टा टांग कर सीधा कर देने" वाले विवादास्पद बयान पर बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने जबरदस्त पलटवार किया है। तेजस्वी यादव ने अपनी प्रतिक्रिया में भाषा की मर्यादा को लेकर भी काफी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अमित शाह के बयान को पद की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कई बातें कहीं: तेजस्वी यादव ने कहा कि एक देश के गृहमंत्री के मुंह से इस तरह की भाषा शोभा नहीं देती। उनका तर्क था कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को संयमित और मर्यादित शब्दों का चुनाव करना चाहिए।  उन्होंने स्पष्ट रूप से "उल्टा टांग देंगे" जैसे शब्दों को "सड़क छाप भाषा" करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के शीर्ष नेता अब राजनीतिक...

एक युग का अंत: कला और सामाजिक सरोकार के बेमिसाल प्रतीक नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि

एक युग का अंत: कला और सामाजिक सरोकार के बेमिसाल प्रतीक नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि भारतीय सिनेमा और रंगमंच के इतिहास में कुछ ही कलाकार ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल उनकी अदाकारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे अपने बेबाक व्यक्तित्व और समाज सेवा के माध्यम से जन-जन के दिल में अमिट छाप छोड़ जाते हैं। पद्म श्री और तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर (75 वर्ष) का 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा पड़ने) के कारण आकस्मिक निधन हो गया। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर (CPR) देकर उन्हें बचाने का अंतिम प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। राजकीय सम्मान के साथ पुणे स्थित उनके फार्महाउस पर अंतिम संस्कार संपन्न किया गया। नाना पाटेकर का जाना केवल मनोरंजन जगत की क्षति नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे अध्याय का अंत है जिसने सिनेमा को यथार्थ, सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ा। 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'तिरंगा', 'प्रहार' और '...

संपादकीय: वनडे क्रिकेट में 200 विकेट पूरे किए स्पिन का जादूगर कुलदीप यादव ने शेन वॉर्न की यादें ताजा कर दीं

संपादकीय: वनडे क्रिकेट में  200 विकेट पूरे किए स्पिन का जादूगर कुलदीप यादव ने शेन वॉर्न की यादें ताजा कर दीं क्रिकेट की दुनिया में जब भी लेग स्पिन का जिक्र होता है, तो आंखों के सामने ऑस्ट्रेलिया के महान स्पिनर स्व. शेन वॉर्न का चेहरा अपने आप घूम जाता है। हवा में गेंद को तैराना, पिच पर पड़ते ही उसे अप्रत्याशित मोड़ देना और बल्लेबाज को पूरी तरह भ्रमित कर देना—यह कला वॉर्न के नाम के साथ अमर हो चुकी है। लेकिन जब भारतीय टीम का एक युवा चाइनामैन गेंदबाज 22 यार्ड की पट्टी पर उतरता है, तो लगता है मानो वॉर्न का वही दौर एक नए अंदाज में लौट आया है। हम बात कर रहे हैं कुलदीप यादव की, जिन्होंने अपनी फिरकी से क्रिकेट प्रेमियों को बार-बार वॉर्न की जादुई रातों की याद दिलाई है। अगर समय की सुई को थोड़ा पीछे घुमाएं और दोनों दिग्गजों के शुरुआती सफर पर नजर डालें, तो आंकड़ों का सफर बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ा दिखता है। 122 वनडे मुकाबलों के बाद अगर आंकड़ों के तराजू पर तौला जाए, तो कुलदीप यादव, शेन वॉर्न के इतने करीब आकर खड़े हो जाते हैं कि दोनों के बीच फर्क कर पाना मुश्किल हो जाता है। जहाँ ऑस्ट्रेलिया के जाद...

संपादकीय: राष्ट्रीयता का आवरण और क्षेत्रीयता का सच—किस राह पर है कांग्रेस?

