Skip to main content

"चुनाव आयोग और शिंदे गुट पर तीखा हमला चुनाव आयोग ने हमारी पार्टी को बेच दिया- संजय राउत।"



"चुनाव आयोग और शिंदे गुट पर तीखा हमला चुनाव आयोग ने हमारी पार्टी को बेच दिया- संजय राउत।"

नई दिल्ली/N5:
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक बार फिर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बेहद कड़ा और हमलावर रुख अपनाया है। दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए संजय राउत ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर जो फैसला सुनाया है, वह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के पूरी तरह खिलाफ है।

​"अस्तित्वहीन व्यक्ति को सौंप दी गई शिवसेना"
​संवाददाताओं को संबोधित करते हुए संजय राउत ने कहा कि चुनाव आयोग को इस तरह का फैसला सुनाने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की निष्पक्षता खत्म हो चुकी है और उसने एक ऐसे व्यक्ति को पार्टी का असली नाम और निशान सौंप दिया, जिसका शिवसेना के गठन और उसके मूल सिद्धांतों से कोई ऐतिहासिक या वैचारिक संबंध नहीं है।
​"चुनाव आयोग को कोई अधिकार नहीं है। मैंने पहले भी कहा है कि चुनाव आयोग ने शिवसेना को लेकर जो फैसला लिया है, हमारी पार्टी का चुनाव चिन्ह और नाम एक ऐसे आदमी को दिया है जिसका पार्टी से कोई संबंध नहीं है, वजूद नहीं है, अस्तित्व नहीं है। मैंने इतना ही कहा कि चुनाव आयोग ने हमारी पार्टी को बेच दिया।"
— संजय राउत (सांसद, शिवसेना-UBT)

स्वायत्त संस्थाओं की निष्पक्षता पर उठाए गंभीर सवाल।
​संजय राउत के इस बयान से एक बार फिर शिवसेना के नाम और धनुष-बाण चुनाव चिन्ह को लेकर छिड़ा विवाद गरमा गया है। गौरतलब है कि शिवसेना में हुई बगावत के बाद चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे नीत गुट को असली 'शिवसेना' मानते हुए पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किया था।
​संजय राउत का दावा है कि यह फैसला स्वायत्त संवैधानिक संस्थाओं पर बने राजनीतिक दबाव और निष्पक्षता की अनदेखी का नतीजा है। उन्होंने कहा कि आयोग ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और कार्यकर्ताओं की निष्ठा को दरकिनार करते हुए पार्टी को किसी "व्यापारिक वस्तु" की तरह बेच दिया है।
N5: संजय राउत द्वारा सीधे तौर पर चुनाव आयोग पर 'पार्टी बेचने' का आरोप लगाए जाने के बाद सत्ता पक्ष और विरोधी गुटों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सत्ताधारी दल और शिंदे गुट के नेताओं ने राउत के इस बयान को संवैधानिक संस्थाओं और अदालती/प्रशासनिक प्रक्रियाओं का अपमान करार दिया है। वहीं, शिवसेना (UBT) इस लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट और जनता के दरबार दोनों जगह मजबूती से लड़ने का दावा कर रही है।
          ( रिपोर्ट- न्यूज डेस्क N5)

Popular Posts

एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इस एक बात का ख्याल अवश्य रखना चाहिए।

एक सेल्स मैन को ये काम अवश्य करनी चाहिए, यदि आप एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इस एक बात  का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। एक सेल्स मैन को ये काम अवश्य करनी चाहिए। यदि आप एक सेल्स मैन का काम कर रहें हैं तो आपको इन बातों का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। हम कोई भी काम करते हैं उसकी योजना अवश्य तैयार करते हैं। एक छोटा सा छोटा काम के लिए भी हम योजना बनाते हैं। हलांकि छोटे कामों के लिए बनाये गए योजना हमारा दिमाग को पता नहीं चलता। हमारे दिमाग को इसके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसपर कभी आपने सोचा है कि आख़िर ऐसा क्यों होता है ? इसकी वजह को हमे जानने का प्रयास अवश्य करनी चाहिए। ऐसे तो इसके अनेकों वजह हो सकते हैं और इसके मनोवैज्ञानिक कारण भी कई हो सकते हैं, लेकिन हमे इन भारी वजहों को छोड़कर एक सरल वजह की तलाश करने की जरूरत है। मेरे अनुसार सरल स्वभाव से इसका एक वजह यह भी हो सकता है कि हमारा दिमाग इन छोटे-छोटे कामों को पहले कई बार कर चुका होता है। यूं कहें इस काम को मेरा दिमाग पूर्ण रूप से अभ्यस्त हो गया होता है। इसलिए हमारा दिमाग को इस छोटा काम को पूरा करने में किसी प्रकार की परेश...

