NCERT का बड़ा फैसला: कक्षा 9वीं के पाठ्यक्रम में शामिल हुआ 'आपातकाल', केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने फैसले को बताया सही।
कक्षा 9वीं के पाठ्यक्रम में शामिल हुआ 'आपातकाल', केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने फैसले को बताया सही:NCERT का बड़ा फैसला।।
नई दिल्ली/N5: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने स्कूली पाठ्यक्रम में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए कक्षा 9वीं की पाठ्यपुस्तक में देश के 'आपातकाल' (Emergency) के इतिहास से जुड़े एक नए भाग को शामिल किया है। सरकार और NCERT के इस कदम को देश के इतिहास के एक काले अध्याय से नई पीढ़ी को रूबरू कराने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
"NCERT ने बिल्कुल सही काम किया" — धर्मेंद्र प्रधान:
इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NCERT के कदम का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कहा;
"यह बिल्कुल सही है। NCERT ने बहुत सही कदम उठाया है। हमारी आने वाली पीढ़ियों को आपातकाल के काले कारनामों (dark deeds) के बारे में जानना और समझना चाहिए, ताकि देश में दोबारा कभी ऐसी स्थिति पैदा न हो। यही कारण है कि NCERT इसे सामने लेकर आया है। NCERT ने बहुत अच्छा काम किया है।"
राजनीतिक बयानबाजी और 'ताकतवर नेता' की छवि पर वार
इस नए पाठ्यक्रम के शामिल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। भाजपा और सत्ता पक्ष का मानना है कि विपक्ष और विशेषकर राहुल गांधी द्वारा इंदिरा गांधी को लगातार एक बेहद 'ताकतवर नेता' के रूप में पेश करने का जो प्रचार किया जाता रहा है, यह फैसला उस नैरेटिव को संतुलित करेगा।
नेताओं का कहना है कि इंदिरा गांधी के शासनकाल में लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन और आपातकाल के क्रूर फैसलों की सच्चाई अब स्कूली बच्चों के सामने खुलकर आएगी। इस बदलाव के जरिए नई पीढ़ी को इतिहास के दोनों पहलुओं को समझने का मौका मिलेगा, जिससे वे खुद तय कर सकेंगे कि देश के लोकतांत्रिक इतिहास में उस दौर की क्या भूमिका थी।
निष्कर्ष: शिक्षा मंत्रालय और NCERT का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र केवल देश की उपलब्धियों को ही न पढ़ें, बल्कि उन ऐतिहासिक भूलों और संकटों से भी सीख लें जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र को झकझोर कर रख दिया था। सरकार का मानना है कि आपातकाल की ज्यादतियों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाकर छात्रों में लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति चेतना और संवेदनशीलता को मजबूत किया जा सकेगा।