संपादकीय: राष्ट्रीयता का आवरण और क्षेत्रीयता का सच—किस राह पर है कांग्रेस? भारतीय राजनीति के वर्तमान परिदृश्य में देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी—भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस—एक विचित्र और गभीर विरोधाभास के दौर से गुजर रही है। एक तरफ जहाँ कागजों, इतिहास और कॉरपोरेट चंदे के आंकड़ों में कांग्रेस आज भी देश की मुख्य विपक्षी ताकत नजर आती है, वहीं दूसरी ओर चुनावी परिणामों और जमीनी जनाधार के तराजू पर तौलने पर उसकी स्थिति किसी क्षेत्रीय दल से अलग नजर नहीं आती। 'राष्ट्रीय दल' का आवरण और 'क्षेत्रीय क्षमता' का सच—यही आज की कांग्रेस की सबसे बड़ी त्रासदी बन चुका है। संसाधनों में राष्ट्रीय, नतीजों में सीमित चुनावी चंदे और वित्तीय संसाधनों के आंकड़ों को देखें तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बाद कॉर्पोरेट जगत और इलेक्टोरल बॉन्ड/ट्रस्ट्स से सबसे ज्यादा फंड हासिल करने वाली पार्टी कांग्रेस ही है। संसद के भीतर मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हो या राष्ट्रीय मीडिया में बहस का केंद्र बिंदु बनना, कांग्रेस आज भी अपनी पुरानी सत्ता के प्रभाव और अखिल भारतीय नेटवर्क के दम पर राष्ट्रीय विकल्प होने का दा...

“पीएम ने दोहराया बयान और बताया, 'दिमागी नक्सल' को लाल किला से होम्योपैथी की पहली गोली दी थी।”

पीएम ने दोहराया बयान और बताया,  ' दिमागी नक्सल ' को लाल किला से होम्योपैथी की पहली गोली दी थी। “मैंने लाल किले से जैसे ही दिमागी नक्सल वाली होम्योपैथी की गोली दी , सारे दिमागी नक्सल निकल कर बाहर आने लगे , और जो लोग दिमागी नक्सल को बढ़ावा दे रहे हैं , अब जनता उनका भी असली रंग देख रही है।-माननीय प्रधानमंत्री।” पीएम नरेंद्र मोदी का यह बयना उन युवायों के सामने दिया गया जो आगे चलकर कुछ हिं दिनों में देश के मुख्य धारा अगली पंक्ति का नेतृत्व करने वाले हैं। इस बयान के कई मायने हैं।  पहला कि यह बयान पीएम ने स्वतंत्रता दिवस के दिन दिया था। दूसरा कि लाल किला से दिया था। तीसरा, लाल किला ऐसा स्थल है, जहाँ से सिर्फ शांति फैलाया जाता है। यहाँ से किसी वर्ग पर राजनीतिक प्रहार नहीं कर सकते। भारत के अन्य प्रधान मंत्री मोदी जैसा बयान दिया होगा , लेकिन भारत का एक ऐसा पीएम हुए डॉक्टर मनमोहन सिंह जी , जिसने लाल किला से ऐसा भाषण नहीं दिया और उसके बाद उस बयान को फिर दोहराया नहीं। भारतीय राजनीति और सार्वजनिक विमर्श में शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं के बयानों का अपना एक विशेष महत्व और वजन होता है। हाल...

JPNIC विवाद पर अखिलेश यादव का तीखा हमला: 'निर्माता नहीं, केवल बेचने वाली सोच है भाजपा'

"JPNIC विवाद पर अखिलेश यादव का तीखा हमला: 'निर्माता नहीं, केवल बेचने वाली सोच है भाजपा" लखनऊ/उत्तर प्रदेश/N5: ​उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर विकास, जन-विरासत और सियासी सोच को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार पर बेहद कड़ा और भावनात्मक हमला बोला है। सोशल मीडिया के जरिए सरकार की प्राथमिकताओं और नीतियो पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव ने साफ कहा कि सत्ता में बैठे लोग जन-हित की भव्य संरचनाओं को बनाने का हौसला नहीं रखते, वे सिर्फ बनी-बनाई विरासतों का सौदा करना जानते हैं। सपा प्रमुख ने अपने आधिकारिक बयान में तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि भाजपा JPNIC जैसी अद्भुत और ऐतिहासिक सिग्नेचर बिल्डिंग्स का निर्माण करना तो दूर, उसके बारे में सोच भी नहीं सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और संकीर्ण मानसिकता ने सत्ताधारियों की दृष्टि को कुंठित कर दिया है। जब कोई सरकार जन-हित के लिए बड़ा विजन नहीं रख पाती, तब ...

जब मासूमियत भी व्यवस्था के दावों की पोल खोल दे।छह साल के बच्चा का सरकार पर आक्रोश।.

