चीनी 60 रुपए प्रति Kg हो गया इसपर सपा प्रमुख अखिलेश यादव का केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला। बोला...
चीनी 60 रुपए प्रति Kg हो गया इसपर सपा प्रमुख अखिलेश यादव का केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला। बोला...
लखनऊ|उत्तर प्रदेश |N5:
सवाल- चीनी 60 रुपए Kg हो गया आप क्या कहेंगे।
जवाब- "हर चीज महंगी है और महंगाई क्यों है क्योंकि कोई मुनाफा कमा रहा है। इस देश में एक ही संकट है वो है बीजेपी, बीजेपी हटेगी संकट हटेगा - माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी, लखनऊ।"
महंगाई सच में खूंखार हो चुका है। उपर से रोजगार नहीं।
अखिलेश जि ने यहां तक कह दिया की महंगाई इतनी होगी कि आप दो शर्ट नहीं खरीद सकोगे।
लखनऊ में पत्रकारों को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा किया है।
दैनिक उपयोग की चीजों जैसे चीनी के दाम ₹60 प्रति किलो तक पहुँचने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने इस आर्थिक संकट के पीछे सत्ता के संरक्षण में चल रही मुनाफाखोरी को जिम्मेदार ठहराया।
मुनाफाखोरी और भारी टैक्स की दोहरी मार।।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने बयान में स्पष्ट कहा, "हर चीज महंगी है और महंगाई क्यों है क्योंकि कोई मुनाफा कमा रहा है। इस देश में एक ही संकट है वो है बीजेपी, बीजेपी हटेगी संकट हटेगा।" उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा के सामानों पर टैक्स का बोझ इतना बढ़ा दिया गया है कि आम नागरिक का जीना दुश्वार हो गया है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जो चाय कभी ₹1 या ₹2 में मिलती थी, वह आज ₹20 से ₹25 तक पहुँच चुकी है।
क्रय शक्ति में गिरावट और गहराता बेरोजगारी संकट।।
अखिलेश यादव ने चेतावनी दी कि यदि महंगाई पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आम जनता की क्रय शक्ति इस कदर घट जाएगी कि लोग अपनी बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं कर सकेंगे। एक ओर जहाँ खाने-पीने और कपड़े की चीजें पहुँच से बाहर होती जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पूरी तरह ठप हैं।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी लागू करते समय भ्रष्टाचार व महंगाई खत्म करने के जो दावे किए गए थे, वे पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक भारतीय जनता पार्टी सत्ता से नहीं हटती, तब तक देश की जनता को महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक मंदी के इस दुचक्र से मुक्ति मिलना संभव नहीं है।
(रिपोर्ट- न्यूज डेस्क N5)
