Skip to main content

हेमंत सरकार ने मोदी को पीछे छोड़ा, मानी छात्रों की मांग, JSSC-CGL परीक्षा रद्द; परीक्षा लेने वाली कंपनी को दिखाया बाहर का रास्ता, - झारखंड।।




हेमंत सरकार ने मोदी को पीछे छोड़ा, मानी छात्रों की मांग, JSSC-CGL परीक्षा रद्द; परीक्षा लेने वाली कंपनी को दिखाया बाहर का रास्ता, - झारखंड।।

रांची/झारखंड/N5: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों की मेहनत और उनका आंदोलन आखिरकार रंग लाया है। झारखंड सरकार ने छात्रों की सभी प्रमुख मांगें मान ली हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर JSSC-CGL और विवादित एजेंसी TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। सरकार के इस त्वरित और सख्त एक्शन की चौतरफा तारीफ हो रही है और इसे केंद्र सरकार के लिए भी एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

हेमंत सोरेन सरकार ने केंद्र की मोदी सरकार को छोड़ा पीछे:
​परीक्षाओं में हो रही धांधली और पेपर लीक जैसे मामलों पर झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने जो कड़ा रुख अपनाया है, उसकी तुलना अब केंद्र सरकार से की जा रही है। छात्र और राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि जिस तरह हेमंत सरकार ने बिना देरी किए परीक्षा लेने वाली दागी कंपनी (एजेंसी) को बाहर का रास्ता दिखा दिया, वैसा सख्त कदम उठाने में केंद्र की मोदी सरकार भी विफल रही है। यह चर्चा जोरों पर है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में गड़बड़ी के बावजूद जो कड़े फैसले मोदी सरकार नहीं ले सकी, वह साहसिक काम हेमंत सोरेन सरकार ने कर दिखाया है।

रांची की सड़कों पर उतरा छात्रों का हुजूम, जमकर हुआ जश्न:
​सरकार द्वारा मांगें माने जाने की खबर जैसे ही आंदोलनरत छात्रों तक पहुंची, रांची की सड़कों पर खुशी की लहर दौड़ गई।
​JPSC और JSSC के परीक्षार्थियों ने ढोल-नगाड़ों के साथ सड़कों पर उतरकर अपनी जीत का जश्न मनाया।
​छात्रों का समूह भारी संख्या में एकत्रित होकर गाते और नाचते हुए दिखाई दिया, जो उनके लंबे संघर्ष की सफलता को बयां कर रहा था।
​छात्रों का कहना है कि दागी कंपनी को हटाना और परीक्षा रद्द करना उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा और पारदर्शी कदम है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नेता देवेंद्र नाथ महतो का बड़ा बयान:
​इस बड़े फैसले के बाद छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवा नेता देवेंद्र नाथ महतो ने एक अहम बयान जारी किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रशासन के इस कड़े कदम की सराहना करते हुए कहा:
​"हम इस आंदोलन में सहयोग और समर्थन के लिए सभी छात्रों, अभिभावकों, मीडिया के सदस्यों, पुलिस प्रशासन और खासकर झारखंड सरकार व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का दिल से धन्यवाद देते हैं। हम छात्रों के मुद्दों को गंभीरता से लेने और हमारी मांगों को पूरा करने के लिए आभार व्यक्त करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच बहुत बारीकी से की जा रही है और इसमें शामिल हर भ्रष्ट व्यक्ति को पकड़ा जा रहा है। वे इन गिरोहों के पीछे के असली सरगनाओं तक पहुंचने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।"
N5: इस फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि झारखंड सरकार नियुक्तियों में किसी भी प्रकार की कोताही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। गिरोह के सरगनाओं पर लगातार कसता शिकंजा इस बात का प्रमाण है। लाखों अभ्यर्थियों ने अब राहत की सांस ली है और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही किसी नई, निष्पक्ष और पारदर्शी एजेंसी के माध्यम से इन परीक्षाओं का पुनः आयोजन किया जाएगा।
         (रिपोर्ट- न्यूज डेस्क N5)

Popular Posts

एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इस एक बात का ख्याल अवश्य रखना चाहिए।