जब मासूमियत भी व्यवस्था के दावों की पोल खोल दे- छह साल के बच्चा का सरकार पर आक्रोश।। छह साल के इस बच्चा का सरकार पर जो आक्रोश था वो सरकार पर सवाल खङा करता है। नीतीश कुमार के बीस सालों के शासन को चुनौती देता है। ये घटना बता रही है कि सरकार पिछले बीस साल में सिर्फ राजनीतिक की है। शिक्षा और इसके सुधार को लेकर सिर्फ खाना-पूर्ति का काम की है। जिसे अब शिक्षित लोग समझ चुके हैं। बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और रोजगार की अनिश्चितता के बीच सड़कों पर उतरा आक्रोश अब केवल नौजवानों तक सीमित नहीं रह गया है। हाल ही में 6 साल के एक बच्चे द्वारा शासन-प्रशासन के खिलाफ मुखर होकर पोस्टर थामना और उस पर पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया , राज्य के मौजूदा ढांचे की संवेदन हीनता और विफलताओं का आईना है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में खिलौने और किताबें होनी चाहिए , उस उम्र में यदि एक बच्चा सरकार के खिलाफ सड़कों पर खड़ा होकर व्यवस्था को उखाड़ने की बात कहे , तो यह किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के दो दशकों के दावों पर सीधा कुठाराघात है। नीतीश मॉडल और बीस सालों का हिसाब पिछले दो दशकों से बिहार में ' सुशा...

पीडीएस विक्रेताओं का दर्द: व्यवस्था की उपेक्षा और वादों का जाल।।

पीडीएस विक्रेताओं का दर्द: व्यवस्था की उपेक्षा और वादों का जाल।। पटना के गर्दनीबाग में जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं ( PDS) की आठ सूत्री मांगों को लेकर आयोजित राज्यस्तरीय विशाल धरना-प्रदर्शन को बिहार नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने संबोधित कर अपना और पार्टी का समर्थन दे दिया है। बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा पटना के गर्दनीबाग में जन वितरण प्रणाली ( PDS) विक्रेताओं के राज्यस्तरीय विशाल धरना-प्रदर्शन में शामिल होना और उनकी मांगों का पुरजोर समर्थन करना , राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर एक बड़ा बहस छेङ दिया है। फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन के बैनर तले अपनी आठ सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन रत ये विक्रेता केवल अपने अधिकारों की लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं , बल्कि उस सार्वजनिक वितरण प्रणाली की बदहाली को उजागर कर रहे हैं जो राज्य के करोड़ों गरीब और वंचित परिवारों के जीवन का आधार है। रिकॉर्डतोड़ महंगाई , व्याप्त संगठित भ्रष्टाचार और सरकारी उपेक्षा की मार झेल रहे इन राशन डीलरों का आक्रोश अब राजधानी पटना की सङक पर आ चुका है। जन वितरण प्रणाली ( PDS) विक्रेताओं का राज...

संपादकीय: मुफ़्त कोचिंग का वादा — राहत की पहल या जनाक्रोश को शांत करने का राजनीतिक पैंतरा?

संपादकीय: मुफ़्त कोचिंग का वादा — राहत की पहल या जनाक्रोश को शांत करने का राजनीतिक पैंतरा? ​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मध्यवर्ग और छात्रों के लिए मुफ़्त ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क तैयार करने की घोषणा ने देश भर के राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। जहाँ समर्थकों का दावा है कि इस कदम से 'कोचिंग माफिया' पर लगाम लगेगी, वहीं विश्लेषक और छात्र संगठन इसे सरकार की घबराहट में उठाया गया नीतिगत कदम मान रहे हैं। ​ऐलान बनाम क्रियान्वयन: समयसीमा पर सस्पेंस। ​प्रधानमंत्री ने मुफ़्त कोचिंग का विचार तो सामने रखा, लेकिन यह योजना कब से धरातल पर उतरेगी, इसका कोई स्पष्ट खाका या समयसीमा जारी नहीं की गई। ​ पुराने मॉडल का उदाहरण: बैंकिंग सेवाओं के क्षेत्र में प्री-एग्जाम ट्रेनिंग (PET) जैसी मुफ़्त कोचिंग व्यवस्था पहले से ही विभिन्न परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध रही है। ऐसे में नई घोषणा में क्या मौलिक अंतर होगा, यह अभी भी अस्पष्ट है। ​ समयसीमा का अभाव: जब तक किसी नीति की आधिकारिक अधिसूचना और कार्यान्वयन की तिथि तय नहीं होती, तब तक ऐसी घोषणाएं केवल प्रशासनिक वादों तक ही...

पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा की प्रचंड जीत: पूर्वी भारत में भगवा क्रांति, विपक्ष का किला ढहा।।

पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा की प्रचंड जीत: पूर्वी भारत में भगवा क्रांति, विपक्ष का किला ढहा।। ​नई दिल्ली/कोलकाता/गुवाहाटी: ​भारतीय राजनीति के इतिहास में आज का दिन एक बड़े अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। 2026 के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने न केवल राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है, बल्कि देश के चुनावी नक्शे को भी पूरी तरह बदल दिया है।  पश्चिम बंगाल में जहाँ दशकों पुराना ममता बनर्जी का किला ढह गया है, वहीं असम में भाजपा ने अपनी रणनीतिक पकड़ को और मजबूत करते हुए 'जीत की हैट्रिक' लगाई है। ​ ​बंगाल में इस बार का 'परिवर्तन' भाजपा के पक्ष में रहा। 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल कर पहली बार कोलकाता के 'नबन्ना' (सचिवालय) की ओर कदम बढ़ाए हैं। ​इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर भवानीपुर सीट पर देखने को मिला, जहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। ​तृणमूल कांग्रेस मात्र 80 सीटों पर सिमट गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता विरोधी लहर और ध्रुवीकरण ने भाजपा के पक्ष में काम ...

सियासत से बड़ा 'साथ'—बंगाल के रण में ममता की 'शक्ति' बने तेजस्वी यादव

विशेष रिपोर्ट: सियासत से बड़ा 'साथ'—बंगाल के रण में ममता की 'शक्ति' बने तेजस्वी यादव कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चुनावी महासमर में जहाँ गठबंधन के कई साथी अपनी राहें जुदा कर चुके हैं, वहीं बिहार के युवा नेतृत्व तेजस्वी यादव ने 'गठबंधन धर्म' की एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसकी गूँज पूरे देश में है। राहुल गांधी के तीखे हमलों और कांग्रेस के विरोध के बीच, तेजस्वी यादव ने ममता दीदी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर यह साबित कर दिया कि असली राजनीति पदों के लिए नहीं, बल्कि सिद्धांतों और रिश्तों के लिए की जाती है। "दीदी बंगाल की शेरनी हैं": तेजस्वी का ममता को खुला समर्थन कोलकाता की सड़कों पर जब तेजस्वी यादव और ममता बनर्जी एक साथ नजर आए, तो समर्थकों का उत्साह चरम पर था। तेजस्वी ने न केवल चुनावी रैलियों को संबोधित किया, बल्कि ममता बनर्जी के संघर्ष को देश के लिए मिसाल बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ममता दीदी बंगाल की वह 'शेरनी' हैं जो अकेले दिल्ली की सत्ता को चुनौती दे रही हैं, और संकट के इस समय में उन्हें अकेला छोड़ना गठबंधन धर्म के खिलाफ होता। राजनीति से ऊपर की सोच जहाँ...

"उल्टा टांगने" वाले बयान पर तेजस्वी का अमित शाह को जवाब— "दम है तो ट्रंप को जवाब दें"

"उल्टा टांगने" वाले बयान पर तेजस्वी का अमित शाह को जवाब— "दम है तो ट्रंप को जवाब दें" बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के अंतिम दौर के प्रचार में भाषा की मर्यादा और व्यक्तिगत हमलों ने राजनीतिक विमर्श को एक नए निचले स्तर पर पहुँचा दिया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा भ्रष्टाचारियों और घुसपैठियों को "उल्टा टांग कर सीधा कर देने" वाले विवादास्पद बयान पर बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने जबरदस्त पलटवार किया है। तेजस्वी यादव ने अपनी प्रतिक्रिया में भाषा की मर्यादा को लेकर भी काफी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अमित शाह के बयान को पद की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कई बातें कहीं: तेजस्वी यादव ने कहा कि एक देश के गृहमंत्री के मुंह से इस तरह की भाषा शोभा नहीं देती। उनका तर्क था कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को संयमित और मर्यादित शब्दों का चुनाव करना चाहिए।  उन्होंने स्पष्ट रूप से "उल्टा टांग देंगे" जैसे शब्दों को "सड़क छाप भाषा" करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के शीर्ष नेता अब राजनीतिक...