सम्पादकीय, शारदीय नवरात्रि महा नवमी विशेष: थावे दुर्गा मंदिर और राजधानी पटना में उमड़ी श्रद्धा की अपार भीड़, महानिशा पूजा और अनुष्ठानों की धूम
सम्पादकीय:
बिहार में शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व अत्यंत उल्लास, भक्ति और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन आज मां दुर्गा के नवें व अंतिम स्वरूप, मां सिद्धिदात्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। इस अवसर पर राजधानी पटना सहित प्रदेशभर के तमाम शक्तिपीठों और मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। भक्त सुबह से ही कतारबद्ध होकर मां भगवती के दर्शन कर रहे हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि तथा मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना कर रहे हैं। कई प्रमुख स्थानों पर कन्या पूजन का अनुष्ठान भी श्रद्धा के साथ संपन्न किया जा रहा है।
सिद्धपीठ थावे दुर्गा मंदिर में विशेष तैयारियां
बिहार के प्रसिद्ध गोपालगंज जिले स्थित ऐतिहासिक सिद्धपीठ थावे दुर्गा मंदिर में महा नवमी के अवसर पर विशेष उत्सव का माहौल है। रिपोर्ट के अनुसार, आज सुबह तीन बजे ही थावे मंदिर का पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। सुबह पांच बजे मां का भव्य शृंगार किया गया, जिसके बाद पारंपरिक रूप से मंगला आरती संपन्न हुई।
मंदिर के मुख्य पुजारी संजय पांडे ने जानकारी दी, "नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की विशेष पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियां और बल प्रदान करती हैं। उनकी चार भुजाएं हैं और वे कमल तथा सिंह पर विराजमान होती हैं।"
रात्रि कालीन महानिशा पूजा और परंपराएं
आज रात्रि के समय विशेष अनुष्ठानों का दौर जारी रहेगा। गोपालगंज के थावे मंदिर सहित कई प्रमुख मंदिरों में आज रात 12 बजे महानिशा पूजा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें तांत्रिक और पारंपरिक विधि से विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान माता की आराधना में रात्रि जागरण और विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं, जिन्हें सनातन संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन यानी महानवमी की पूजा का सनातन धर्म में अत्यधिक आध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। नौ दिनों तक चलने वाली इस साधना और आराधना का यह समापन दिवस होता है। इस दिन के मुख्य महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से समझे जा सकते हैं;
माँ सिद्धिदात्री की उपासना: नवमी के दिन माँ दुर्गा के नौवें स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये देवी अपने भक्तों को सभी प्रकार की अष्टसिद्धियाँ और नौ निधियां प्रदान करने वाली हैं। इनकी कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं और जीवन में ज्ञान, विवेक व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
महानिशा पूजा और तांत्रिक अनुष्ठान: नवरात्रि की अंतिम रात्रि यानी महानिशा की रात को तंत्र, मंत्र और विशेष साधना के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। इस दौरान शक्तिपीठों और मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होते हैं, जिससे नकारात्मक ऊर्जा का नाश और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कन्या पूजन (कुमारी पूजन): नवमी तिथि के दिन 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को माँ दुर्गा का साक्षात स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। उन्हें आदरपूर्वक भोजन (हलवा, पूरी और चने) कराकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। मान्यता है कि इसके बिना नवरात्रि की पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता।
हवन और पूर्णाहुति: नवरात्रि के समापन पर यज्ञ और हवन करने की परंपरा है। हवन के माध्यम से देवी को आहुति दी जाती है, जिससे घर की शुद्धि होती है, वातावरण सकारात्मक बनता है और नौ दिनों की साधना पूरी होती है।
अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश: यह दिन हमें यह प्रेरणा देता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अंततः सत्य, संयम और न्याय की ही जीत होती है।
संक्षेप में कहें तो, यह दिन भक्त की साधना के पूर्ण होने और माँ की असीम कृपा प्राप्त करने का सबसे बड़ा अवसर होता है।
नवरात्रि के अंतिम दिन उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। गोपालगंज पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इस प्रकार, संपूर्ण बिहार में भक्तिमय वातावरण के साथ शारदीय नवरात्रि का यह पावन पर्व उल्लासपूर्वक संपन्न हो रहा है।
(स्रोत: एआईआर न्यूज, मंदिर पंडित, माँ की पूजा-पाठ करने वाले पुजारी)
