"गृह मंत्री जवाब देने को तैयार थे, विपक्ष ही भाग खड़ा हुआ- सायोनी घोष का कड़ा बयान। "
कोलकाता/N5:
संसद के जारी सत्र में लगातार हो रहे हंगामे और सदन की कार्यवाही के बाधित होने को लेकर राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है। कोलकाता हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद सायोनी घोष ने संसद में विपक्ष के आचरण और कार्यवाही में पैदा की जा रही रुकावटों पर गहरी चिंता व्यक्त की और कड़ा ऐतराज जताया।
सायोनी घोष ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि जनहित के मुद्दों को उठाने और देश की महत्वपूर्ण समस्याओं पर सार्थक चर्चा करने के लिए संसद सत्र का हर एक पल बेहद कीमती होता है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि सत्र के दौरान विपक्ष ने लगातार परेशानियां खड़ी की हैं, जिससे जनता के अहम मुद्दों पर चर्चा का समय बर्बाद हुआ है।
"मुद्दों को उठाने के लिए सेशन का समय बहुत कीमती होता है। विपक्ष ने कई परेशानियां खड़ी की थीं। यह देश और सदन की मर्यादा के लिए अच्छी बात नहीं है। गृह मंत्री अपना जवाब देने के लिए तैयार थे। गृह मंत्री कभी सवालों से दूर नहीं भागते हैं लेकिन विपक्ष उनके जवाबों से दूर जरूर भागता है।
— सायोनी घोष (कोलकाता एयरपोर्ट पर बयान)"
सदन की मर्यादा और बहस से पीछे हटता विपक्ष।
सांसद ने संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि जब गृह मंत्री खुद सदन में उपस्थित होकर विपक्ष के सभी सवालों का जवाब देने के लिए पूरी तरह तत्पर थे, तब भी विपक्ष ने रचनात्मक बहस में शामिल होने के बजाय हंगामा करना चुना।
उनके बयान को इन मुख्य बिंदु से सरलता से जांच कर सकते है:
संसदीय गरिमा का हनन: बार-बार सदन के काम में रुकावट डालना देश और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादा के अनुकूल नहीं है।
जवाबदेही से भागना: गृह मंत्री कभी भी किसी सवाल से पीछे नहीं हटते, लेकिन विपक्ष जवाब सुनने का धैर्य दिखाने के बजाय बहस छोड़ देता है।
जनता के समय का नुकसान: संसद के बहुमूल्य समय को नारेबाजी और रुकावटों में गंवा देना जनता के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया दर्शाता है।
संसदीय सत्रों के दौरान अक्सर नीतिगत मुद्दों और विधेयकों पर पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी झड़पें देखने को मिलती हैं। ऐसे में संसद के भीतर और बाहर उठ रहे यह सवाल काफी अहम हो जाते हैं कि जनप्रतिनिधि हंगामे के बजाय संवाद का रास्ता कब चुनेंगे।
N5: कोलकाता में दिया गया यह बयान स्पष्ट करता है कि सदन में हो रहे लगातार गतिरोध से न केवल विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि इससे राजनीतिक माहौल भी गर्मा गया है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाती है या पक्ष-विपक्ष के बीच यह तल्खी और गहरी होती है।
(रिपोर्ट- राजनीतिक न्यूज डेस्क N5)
