हाँ, वही जिसे मोदी जी ने कहा था—“दिमागी नक्सल।”- भड़कीं कंचना यादव, सरकार पर साधा निशाना।।
पटना, बिहार, N5: बिहार की राजधानी पटना में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक और रोजगार के मुद्दों को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन किया था जिसके अंतर्गत बीते कल के आंदोलन में इन लोगों ने गांधी मैदान से लेकर राजभवन तक का मार्च निकाले थे, इस दौरान पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सड़कों पर बख्तरबंद 'बंकर' गाड़ियों (MPV) की तैनाती को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के तेज तर्रार नेत्री डॉक्टर कंचना यादव
ने सोशल मीडिया पर पटना की सड़कों से बंकर गाड़ी की तस्वीर साझा करते हुए सरकार और
सत्तारूढ़ दल पर तीखा हमला बोला है। सरकार के इस फैसला की कङी नींदा की हैं। इसे एक
अमानवीय करार घोषित कर दीं। सरकार का यह फैसला को छात्रों पर बङा प्रहार बता दीं
है।
डॉक्टर कंचना यादव ने आंदोलन के दरम्यान पटना के सङकों पर सरकार दौङाया
गया बंकर के फैसलों को लेकर गहरी चींता व्यक्त की हैं। भजपा की इस सरकार के फैसला
की तुलना नक्सलवादियों के साथ सरकार जिस प्रकार से ट्रिटमेंट करती है उससे कर दीं।
कंचना यादव ने छात्रो के द्वारा किये जा रहे आंदोलन पर पीएम नरेंद्र
मोदी द्वारा दिया गया बयान से प्रेरित फैसला बता दी हैं। पीएम मोदी इन छात्रों के
लिए बहुत हीं कठोर शब्द का प्रयोग किया था। ऐसा शब्द जिसका स्थान संविधान में
गैर-कानूनी बताया गया। इसके लिए संविधान ने कठोर सजा की व्यवस्था की है।
कंचना यादव ने लिखा है, “AK-47 के बाद पेश है ‘बंकर’, जो नक्सल प्रभावित इलाकों में इस्तेमाल
होता है। भाजपाइयों की नज़र में छात्र आतंकवादी हैं, छात्र नक्सली हैं। हाँ, वही जिसे मोदी जी ने कहा था—“दिमागी
नक्सल।”
कंचना यादव के पोस्ट के मुख्य बिंदु:
बंकर गाड़ियों के इस्तेमाल पर सवाल: उन्होंने लिखा कि AK-47 के बाद अब सड़कों पर 'बंकर' गाड़ियां
पेश की गई हैं, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर नक्सल
प्रभावित और युद्ध जैसे संवेदनशील इलाकों में किया जाता है।
छात्रों की तुलना पर आपत्ति: कंचना यादव ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष
की नजर में अपने अधिकारों और रोजगार की मांग कर रहे छात्र "आतंकवादी" और
"नक्सली" नजर आते हैं।
'दिमागी
नक्सल' बयान पर तंज: अपने पोस्ट में उन्होंने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व में दिए गए बयान का जिक्र करते हुए कटाक्ष
किया कि छात्रों को "दिमागी नक्सल" की श्रेणी में देखा जा रहा है।
आंदोलन और पुलिस कार्रवाई उल्लेखनीय है कि पटना के गांधी मैदान, जेपी गोलंबर और डाक बंगला चौराहे पर प्रदर्शन
कर रहे अभ्यर्थियों को रोकने के लिए भारी पुलिस बल और बख्तरबंद गाड़ियां तैनात की
गई थीं। विपक्ष का कहना है कि अपनी मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा
रहे युवाओं पर सैन्य-स्तरीय संसाधनों का प्रयोग प्रशासन की तानाशाही को दर्शाता
है।
(रिपोर्ट- शैलेन्द्र कुमार N5)
