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तेजस्वी यादव ने परीक्षा प्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल बोला; बिहार पेपर लीक का मुख्य केंद्र बन चुका है


"तेजस्वी यादव ने परीक्षा प्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल बोला; बिहार पेपर लीक का मुख्य केंद्र बन चुका है।"

​पटना/N5: बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने मीडिया के माध्यम से सरकार पर तीखा हमला बोला है और दावा किया कि राज्य अब "पेपर लीक का मुख्य केंद्र" बन गया है।
​मीडिया से बातचीत का एक वीडियो साझा करते हुए तेजस्वी यादव ने राज्य की लचर परीक्षा प्रणाली और बहाली प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

​तेजस्वी यादव के बयान की मुख्य बातें:
​पेपर लीक का केंद्र: तेजस्वी यादव ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर स्पष्ट शब्दों में लिखा, "बिहार पेपरलीक का मुख्य केंद्र बन चुका है।"
​पारदर्शिता का अभाव: उन्होंने परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में "कोई भी परीक्षा पारदर्शी तरीके से आयोजित नहीं होती है।"
​स्कूली स्तर पर भी सेंधमारी: पूर्व उपमुख्यमंत्री ने केवल बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं का ही जिक्र नहीं किया, बल्कि स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा, "प्रतियोगी परीक्षा तो छोड़िए यहाँ स्कूली स्तर पर 10वीं और 12वीं की परीक्षा का पेपर लीक होता है।"
​योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय: बहाली प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जब कोई भी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है, तो इसके कारण योग्य और काबिल अभ्यर्थियों का चयन नहीं हो पाता है।

​नेताप्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मीडिया के सामने रखी बेबाकी से बात।
​बिहार में प्रतियोगी और स्कूली परीक्षाओं में लगातार हो रही गड़बड़ियों को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यादव द्वारा साझा किए गए पोस्ट में वे पूरे आत्मविश्वास और आक्रामकता के साथ परीक्षा प्रणाली की खामियों को उजागर करते दिख रहे हैं। और सरकार पर बेबाक अंदाज में हमलावर हैं।
यादव ने कहा, कोई भी बहाली प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं है इसलिए योग्य और काबिल अभियार्थियों का चयन होना मुश्किल हो रहा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बिहार सबसे फिसड्डी है। पूरे देश में बिहार की नामांकन दर सबसे कम, और स्कूल छोड़ने की दर सबसे अधिक है। लगातार सामने आ रहे विवाद छात्रों की परेशानी बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने कहा,  अब तो बिहार में शिक्षा का भगवाकरण किया जा रहा है। स्कूलों में किताब नहीं, शिक्षक नहीं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं! युवा बेचैन और बेसब्र है। बेरोजगारी सबसे अधिक है। 1 करोड़ नौकरी का वादा करने वालों ने अब तक 1 लाख नौकरियां भी नहीं दी है।

बिहार के राजनीतिक मायने और संदर्भ क्या हो सकते हैं।
तेजस्वी यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पूरे देश और विशेषकर बिहार में विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं (जैसे हालिया नीट विवाद या राज्य स्तरीय शिक्षक व पुलिस भर्ती) में पेपर लीक और धांधली के आरोपों को लेकर छात्रों में भारी आक्रोश है। विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाकर युवाओं और छात्रों की आवाज बनने की कोशिश कर रहा है और राज्य सरकार को बैकफुट पर धकेलने का प्रयास कर रहा है।
N5: इस बयान के बाद अब देखना यह होगा कि सत्ता पक्ष की ओर से शिक्षा विभाग या राज्य सरकार के प्रतिनिधि इन गंभीर आरोपों का क्या जवाब देते हैं।
           (रिपोर्ट- न्यूज डेस्क N5)

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