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हिंगोली में 'स्कूल ठीक करो' अभियान की पहली बड़ी जीत: शराबी प्रिंसिपल निलंबित- अभिजीत दीपके।।



हिंगोली में 'स्कूल ठीक करो' अभियान की पहली बड़ी जीत: शराबी प्रिंसिपल निलंबित- अभिजीत दीपके।। 

हिंगोली|महाराष्ट्र|N5: महाराष्ट्र के हिंगोली जिले स्थित लिंबाला गाँव के जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य को नशे की हालत में स्कूल आने और कर्तव्यों में लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा चलाए जा रहे 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत ग्रामीणों के विरोध-प्रदर्शन के बाद जिला परिषद प्रशासन ने यह कार्रवाई की।

कार्रवाई और मुख्य घटनाक्रम का ब्योरा इस प्रकार से है। 
शिक्षक पर लग रहे थे ​नशे में आने का आरोप। प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य विनोद कटके पर लंबे समय से आरोप था कि वे शराब के नशे में स्कूल आते थे, कक्षाओं में पढ़ाने के बजाय सो जाते थे और विद्यार्थियों व अभिभावकों के साथ अभद्र व्यवहार करते थे।
​उठाये गए प्रशासनिक कदम। ग्रामीणों की लगातार शिकायतों और अभिजीत दिपके की चेतावनी के बाद जिला परिषद के सीईओ विवेक गायकवाड़ ने प्रधानाचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया। जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर महाराष्ट्र जिला परिषद सेवा नियमों के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
​ग्रामीण ने दिये सत्यापन और सबूत। ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए फोटो और साक्ष्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय पंचायत समिति, पाल तय किया गया है।

ग्रामीणों की जीत और आगे की रणनीति कुछ इस प्रकार से होंगे।
​प्रिंसिपल के निलंबन के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने इसे ग्रामीणों के एकजुट संघर्ष का परिणाम बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए कहा:
​"यह हिंगोली जिले के लिंबाला गांव के लोगों की पहली बड़ी जीत है। शराबी प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया गया है। मैं इस जीत को अब्दुल और उनके पिता को समर्पित करता हूं। जैसा कि अब्दुल ने कहा था— 'अब रुकना नहीं है, स्कूल ठीक करके ही रहेंगे'।"

अधूरी मांगें और जारी रहेगा आंदोलन- अभिजीत दीपके। 
​दो और शिक्षकों की मांग। अभिजीत दिपके ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। स्कूल में अध्यापकों की भारी कमी को दूर करने के लिए कम से कम दो और शिक्षकों की तत्काल भर्ती की मांग की जा रही है।
​शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल। दिपके ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि अधिकारी अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाते हैं, इसलिए वे गरीब और किसान-मजदूरों के बच्चों के सरकारी स्कूलों में पीने के पानी, बेंच और मूलभूत सुविधाओं की कमी पर ध्यान नहीं देते।
​ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्कूल में नए शिक्षकों की तैनाती और शैक्षणिक माहौल पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता, उनका शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा।
            (रिपोर्ट- न्यूज डेस्क N5)

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