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शिक्षकों की कमी, सिर पर मंडराते बोर्ड इम्तिहान और प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ राजकीय सर्वोदय बालिका विद्यालय की छात्राओं का जमीनी संघर्ष।।



शिक्षकों की कमी, सिर पर मंडराते बोर्ड इम्तिहान और प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ राजकीय सर्वोदय बालिका विद्यालय की छात्राओं का जमीनी संघर्ष।।

​[विशेष ग्राउंड रिपोर्ट | स्थान: लखनऊ, उत्तर प्रदेश]
उत्तर प्रदेश की राजधानी में 'जेन अल्फा' (Gen Alpha) की स्कूली छात्राएं किसी राजनीतिक एजेंडे के लिए नहीं, बल्कि अपनी कक्षाओं में शिक्षक मांगने के लिए चक्काजाम करने को मजबूर हुई।
​बारिश की परवाह किए बिना सड़क पर धरना देती इन बच्चियों का आक्रोश किसी व्यवस्थागत लापरवाही का परिणाम है या प्रशासनिक असंवेदनशीलता का? यह सवाल आज लखनऊ की सड़कों पर गूंज रहा है।

​चलिए जानते है आखिर मामला क्या है? (Ground Reality):
​लखनऊ स्थित राजकीय जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय की छात्राएं लगातार दो दिनों से सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। आपको अवगत करा दूँ कि इस प्रतिष्ठित सरकारी आवासीय विद्यालय का संचालन सीधे उत्तर प्रदेश सरकार का समाज कल्याण विभाग करता है।
​छात्राओं का आरोप है कि विद्यालय में पिछले 6 महीनों से मुख्य विषयों के शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। कक्षा में पढ़ाने वाला कोई नहीं है और पढ़ाई पूरी तरह ठप पड़ी हुई है।

छात्राओं के दर्द: "बोर्ड पेपर पास हैं, हमारा भविष्य बर्बाद हो रहा है"
​इनसे पूछे जाने पर छात्राओं का दर्द और आक्रोश साफ-साफ छलक पङा । आप भी द्रवित हो जाएंगे। 
​सवाल: आप लोग की क्या मांगें हैं?"
जवाब: "हमारे यहां 6 महीनों से टीचर नहीं हैं। हमारे बोर्ड पेपर आने वाले हैं, हमारा भविष्य बर्बाद हो रहा है! मिनिस्ट्री हमारी बात सुन ही नहीं रही है। हमारी प्रिंसिपल मैम ने भी लिखकर डिमांड भेजी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।"
​छात्राओं ने यह भी खुलासा किया कि पढ़ाई के अभाव के साथ-साथ विद्यालय परिसर में कर्मचारियों का रवैया भी उनके प्रति बेहद संवेदनहीन और अमर्यादित रहता है।
​छात्राएं: "हमारे यहां के कर्मचारी बहुत गंदे तरीके से हमसे बात करते हैं।"

प्रशासनिक और विभागीय नाकामी पर सवाल:
​सर्वोदय विद्यालय राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य गरीब व वंचित वर्ग की बेटियों को गुणवत्तापूर्ण एवं आवासीय शिक्षा प्रदान करना है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि
​6 महीने से रिक्तियां है। बोर्ड परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण पड़ाव से ठीक पहले आधे से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली हैं।
​स्कूल प्रशासन और प्रिंसिपल द्वारा लगातार पत्र भेजे जाने के बावजूद समाज कल्याण विभाग और संबंधित मंत्रालय ने कोई कदम नहीं उठाया।

राजनीतिक सरगर्मी और प्रतिक्रियाएं:
​मासूम छात्राओं के सड़क पर उतरने के इस वीडियो और तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा:
​"जेन-ज़ी (Gen-Z) के बाद अब जेन-अल्फा (Gen-Alpha) भी सरकार के खिलाफ सड़कों पर! बड़ों से ज्यादा लोकतंत्र और अपने अधिकारों के प्रति सजगता इन बच्चों में दिख रही है। मुख्यमंत्री और सरकार जवाब दें— भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़ क्यों हो रहा है?"
मुख्य मांगें (Key Demands)
​बोर्ड परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए खाली पड़े सभी शिक्षक पदों पर तुरंत तदर्थ (Ad-hoc) या स्थायी शिक्षकों की बहाली की जाए।
​6 महीने तक मांग अनसुनी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय होना भी अनिवार्य रहे ।
​छात्राओं से अभद्रता करने वाले कर्मचारियों की जांच कर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
​आवासीय परिसर में छात्राओं के लिए अनुकूल, सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित हो।

N5: लखनऊ की सड़कों पर बैठी ये छात्राएं केवल अपने लिए शिक्षक नहीं मांग रही हैं, बल्कि वे उस भरोसे को बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं जो उन्होंने सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर जताया था। यदि बोर्ड परीक्षाओं से पहले इन्हें योग्य शिक्षक नहीं मिले, तो उनके साल भर की मेहनत और पूरे करियर पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
​यह आंदोलन इस बात का प्रमाण है कि आज की 'जेन अल्फा' अपने अधिकारों के प्रति सजग है— अब देखना यह है कि प्रशासन कब नींद से जागता है।
     (रिपोर्ट-अजीत यादव लखनऊ N5)

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