एक सेल्स मैन को ये काम अवश्य करनी चाहिए, यदि आप एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इस एक बात  का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। एक सेल्स मैन को ये काम अवश्य करनी चाहिए। यदि आप एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इन बातों का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। हम कोई भी काम करते हैं उसकी योजना अवश्य तैयार करते हैं। एक छोटा सा छोटा काम के लिए भी हम योजना बनाते हैं। हलांकि छोटे कामों के लिए बनाये गए योजना हमारा दिमाग को पता नहीं चलता। हमारे दिमाग को इसके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसपर कभी आपने सोचा है कि आख़िर ऐसा क्यों होता है ? इसकी वजह को हमे जानने का प्रयास अवश्य करनी चाहिए। ऐसे तो इसके अनेकों वजह हो सकते हैं और इसके मनोवैज्ञानिक कारण भी कई हो सकते हैं, लेकिन हमे इन भारी वजहों को छोड़कर एक सरल वजह की तलाश करने की जरूरत है। मेरे अनुसार सरल स्वभाव से इसका एक वजह यह भी हो सकता है कि हमारा दिमाग इन छोटे-छोटे कामों को पहले कई बार कर चुका होता है। यूं कहें इस काम को मेरा दिमाग पूर्ण रूप से अभ्यस्त हो गया होता है। इसलिए हमारा दिमाग को इस छोटा काम को पूरा करने में किसी प्रकार की परेश...

एक कप चाय, मिट्टी वाली में - चाय को पीने में जो मजा है, वो मजा सात समन्दर पार जाकर भी नहीं वो कैसे !

एक कप चाय से याद आया कि मिट्टी के बर्तन वाली चाय को पीने में जो मजा है, वो मजा सात समन्दर पार जाकर एक प्रेमी को अपने प्रेमिका या एक प्रेमिका को अपने प्रेमी से मिलने में भी नहीं होगा! लेकिन वो मजा इस चाय पीने में आपको मिलेगा।  आप महिला हों या पुरुष यदि आप अपने जीवन में, प्रेम में प्रवाहित होने के आनंद से वंचित रह गाएं हैं तो हमारी मानिये एक बार इस चाय के प्रेम में बह जाइये, डूब जाइये और इसके गर्माहट में गोते लगा लीजिये! इसके मंद-मंद सुगंध में अपने नाक के दोनों सुराग को झोंक दीजिये। लेकिन एक बात का ख्याल रखियेगा,   इस चाय को पीने में कभी जल्दीबाजी नहीं कीजियेगा। नहीं तो, आपका जीभ आपसे नाराज हो जायेगा। बेमतलब के आप बेचारा स्वभाव से कोमल जीभ को रुखा कर दीजियेगा। यदि आपको विश्वास नहीं होता, तो एक बार मिट्टी वाला चुक्का में परोसी गई चाय को अपने होंठ से लगाकर और चाय को जीभ पर गिराकर तो देखिये! जैसे हीं, यह चाय आपके जीभ को स्पर्श करेगी वैसे हीं आप स्वयं इसके स्वाद से परिचित हो जाएंगें। हमारी मानिये तो आज हीं आप नुक्कड़ वाली एक कप चाय का मज़ा ले लीजिये। भारत आधुनीकता की ओर कदम बढ़ा च...

राहुल गांधी ने 'एल्फिंस्टन' (Elphinstone) फाइल का जिक्र करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को घेरा। सदन में भारी हंगामा।।

राहुल गांधी ने 'एल्फिंस्टन' (Elphinstone) फाइल का जिक्र करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को घेरा। सदन में भारी हंगामा।। राहुल गांधी ने संसद में जिस 'एल्फिंस्टन' (Elphinstone) फाइल या संदर्भ का जिक्र किया, वह सीधा हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की कार्यशैली पर था। गांधी ने सदन में एक पुरानी फाइल या रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह तर्क देने की कोशिश की कि सरकार कुछ खास उद्योगपतियों (अडानी-अंबानी) को फायदा पहुँचाने के लिए नियमों में बदलाव करती है। उन्होंने 'एल्फिंस्टन' नाम का जिक्र उन ऐतिहासिक नियमों या व्यवस्थाओं के संदर्भ में किया जो मुंबई के बंदरगाहों या रेलवे के बुनियादी ढांचे से जुड़ी थीं। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को घेरते हुए निम्नलिखित बातें कहीं: ​नियमों में बदलाव: उनका आरोप था कि सरकार ने पुराने नियमों (जिनका उन्होंने एल्फिंस्टन संदर्भ से जोड़ा) को दरकिनार कर दिया ताकि एयरपोर्ट्स और पोर्ट्स का नियंत्रण कुछ विशेष व्यापारिक समूहों को दिया जा सके। ​अडाणी समूह का जिक्र: उन्होंने दावा किया कि पहले नियम था कि जिसे एयरपोर्ट संचालन का अनुभव नहीं है, उसे टेंडर नहीं म...