SDM गरिमा लोहिया के कड़े रुख के बाद पुराने मामले और बदहाली फिर चर्चा में: मोकामा के सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक।।
SDM गरिमा लोहिया के कड़े रुख के बाद पुराने मामले और बदहाली फिर चर्चा में: मोकामा के सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक।।
मोकामा/बाढ़/N5: बिहार के पटना जिले अंतर्गत मोकामा प्रखंड के सरकारी विद्यालयों की दयनीय स्थिति एक बार फिर चर्चा में है। बाढ़ की अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) गरिमा लोहिया द्वारा स्कूलों के औचक निरीक्षण के दौरान पाई गई अव्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए स्पष्टीकरण मांगने की कार्रवाई के बाद, शिक्षा व्यवस्था की पुरानी परतें भी खुलने लगी हैं।
बिहार के मोकामा क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं की बदहाली का मामला सामने आया है। क्षेत्र के स्कूलों की जर्जर हालत और कुव्यवस्था को देखते हुए बाढ़ की अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) गरिमा लोहية ने कड़ी नाराजगी जताई है।
अचानक निरीक्षण और लापरवाही पर एक्शन
विद्यालयों के औचक निरीक्षण के दौरान कक्षाओं की स्थिति, पठन-पाठन के स्तर और बुनियादी सुविधाओं में भारी खामियां पाई गईं। बच्चों की पढ़ाई और स्कूल परिसरों की लाचारी को देखकर प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मियों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
पुराने मामलों पर लीपापोती और बाल श्रम की घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब मोकामा के स्कूलों में इस तरह के मामले उजागर हुए हैं। स्थानीय स्तर पर पहले भी लापरवाह तंत्र को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता के कारण मामलों को रफा-दफा कर दिया गया। इसी प्रखंड से पूर्व में स्कूली बच्चों से ईंटें उठवाने और मजदूरी कराने जैसे संगीन मामले भी सामने आ चुके हैं, जिससे विद्यालयों में प्रशासनिक नियंत्रण और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
15-20 वर्षों से निम्न स्तरीय शिक्षा का दंश
स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 15 से 20 वर्षों से बच्चे निम्न स्तर की बुनियादी सुविधाओं और कमजोर गुणवत्ता वाली शिक्षा के सहारे आगे बढ़ने को मजबूर हैं। हालांकि बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की बहाली को लेकर कुछ प्रयास हुए हैं—जिनमें तेजस्वी यादव के कार्यकाल के दौरान शिक्षा क्षेत्र में उठाए गए कदम भी शामिल हैं—लेकिन विशाल समस्या के आगे ये सुधार 'ऊंट के मुंह में जीरा' साबित हो रहे हैं।
व्यापक सुधार की सख्त जरूरत
बिहार के सरकारी स्कूलों में केवल कागजी नोटिस या तात्कालिक स्पष्टीकरण से स्थिति सुधरने वाली नहीं है। जब तक बाल श्रम जैसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी और वर्षों से जारी निम्न स्तरीय शिक्षण व्यवस्था में अमूलचूल परिवर्तन नहीं किया जाएगा, तब तक छात्रों का भविष्य अधर में ही रहेगा।
N5: प्रशासनिक अधिकारियों के कड़े रुख के बाद अब देखना यह होगा कि क्या इस बार धरातल पर कोई ठोस सुधार देखने को मिलता है या मामला फिर से ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
(रिपोर्ट- न्यूज डेस्क N5)