एक कप चाय, मिट्टी वाली में - चाय को पीने में जो मजा है, वो मजा सात समन्दर पार जाकर भी नहीं वो कैसे !

एक कप चाय से याद आया कि मिट्टी के बर्तन वाली चाय को पीने में जो मजा है, वो मजा सात समन्दर पार जाकर एक प्रेमी को अपने प्रेमिका या एक प्रेमिका को अपने प्रेमी से मिलने में भी नहीं होगा! लेकिन वो मजा इस चाय पीने में आपको मिलेगा।  आप महिला हों या पुरुष यदि आप अपने जीवन में, प्रेम में प्रवाहित होने के आनंद से वंचित रह गाएं हैं तो हमारी मानिये एक बार इस चाय के प्रेम में बह जाइये, डूब जाइये और इसके गर्माहट में गोते लगा लीजिये! इसके मंद-मंद सुगंध में अपने नाक के दोनों सुराग को झोंक दीजिये। लेकिन एक बात का ख्याल रखियेगा,   इस चाय को पीने में कभी जल्दीबाजी नहीं कीजियेगा। नहीं तो, आपका जीभ आपसे नाराज हो जायेगा। बेमतलब के आप बेचारा स्वभाव से कोमल जीभ को रुखा कर दीजियेगा। यदि आपको विश्वास नहीं होता, तो एक बार मिट्टी वाला चुक्का में परोसी गई चाय को अपने होंठ से लगाकर और चाय को जीभ पर गिराकर तो देखिये! जैसे हीं, यह चाय आपके जीभ को स्पर्श करेगी वैसे हीं आप स्वयं इसके स्वाद से परिचित हो जाएंगें। हमारी मानिये तो आज हीं आप नुक्कड़ वाली एक कप चाय का मज़ा ले लीजिये। भारत आधुनीकता की ओर कदम बढ़ा च...

राहुल गांधी ने 'एल्फिंस्टन' (Elphinstone) फाइल का जिक्र करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को घेरा। सदन में भारी हंगामा।।

राहुल गांधी ने 'एल्फिंस्टन' (Elphinstone) फाइल का जिक्र करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को घेरा। सदन में भारी हंगामा।। राहुल गांधी ने संसद में जिस 'एल्फिंस्टन' (Elphinstone) फाइल या संदर्भ का जिक्र किया, वह सीधा हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की कार्यशैली पर था। गांधी ने सदन में एक पुरानी फाइल या रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह तर्क देने की कोशिश की कि सरकार कुछ खास उद्योगपतियों (अडानी-अंबानी) को फायदा पहुँचाने के लिए नियमों में बदलाव करती है। उन्होंने 'एल्फिंस्टन' नाम का जिक्र उन ऐतिहासिक नियमों या व्यवस्थाओं के संदर्भ में किया जो मुंबई के बंदरगाहों या रेलवे के बुनियादी ढांचे से जुड़ी थीं। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को घेरते हुए निम्नलिखित बातें कहीं: ​नियमों में बदलाव: उनका आरोप था कि सरकार ने पुराने नियमों (जिनका उन्होंने एल्फिंस्टन संदर्भ से जोड़ा) को दरकिनार कर दिया ताकि एयरपोर्ट्स और पोर्ट्स का नियंत्रण कुछ विशेष व्यापारिक समूहों को दिया जा सके। ​अडाणी समूह का जिक्र: उन्होंने दावा किया कि पहले नियम था कि जिसे एयरपोर्ट संचालन का अनुभव नहीं है, उसे टेंडर नहीं म...